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Written By: Kishori Mishra | Updated : May 12, 2020 6:08 PM IST
ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को मैमोग्राफी स्क्रीनिंग से कर सकते हैं कम, समय से पहले कराएं जांच
Mammography Screening: ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) महिलाओं में सबसे अधिक होने वाले कैंसर में से एक है। इस कैंसर को लेकर हाल ही में एक शोध हुआ है। इस शोध के मुताबिक, कई महिलाओं पर हुए अध्ययन से पता चला है कि ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआत में ही मैमोग्राफी स्क्रीनिंग (Mammography Screening) से ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम ( Breast Cancer Risk) किया जा सकता है। यह अध्ययन CANCER में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने स्वीडन की लगभग एक तिहाई महिलाओं के डाटा की जांच की है, जिनका मैमोग्राफी स्क्रीनिंग किया जा सकता था।
इस अध्ययन के बारे में शोधकर्ता लेज्लो टेबर का कहना है कि स्तन कैंसर की समय से जांच होने पर इसके खतरे को काफी हद तक कम (Reduction in Cancers) किया जा सकता है। बता दें कि टेबर स्वीडन के फालून सेंट्रल हॉस्पिटल के डॉक्टर हैं।
इस अध्ययन में 54,9091 महिलाओं पर जांच हुआ है, जिसमें स्तन कैंसर और कैंसर के दर की गणना की गई है। इस अध्ययन में ऐसी महिलाओं को शामिल किया गया है, जो 10 सालों से इस गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। इसके साथ ही इसमें कुछ ऐसी महिलाओं को लिया गया, जो मैमोग्राफी स्क्रीनिंग में भाग लेती थीं और कुछ ऐसी महिलाएं थीं, जो मैमोग्राफी स्क्रीनिंग में हिस्सा नहीं लेती थीं।
अध्ययन में देखा गया कि मैमोग्राफी के कारण महिलाओं में 41 प्रतिशत कैंसर का निदान किया गया, जो 10 वर्षों से इस गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। इसके साथ ही स्क्रीनिंग में भाग लेने वाली 25 प्रतिशत महिलाएं, इससे छुटकारा पा चुकी (Fatal Breast Cancer) थीं।
इस बारे में डॉक्टर डॉफी ने कहा, "मैमोग्राफी स्क्रीनिंग में भाग नहीं लेने वाली महिलाओं की तुलना में स्क्रीनिंग (Mammography Screening) में हिस्सा लेने वाली महिलाओं में अधिक सुधार देखा गया है। कैंसर का उपचार एक समय अवधि के दौरान किया जाता है। अधिक समय बीत जाने पर कैंसर का उपचार करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है और इसका उपचार कितना प्रभावी होगा, इसके बारे में भी कुछ कहा नहीं जा सकता।"
शोधकर्ता ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि कैंसर स्क्रीनिंग में भाग लेने से स्तन कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है, इसलिए समय पर उपचार कराना बहुत ही जरूरी है। इसके साथ ही बीच में उपचार छोड़ना खतरे को बढ़ावा देने के समान है।