
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 14, 2026 4:43 PM IST
dengue and new urine test (Image Credit: chatgpt)
हर साल डेंगू हजारों मामले सामने आते हैं। कुछ बेहद गंभीर, तो कुछ जल्दी ठीक हो जाते हैं। हालांकि पहले पहल लक्षणों को सामान्य समझा जाता है और बाद में ही ब्लड टेस्ट से डेंगू का पता लगता है। इसमें एक सबसे बड़ी चुनौती यह भी होती है कि कौन-सा मरीज अचानक गंभीर स्थिति में पहुंच सकता है। इसी को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में दावा किया है कि साधारण से मूत्र परीक्षण के जरिए पहले ही यह अनुमान लगा लिया जा सकेगा कि मरीज में गंभीर डेंगू के लक्षण विकसित होने का खतरा कितना अधिक या कम है। रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह टेस्ट अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को कम करने और मरीजों की जान बचाने में बड़ी भूमिका अदा कर सकता है।
यह रिसर्च नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर के वैज्ञानिकों ने की है। रिसर्च में पाया गया कि मूत्र में मौजूद दो खास प्रोटीन- एनजीएएल (NGAL) और सुपार (suPAR) परीक्षण में यह संकेत दे सकते हैं कि डेंगू की स्थिति में मरीज गंभीर अवस्था में पहुंच सकता है या नहीं। इसके लिए वैज्ञानिकों ने डेंगू के मरीजों और स्वस्थ लोगों के मूत्र नमूनों की जांच रप विश्लेषण किया। विश्लेषण में पाया गया कि गंभीर मरीजों में इन प्रोटीनों का स्तर ज्यादा था, वहीं सामान्य लोगों में स्थिर। इस रिसर्च को जनवरी 2026 में मेडिकल जर्नल ओपन फोरम इन्फेक्शियस डिजीज में प्रकाशित किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने कहा कि यह दुनिया का पहला ऐसा टेस्ट है, जो गंभीर डेंगू के खतरे का पहले से अनुमान लगा सकेगा।
रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह टेस्ट मरीज के मूत्र में मौजूद सूजन से जुड़े बायोमार्कर्स की पहचान करता है। असल में जब शरीर में डेंगू का संक्रमण बढ़ता है, तब एनजीएएल (NGAL) और सुपार (suPAR) प्रोटीन का स्तर भी बढ़ जाता है। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि ये संकेत गंभीर डेंगू के लक्षण विकसित होने से पहले सामने आ जाते हैं। ऐसे में मूत्र परीक्षण से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस मरीज को अस्पताल में भर्ती करना जरूरी है और कौन घर पर रहकर ठीक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने यह भी दावा किया कि यह तरीका केवल सामान्य चेतावनी संकेतों की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा सटीक साबित हुआ।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह नई तकनीक डेंगू के इलाज में बड़ा बदलाव लाएगी। डॉक्टरों कहते हैं कि अक्सर डेंगू के मरीजों को एहतियात के तौर पर अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है, जिससे अस्पतालों पर अधिक दबाव बढ़ता है। लेकिन इस टेस्ट से हाई-रिस्क मरीजों की जल्दी पहचान हो जाएगी और डॉक्टर गंभीर मरीजों को ही प्राथमिकता दें सकेंगे। वहीं, जिन मरीजों में खतरा कम पाया जाएगा, उन्हें घर पर निगरानी में रखा जा सकेगा। इससे मेडिकल संसाधनों का बेहतर ढंग से इस्तेमाल होगा और मरीज व अस्पतालों पर अनावश्यक बोझ कम हो सकेगा।
आपको बता दें कि अब नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर की रिसर्च टीम एक ऐसा ऑल-इन-वन टेस्ट विकसित करने पर काम कर रही है, जो मूत्र में डेंगू वायरस और इन खास प्रोटीनों दोनों की पहचान कर सकेगा। वैज्ञानिकों का मुख्य लक्ष्य भविष्य में मरीजों को अच्छी सुविधा देना है। यदि यह तकनीक सफल हो जाती है, तो डेंगू की जांच पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो सकेगी। मेडिकल जर्नल ओपन फोरम इन्फेक्शियस डिजीज में प्रकाशित रिसर्च में कहा गया है कि यह खोज खासकर उन देशों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां हर साल बड़ी संख्या में डेंगू के मामले सामने आते हैं।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल पैंक्रियाज से स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।