स्ट्रोक एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जो सीधे आपके ब्रेन को डैमेज करती है और इसके इलाज में जितनी देरी होती है ब्रेन डैमेज उतना ही ज्यादा बढ़ता है और इस बीमारी से जुड़ी जटिलताएं और ज्यादा बढ़ती हैं। स्ट्रोक ऐसा रोग या हेल्थ कंडीशन जिसके दौरान शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और इस कारण से ही इसमें मस्तिष्क से जुड़ी कई जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। मस्तिष्क के अंदर की किसी रक्त वाहिका से रक्त का रिसाव होना या फिर किसी प्रकार का क्लोट (रक्त का थक्का) बनने के कारण आमतौर पर स्ट्रोक होने लगता है। हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं है कि सिर्फ ब्लड सप्लाई पूरी तरह से रुक जाने के कारण ही स्ट्रोक होता है, बल्कि यदि किसी कारण से ब्लड सप्लाई कम हो गई है तो भी स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्या पैदा हो सकती है। ब्लड सप्लाई कम होने के कारण मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन व अन्य पोषक तत्व मिलना बंद हो जाते हैं और इस कारण से मस्तिष्क की कोशिकाएं (Brain cells) नष्ट होना शुरू हो जाती हैं और जानलेवा स्थिति पैदा हो जाती है।
इस्कीमिक स्ट्रोक - यह स्ट्रोक का सबसे आम प्रकार है और स्ट्रोक के कुल मामलों में लगभग 87 प्रतिशत मामले इसी प्रकार से जुड़े होते हैं। जब मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका में कहीं पर रक्त का थक्का यानी ब्लड क्लोट बन जाता है और उसके कारण ब्लड सप्लाई कम हो जाती है, तो इस स्थिति को इस्कीमिक स्ट्रोक कहते हैं।
हेमोरेजिक स्ट्रोक - जब मस्तिष्क के अंदर कोई रक्त वाहिका किसी कारण से फट जाती है और उस से मस्तिष्क में रक्त का रिसाव होने लगता है, तो इससे होने वाले स्ट्रोक को हेमोरेजिक स्ट्रोक कहा जाता है। धमनी फटने की स्थिति आमतौर पर एन्यूरिज्म या आर्टिरियोवेनस मैलफॉर्मेशन जैसी स्थितियों में होता है।
ट्रांसिएंट इस्कीमिक अटैक - स्ट्रोक का तीसरा प्रकार यानी ट्रांसिएंट इस्कीमिक अटैक आमतौर पर तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से को लंबे समय से पर्याप्त मात्रा में रक्त न मिल रहा हो। ऐसे में यदि ब्लड फ्लो बढ़ जाता है, तो लक्षण भी अपने आप ठीक होने लगते हैं।
स्ट्रोक के लक्षण
स्ट्रोक के मरीजों के मस्तिष्क में जब ब्लड फ्लो प्रभावित हो जाता है, तो उससे जुड़े लक्षण भी तुरंत होने लगते हैं। स्ट्रोक के लक्षणों की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि मस्तिष्क में ब्लड फ्लो कितना कम हुआ है। स्ट्रोक के मरीजों में विकसित होने वाले लक्षणों में आमतौर पर निम्न शामिल हो सकते हैं -
शरीर के किसी एक या पूरे शरीर में लकवा हो जाना
शरीर का एक हिस्सा सुन्न पड़ जाना जैसे चेहरा, बांह या टांग आदि
ठीक से बोल न पाना या दूसरों को बोलते हुए ठीक से समझ न पाना
बोलते समय तोतलापन या फिर सामान्य से धीमी गति में बोल पाना
भ्रम व उलझन रहना और शरीर की प्रतिक्रिया धीमी पड़ना
व्यवहार में अचानक से बदलाव आना जैसे जल्दी उत्तेजित होना
आंखों से जुड़ी समस्याएं जैसे एक या दोनों आंखों से ठीक से न देख पाना
चलने में दिक्कत महसूस होने लगना और ठीक से खड़े न हो पाना
सिर चकराना, घूमना या पूरी तरह से होश न रहना
अचानक से आधे या पूरे सिर में दर्द शुरू हो जाना
मिर्गी के दौरे पड़ना
जी मिचलाना व उल्टी जैसा महसूस होना
डॉक्टर को कब दिखाएं
स्ट्रोक एक इमरजेंसी हेल्थ कंडीशन है, जिसका जल्द से जल्द इलाज करना बहुत ज्यादा जरूरी है। इसलिए जिन लोगों को शरीर का कोई हिस्सा सुन्न होना, चेहरे का एक हिस्सा लटक जाना या फिर उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो एक बार जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाकर इसकी जांच करा लेनी चाहिए।
