
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : June 5, 2026 5:15 PM IST
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
एग्जाम के बाद वाला स्ट्रेस
NEET जैसी कठिन और लंबे समय तक चलने वाली परीक्षा की तैयारी सिर्फ एक अकादमिक यात्रा नहीं होती, बल्कि यह मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी एक बहुत बड़ा दबाव बन जाती है। महीनों या वर्षों तक लगातार पढ़ाई, उम्मीदें, डर, प्रतिस्पर्धा और परिवार की अपेक्षाएं मिलकर कई छात्रों को अंदर से थका देती हैं। NEET के बाद जब यह दबाव अचानक कम होता है, तो कई छात्रों में एक अजीब सा खालीपन, थकान या भावनात्मक गिरावट देखने को मिलती है। यह स्थिति कभी-कभी बर्नआउट और डिप्रेशन की ओर इशारा कर सकती है, जिसे अक्सर लोग नॉर्मल स्ट्रेस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा कई छात्रों के साथ हो सकता है।
लेकिन कई माता-पिता, दोस्त या टीचर अपने स्टूडेंट को सही से समझ नहीं पाते हैं। वह जान ही नहीं पाते हैं बच्चा डिप्रेश है, बर्नआउट है, उसे किसी के साथ की जरूरत है या फिर वह अपनी काबिलियत पर शक कर रहा है। छात्रों में दिखने वाले ऐसे ही संकेतों के बारे में बता रही हैं साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा। हमने उन्हें ये सवाल पूछा, उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यहां ऐसे संकेत दिए गए हैं जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।
बर्नआउट और डिप्रेशन क्या है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) ने "बर्नआउट को काम की जगह पर लंबे समय तक रहने वाले और न संभाल पाने लायक तनाव से पैदा होने वाले एक सिंड्रोम के तौर पर बताया है। इस स्थिति की पहचान तीन लक्षणों से होती है- ऊर्जा खत्म होने या बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, अपनी नौकरी से मानसिक दूरी बढ़ना या नौकरी के प्रति नकारात्मक सोच या निराशावादी नजरिया रखना और बेअसर महसूस करना और कुछ हासिल न कर पाने का एहसास होना।"
वहीं डिप्रेशन का मतलब WHO के अनुसार "डिप्रेशन एक आम मानसिक बीमारी है। इसमें लंबे समय तक उदास मन रहना या किसी भी काम में मजा या दिलचस्पी न आना शामिल है। डिप्रेशन, रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाले मूड के बदलावों और भावनाओं से अलग होता है। यह जिंदगी के हर पहलू पर असर डाल सकता है, जिसमें परिवार, दोस्तों और समाज के साथ रिश्ते भी शामिल हैं। इसकी वजह से स्कूल और काम-काज में भी परेशानियां हो सकती हैं।"
अगर परीक्षा के बाद भी दिमाग पूरी तरह “शट डाउन” जैसा महसूस हो रहा है, तो यह सिर्फ आराम करने की जरूरत नहीं हो सकती। पढ़ाई या किसी भी काम में रुचि खत्म होना, दिनभर बिना वजह थकान महसूस होना, छोटे काम भी भारी लगना आदि। यह बर्नआउट का एक संकेत हो सकता है, जहां दिमाग लंबे तनाव के बाद रिकवर नहीं कर पा रहा होता है।
NEET के बाद जिन चीजों में पहले खुशी मिलती थी, अगर अब उनमें भी कोई रुचि नहीं बची है, तो यह एक गंभीर संकेत है। ऐसा दिए गए एग्जाम के आने वाले रिजल्ट की वजह से भी हो सकता है। जैसे- दोस्तों से मिलना अच्छा न लगना, हॉबीज में मन न लगना और हर चीज बेकार या खाली महसूस होना। यह स्थिति अक्सर डिप्रेशन से जुड़ी हो सकती है, खासकर जब यह लंबे समय तक बनी रहे।
तनाव और मानसिक दबाव नींद के पैटर्न को डायरेक्टली इफेक्ट करते हैं। इसमें बहुत ज्यादा सोना या बहुत कम सोना, रात में बार-बार नींद टूटना, सुबह उठने का मन न करना शामिल है। डॉक्टर बताती हैं कि NEET के बाद कई छात्रों में यह रीबाउड इफेक्ट की तरह दिखता है, जहां दिमाग ओवरलोड के बाद असंतुलित हो जाता है।
परीक्षा के बाद सेल्फ एनालाइसिस बहुत ही ज्यादा नॉर्मल है, लेकिन अगर यह सेल्फ क्रीटीजम में बदल जाए, तो यह खतरनाक हो सकता है। जैसे खुद से ऐसे शब्द कहना कि “मैं कुछ नहीं कर सकता/सकती”, लगातार अपनी तुलना दूसरों से करना और असफलता का डर या गिल्ट महसूस करना आदि। यह मानसिक रूप से आत्मविश्वास को धीरे-धीरे कमजोर करता है।
बर्नआउट और डिप्रेशन में व्यक्ति धीरे-धीरे खुद को अलग करने लगता है। उसका लोगों से बात करने का मन नहीं करता है, फोन या सोशल मीडिया से दूर रहने का दिल करता है और कमरे में अकेले रहना पसंद करना आदि। यह एक तरह का कोपिंग मेकैनिज्म भी हो सकता है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक रहे तो ध्यान देना जरूरी है।
छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना या अचानक भावनात्मक बदलाव भी छात्र में डिप्रेशन और बर्नआउट का एक संकेत है। इसके अलावा जल्दी इरिटेट होना, बिना कारण रो देना, इमोशन्स पर कंट्रोल न कर पाना आदि। यह दिखाता है कि दिमाग अभी भी हाई स्ट्रेस मोड में फंसा हुआ है।
NEET की तैयारी में छात्र लंबे समय तक एक हाइ प्रेशर सर्वाइवल मोड में रहते हैं। एग्जाम खत्म होने के बाद यह प्रेशर अचानक खत्म हो जाता है, लेकिन दिमाग अभी भी उसी तनाव के पैटर्न में चलता रहता है। इसी कारण इमोशनल क्रैश या बर्नआउट दिखाई देता है।
खुद को समय देना और जल्दी नॉर्मल होने का दबाव न डालना
हल्की दिनचर्या शुरू करना जैसे चलना, सुबह की धूप लेना और समय पर सोना
दोस्तों या परिवार से बात करना
सोशल मीडिया में हो रहे कंपैरिजन से दूरी रखना
जरूरत हो तो काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट से मदद लेना
डिस्क्लेमर: NEET के बाद मानसिक थकान, खालीपन या उदासी महसूस होना असामान्य नहीं है, लेकिन जब ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें नजरअंदाज करना सही नहीं है। बर्नआउट और डिप्रेशन दोनों ही ऐसी स्थितियां हैं जिनमें समय पर समझ और सहयोग बहुत जरूरी होता है। सबसे जरूरी बात यह है कि परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, पूरी पहचान नहीं। अगर छात्र लगातार निराशा, आत्म-हानि के विचार या इमोशनल क्राइसिस महसूस कर रहे हैं तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।