डायबिटीज़ की समस्या भारत में बहुत से लोगों को है तो वहीं आंकड़ों के अनुसार बहुत-से बच्चे भी डायबिटीज़ की समस्या से पीड़ित हैं। अनुवांशिक कारण, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बहुत ज़्यादा मीठा खाने के अलावा कुछ और भी कारण हैं जो आपको डायबिटीज़ की वजह बनते हैं। कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. संजय कालरा ( भारती हॉस्पिटल,करनाल) ने बताया कि किस तरह के लोगों को डायबिटीज़ का खतरा अधिक होता है।
नमक ज़्यादा खाने वालेे लोग - आपको दिन भर में 2-3 ग्राम से अधिक नमक नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाने का काम करता है, जो डायबिटीज़ के आम कारण हैं। इसीलिए नमक की बहुत अधिक बहुत मात्रावाले प्रोसेस्ड फूड से बचें।
धूम्रपान करने वाले- क्या आप जानते हैं कि सिगरेट पीनेवाले या अतीत में धूम्रपान कर चुके डायबिटिक्स को डायबिटीज़ का बहुत अधिक खतरा होता है। साथ ही धूम्रपान किडनी और दिल की बीमारियों से भी जुड़ा हुआ है? यही नहीं धूम्रपान की वजह से ख़राब होनेवाला खून डायबिटिक व्यक्ति की तंत्रिका और आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है।
सैचुरेटेड फैट वाला भोजन खाने वाले लोग- सैचुरेटेड फैट की अधिक मात्रा आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकती है, जिससे डायबिटिक्स की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही सैचुरेटेड फैट की वजह से डायबिटीज़ स्ट्रोक का खतरा और रक्त के बहाव से संबंधित समस्याओं में वृद्धि की संभावना बढ़ सकती है।
दिनभर बैठकर काम करने वाले- आजकल दफ्तर में काम करनेवाले ज़्यादातर लोग कई घंटों तक एक ही जगह पर बैठकर काम करते हैं। बहुत देर तक एक स्थान पर बैठे रहने से स्थिति और बिगड़ जाती है। यह रक्त के संचार की प्रणाली पर दबाव बनाती है साथ ही मोटापे, दिल और लिवर से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा बढ़ाती है। यह सब आगे जाकर डायबिटीज़ का कारण बनते हैं।
तनाव से पीड़ित लोग- स्ट्रेस या तनाव के वक़्त आपके शरीर से जो हार्मोन्स उत्पन्न होते हैं वे ग्लूकोज़ मेटाबॉलिज़्म को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। तनाव की वजह से न केवल खून में कॉर्टिसॉल का स्तर और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है बल्कि यह ग्लूकोज़ की मात्रा भी बढ़ाकर अनियंत्रित डायबिटीज़ का कारण बनता है। सही समय पर जांच न कराने से यह दिमाग और शरीर के अन्य भागों को बहुत नुकसान पहुंचाता है।
नींद की कमी से परेशान लोग- अगर आप नींद की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं तो यह शरीर में तनाव बढ़ाने का ही काम करता है औऱ मस्तिष्क को तनाव से लड़ने में दिक्कत होती है। यह स्ट्रेस हार्मोन्स के स्तर को बढ़ाता है जिसकी वजह से ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड ग्लूकोज़ का स्तर भी बढ़ जाता है और शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाता है।
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