स्ट्रोक के कारण
स्ट्रोक के प्रकारों के अनुसार इसके अंदरूनी कारण भी अलग-अलग होते हैं, जो इस प्रकार हैं -
इस्कीमिक स्ट्रोक के कारण
यह स्ट्रोक का सबसे आम प्रकार है, जो आमतौर पर तब विकसित होता है जब मस्तिष्क के अंदर मौजूद कोई रक्त वाहिका किसी कारण से संकुचित या बंद हो जाती है। रक्त वाहिका को ब्लॉक या संकुचित करने के पीछे का कारण आमतौर पर ब्लड क्लोट हो होता है, लेकिन कुछ मामलों में रक्त वाहिका में फैट (वसा) भी जमा होने लगती है, जिस कारण से ब्लड फ्लो प्रभावित हो जाता है और इस्कीमिक स्ट्रोक का कारण बनता है।
हेमोरेजिक स्ट्रोक के कारण
जब मस्तिष्क में मौजूद कोई रक्त वाहिका किसी कारण से फट जाती है और ऐसा आमतौर पर निम्न स्थितियों में देखा जा सकता है -
ब्लड प्रेशर ज्यादा बढ़ जाना
एंटीकॉएग्युलेंट (ब्लड थिनर) दवाओं का ज्यादा उपयोग
मस्तिष्क में रक्त वाहिका का कोई हिस्सा कमजोर होना
किसी प्रकार की दुर्घटना के दौरान मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका डैमेज होना
इस्कीमिक स्ट्रोक में हेमरेज होना
स्ट्रोक के जोखिम कारक
जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारक -
शरीर का वजन ज्यादा होना यानी मोटापा
शारीरिक गतिविधि कम होना (गतिहीन जीवन)
लंबे समय से शराब की लत होना
नशीली दवाओं या पदार्थों की लत
धूम्रपान करना या सेकंड हैंड स्मोक के संपर्क में रहना
हाई कोलेस्ट्रॉल या डायबिटीज डायबिटीज जैसे क्रोनिक रोग
हार्ट से जुड़ी किसी बीमारी से ग्रसित होना
स्ट्रोक का निदान
यह एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसलिए इसका डायग्नोसिस भी जल्द से जल्द किया जाता है। डॉक्टर कुछ लक्षण देख कर उसके साथ आए अन्य व्यक्तियों से मरीज के जीवन के बारे में कुछ जानकारी लेकर इस बीमारी का अंदाजा लगा लेते हैं और पुष्टि करने के लिए आमतौर पर कुछ टेस्ट किए जा सकते हैं, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न शामिल हैं -
ब्लड टेस्ट - जिससे यह पता लगाया जाता है कि मरीज के खून में थक्के बनने का खतरा कितना ज्यादा है और उसके अनुसार तुरंत कुछ दवाएं मरीज को दे दी जाती हैं।
सीटी स्कैन - मस्तिष्क में डैमेज हुई रक्त वाहिका और स्थिति की गंभीरता का पता लगाना के लिए कंप्यूटर टोमोग्राफी स्कैन किया जाता है।
एमआरआई स्कैन - मस्तिष्क के अंदर हुए डैमेज का पता लगाने और साथ ही कौन सा हिस्सा डैमेज हुआ है आदि देखने के लिए मैग्नेटिक रेजोनेंस स्कैन किया जा सकता है।
सेरिब्रल एंजियोग्राम - शरीर में एक खास डाई को इंजेक्ट करके डॉक्टर मस्तिष्क और गर्दन में मौजूद रक्त वाहिकाओं की कंडीशन को चेक करते हैं, डाई की मदद से तस्वीरें थोड़ा साफ हो जाती हैं।
इकोकार्डियोग्राम - इस टेस्ट की मदद से डॉक्टर हार्ट की स्थिति का अनुमान लगाते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्ट्रोक के पीछे का कारण कोई हार्ट डिजीज तो नहीं।
स्ट्रोक का इलाज
स्ट्रोक एक इमरजेंसी मेडिकल कंडीशन है और इसलिए मरीज की जान बचाने के लिए जल्द से जल्द इसका इलाज शुरू करना जरूरी होता है। स्ट्रोक का इलाज आमतौर पर इसके प्रकार, लक्षण और स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है। स्ट्रोक के प्रकार के अनुसार इसके इलाज कुछ इस प्रकार हो सकता है -
इस्कीमिक स्ट्रोक का इलाज
जब मस्तिष्क के अंदर किसी रक्त वाहिका में ब्लड क्लोट बन गया है या फिर वसा जम गई है, तो इसका इलाज कुछ इस प्रकार के मेडिकल ट्रीटमेंट्स के द्वारा किया जाता है -
क्लोट ब्रेकिंग ड्रग्स
इसमें ऐसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो ब्लड क्लोट या फिर रक्त वाहिका में जमी फैट या प्रोटीन को निकालने में मदद करती हैं। ये दवाएं धीरे-धीरे करके डिपोजिट को निकालकर रुकावट को खोल देती है, जिससे स्ट्रोक के लक्षण अपने आप ठीक हो जाते हैं।
मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी
इसमें एक खास डिवाइस की मदद से रक्त वाहिका की रुकावट को खोल दिया जाता है, जिससे स्ट्रोक के लक्षण ठीक हो जाते हैं।
स्टेंट
यदि किसी कारण से रक्त वाहिका संकुचित हो रही है, तो उसे खोल कर रखने के लिए वहां पर एक स्टेंट नाम का खास डिवाइस लगा दिया जाता है, जो वाहिका को उस हिस्से को खोलकर रखता है।
सर्जरी
यदि स्थिति गंभीर है, तो सर्जरी की मदद से रक्त वाहिका की रुकावट को खोल दिया जाता है और किसी भी प्रकार के डैमेज को ठीक कर दिया जाता है।
हेमोरेजिक स्ट्रोक का इलाज
मस्तिष्क में रक्त का रिसाव होने के कारण हेमोरेजिक स्ट्रोक होता है और इसलिए इसका इलाज अलग तरीकों से करना पड़ता है, जिसमें आमतौर पर अलग-अलग प्रकार की दवाएं, कोइलिंग तकनीक, क्लैंपिंग और गंभीर स्थितियों में सर्जिकल प्रोसीजर शामिल हैं।
World Stroke Day 2022: सिरदर्द होना हम सभी के लिए बेहद आम है और अक्सर ये अपने आप या फिर मामूली पेनकिलर से ही ठीक हो जाता है। पर, अक्सर मामूली सा सिरदर्द भी कहीं बड़ी बीमारी के कारण भी हो सकता है। इन्हीं में से एक बेहद खतरनाक बीमारी है स्ट्रोक।
ओडिशा के बालनगिर जिले में एक 55 वर्षीय महिला की मौत स्ट्रोक आने के बाद हॉस्पिटल में हो गई। खबरों के अनुसार, उसकी मौत के बाद जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट से पता चला कि वो ओमिक्रोन से भी संक्रमित थी।
World Stroke Day 2021: क्या आप जानते हैं कि सिर्फ वयस्क ही नहीं बच्चे भी स्ट्रोक के शिकार हो सकते हैं? एक्सपर्ट से जानें शिशुओं से लेकर बड़ी उम्र के बच्चों में नजर आने वाले स्ट्रोक के लक्षण, कारण, इलाज....
World Stroke Day 2021: अगर आपको नमक किया नमक वाली चीजें खाना पसंद है तो आपको इस पर विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि अत्यधिक नमक का सेवन स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है।
World Stroke Day 2021: साइलेंट स्ट्रोक मस्तिष्क में रक्त को बाधित कर देता है, जिससे कोशिकाएं डैमेज होने लगती है, जानिए साइलेंट स्ट्रोक के बारे में सब कुछ.
अभिनेता राहुल रॉय (Rahul Roy Health Update) को पिछले महीने कारगिल में एक प्रोजेक्ट की शूटिंग के दौरान ब्रेन स्ट्रोक (Brain stroke) आया था, जिसके बाद उन्हें मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
स्ट्रोक एक ऐसी बीमारी है जो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी है। हर साल लगभग 18 लाख लोग स्ट्रोक के शिकार होते हैं। जिसमें बुजुर्गों के साथ ही युवा और बच्चे भी शामिल हैं। रिसर्च बताती हैं कि स्ट्रोक के 10-15 फीसदी मामले सिर्फ युवाओं में होते हैं। आज वर्ल्ड स्ट्रोक डे (World Stroke Day) के मौके पर हम आपको इससे जुड़ी जरूरी जानकारी दे रहे हैं।
World Stroke Day 2020: एक स्टडी के अनुसार दुनिया में 4 में से एक व्यस्क को स्ट्रोक होगा लेकिन सक्रिय जीवनशैली से इसका जोखिम रोका जा सकता है। यानी स्ट्रोक एक बेहद गंभीर रोग है जिसको तत्काल इलाज की ज़रूरत होती है लेकिन स्वस्थ जीवनशैली के ज़रिये इसके जोखिम को रोका भी जा सकता है।
जबसे दुनिया कोविड महामारी के घेरे में फंसी है, कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसी के साथ लोगों के बीच स्क्रीन का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जो खुद में एक नई महामारी की तरह है। पहले, स्ट्रोक 60 से अधिक उम्र के लोगों की बीमारी हुआ करती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में युवा आबादी में स्ट्रोक अटैक के कई मामले देखने को मिले हैं।
दिल की धड़कन में गड़बड़ी (Heart Beat) एक आम समस्या बन गई है। चूंकि, यह समस्या स्ट्रोक का कारण (Stroke Risk in Hindi) बनती है, इसलिए इसके शुरुआती इलाज के साथ स्ट्रोक से बचाव (Stroke Risk) संभव है।
