हार्ट अटैक के लक्षण महिलाओं और पुरुषों में होते हैं अलग, वैज्ञानिकों ने बताया क्यों होता है ऐसा

एक नयी स्टडी में कहा गया है कि महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : February 14, 2024 7:01 AM IST

Heart attack symptoms in women and men: हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियां अब कोई दुर्लभ बात नहीं। साल-दर-साल दुनियाभर में हार्ट अटैक और स्ट्रोक की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ते हुए देखी गयी हैं। भारत में भी हार्ट अटैक के मामले पिछले कुछ में बहुत तेजी से बढ़े हैं। वहीं, 40 साल से कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक और हार्ट डिजिजेज काफी कॉमन हो चुकी हैं।

हार्ट अटैक के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of heart attack)

ऐसा कहा जाता है कि हार्ट अटैक के लक्षण कई महीनों पहले ही दिखायी देने लगते हैं। हालांकि, एक नयी स्टडी में कहा गया है कि महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। इस स्टडी के अनुसार महिलाओं में हार्ट अटैक के ये लक्षण दिखायी दे सकते हैं-

  • बहुत पसीना आना
  • मतली या उल्टी जैसा महसूस होना
  • चक्कर आना
  • बहुत अधिक थकान  महसूस होना (extreme fatigue or tiredness)

गौरतलब है कि ये समस्याएं महिलाओं में काफी कॉमन हैं और सोते समय या आराम करते समय ये अधिक महसूस हो सकती हैं। वहीं महिलाओं के विपरीत पुरुषों में हार्ट अटैक के ये लक्षण दिखायी देते हैं-

  • सीने में दर्द या चेस्ट पेन (Chest pain)
  • चेस्ट में बहुत अधिक दबाव महसूस करना
  • एंग्जायटी या बेचैनी

महिलाओं में ये लक्षण दिखायी नहीं देते या हमेशा गंभीर नहीं होते हैं। इसी तरह अधिकांश मामलों में हार्ट अटैक का सबसे बड़ा या प्रमुख लक्षण नहीं है।

मेयो क्लीनिक के शोधकर्ताओं ने इस बात का खुलासा किया कि इन लक्षणों को देखते हुए यह समझा जा सकता है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के खतरेकम करने के साथ-साथ उनमें दिखायी देने वाले अलग लक्षणों को भी समझना होगा।

क्यों अलग होते हैं महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षण?

स्टडी में कहा गया है कि जब महिलाओं को हार्ट अटैक के लक्षण महसूस होते हैं तो आमतौर पर लोग इसे सही तरह से समझ नहीं पाते। जैसे महिलाओं को सांस लेने से जुड़ी तकलीफें (respiratory system related problems) होती हैं, मतली (Nausea) और उल्टी, पीठ या जबड़े में दर्द जैसी परेशानियां होती हैं। वहीं कुछ महिलाओं को चक्कर आना, छाती के निचले हिस्से या पेट के ऊपर के एरिया में दर्द के साथ-साथ बहुत अधिक थकान महसूस हो सकती है। ये सारी समस्याएं महिलाओं को रोजमर्रा के जीवन में महसूस होती हैं।

हाई बीपी और मोटापा बढ़ाते हैं हार्ट अटैक का रिस्क

मैनकाटो में मेयो क्लिनिक हेल्थ सिस्टम के फैमिली हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. चतुरा अलूर ने कहा, ‘सबसे पहले हृदय रोगों का खतरा बढ़ाने वाले कारणों को समझना और उन आदतों को कंट्रोल करना महत्वपूर्ण है जो हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।’ अलूर ने कहा, ‘कुछ कारक महिलाओं में हृदय रोग के विकास में पारंपरिक रिस्क फैक्टर्स की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर लेवल ऐसे ही कुछ कारण हैं।’

महिलाओं में हार्ट अटैक रोकने के लिए उपाय? (How to prevent heart attack in women)

  • डायबिटीज (diabetes), मेंटल स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी बीमारियों को कंट्रोल करें।
  • स्मोकिंग छोड़ दें।
  • कसरत करें और सुस्त रहने की आदतों से बचें।

डॉ. अलूर ने कहा, ‘सभी उम्र की महिलाओं को हार्ट अटैक को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।’ महिलाओं को बिना किसी पूर्व लक्षण के भी दिल का दौरा पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोरोनरी हार्ट डिजिज की वजह से जिन महिलाओं की मृत्यु हुई उनमें से 64 प्रतिशत महिलाओं में पहले कोई लक्षण नहीं दिखायी दिए थे।

बता दें कि महिलाओं में मेनोपॉज, ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम ( Broken heart syndrome) और प्रेगनेंसी से जुड़ी कॉम्प्लिकेशन्स जैसी स्थितियां हार्ट अटैक का रिस्क (risk factors for heart attack in women) बढ़ा सकती हैं।

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