हार्ट स्ट्रोक (Heart Stroke) दिल से संबंधित एक खतरनाक रोग है, जिसका इलाज समय पर ना किया जाए, तो व्यक्ति की जान भी जा सकती है। हार्ट स्ट्रोक से बचने के लिए आपको अपने खानपान का अधिक ख्याल रखना होगा। स्ट्रोक के जोखिम से आपको बचाए रख सकते हैं कुछ फूड्स, लेकिन इन्हें हर दिन अपने डायट में शामिल करें।
विश्व स्ट्रोक दिवस (World Stroke Day) मनाने का उद्देश्य मौत व विकलांगता के खतरे को कम करना है. ब्रेन स्ट्रोक के कारण और स्ट्रोक के लक्षण (Brain Stroke Symptoms) को पहले पहचान कर मोत और शारीरिक अक्षमता से बचा जा सकता है. स्ट्रोक से बचने के लिए घर पर ही ब्रेन स्ट्रोक FAST टेस्ट कर सकते हैं. दो मिनट में फास्ट टेस्ट करके आप स्ट्रोक के खतरे को पहचान सकते हैं.
आज (29 अक्टूबर) पूरी दुनिया में ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे'' (World Stroke Day 2019) मनाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक बहुत ही घातक बीमारी है। इसमें सही समय पर पीड़ित व्यक्ति को इलाज ना मिले, तो उसकी जान भी जा सकती है। अधिक तनाव में रहना, हाई शुगर, हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल, हाई ब्लड प्रेशर, अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स के कारण भी स्ट्रोक होने की संभावना बढ़ जाती है।
स्ट्रोक या ब्रेन अटैक (Brain Stroke) एक जानलेवा स्थिति होती है। यह वह समस्या होती है, जिसमें दिमाग के हिस्से को पर्याप्त रूप से ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। कुछ शारीरिक समस्याओं के कारण (causes of brain stroke) भी स्ट्रोक होने के खतरे काफी हद तक बढ़ जाते हैं। जानें, उन कारणों के बारे में यहां...
भारत में स्ट्रोक मृत्यु तथा अक्षमता के प्रमुख कारणों में से एक है। 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में यह अभी भी मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है और यह अक्षमता का सबसे आम कारण होता है। स्ट्रोक से बचने वाले 70 प्रतिशत मरीजों को बोलने में परेशानी पेश आती है।
मरीज़ पहले से ब्लैडर कैंसर से पीड़ित था, उन्हें शरीर के बाएं हिस्से में अचानक कमज़ोरी महसूस होने के कारण एमरजेन्सी रूम में लाया गया, उस समय मरीज़ को बोलने में भी परेशानी हो रही थी। डाॅक्टरों ने तुरंत लक्षणों को पहचाना और स्ट्रोक कोड ‘कोड फास्ट’ को एक्टिवेट कर दिया, जो पूरी न्यूरोलोजी टीम को तुरंत सक्रिय होने के सिगनल देता है।
हार्ट स्ट्रोक का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जो लोग दैनिक जीवन में कम एक्टिव होते हैं। वैसे तो हेल्दी लाइफ के लिए मोटापा ठीक नहीं होता है लेकिन इस शोध ने यह जानने का प्रयास किया है कि मोटे लोगों में हार्ट स्ट्रोक के क्या आंकड़े हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च रक्तचाप हृदय की बीमारियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्डियोवस्कुलर बीमारी कैंसर और मधुमेह जैसी गैर संक्रामक बीमारियों ने शहरी क्षेत्रों में मृत्यु दर के प्रमुख कारणों के रूप में संक्रामक बीमारियों को पीछे छोड़ दिया है।
एक नए अध्ययन से पता चलता है कि सप्ताह में एक घंटे से भी कम समय के लिए वेटलिफ्टिंग करने से दिल का दौरा या स्ट्रोक के होने का खतरा 40 से 70 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
11वें ''वर्ल्ड स्ट्रोक डे सिम्पोजियम'' के मौके पर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइन्सेज इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने स्ट्रोक पर 11वें सीएमई (कन्टीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) सेमिनार का आयोजन किया।
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