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तनाव (Stress)

तनाव किसी वास्तविक या काल्पनिक खतरे की भावना के प्रति शरीर द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रिया है, जिससे शरीर स्थिति से निपटने या लड़ने के लिए तैयार होता है। यह स्ट्रेस हार्मोन सक्रिय होने के कारण विकसित होती है।

तनाव क्या है

तनाव एक शारीरिक प्रतिक्रिया है, जो खतरे की संभावना होने पर उससे बचने के लिए दी जाती है। तनाव के दौरान शरीर शरीर के एड्रेनालिन व कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जो आपको वास्तविक या काल्पनिक खतरे से निपटने या बचने के लिए तैयार करती है। तनाव के दौरान दिल तेजी से धड़कने लगता है, मांसपेशियां कठोर हो जाती हैं और रक्तचाप का स्तर भी बढ़ जाता है इससे आपका शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हो जाता है। सरल शब्दों में कहें तो तनाव शरीर के लिए एक प्राकृतिक रक्षा प्रणाली की तरह काम करता है। हालांकि, यदि यह बिना किसी कारण के बार-बार हो रहा है और इसके साथ अन्य समस्याएं भी हो रही हैं, तो यह शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। तनाव से अक्सर डिप्रेशन, पैनिक अटैक और चिंता विकार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह आत्महत्या के विचार आना, हृदय रोग, कैंसर, नशे की लत लगना, असुरक्षित रूप से यौन संबंध बनाना और सड़क दुर्घटनाएं समेत कई समस्याओं को पैदा कर सकता है जो मरीज की मृत्यु का कारण बन सकती हैं। इसलिए मानसिक समस्याओं से संबंधी कोई भी लक्षण महसूस होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए। इस लेख में हम आपको तनाव के प्रकार, लक्षण, रोकथाम व इलाज आदि के बारे में जानकारी देने की कोशिश करेंगे।

तनाव के प्रकार

तनाव के कई अलग-अलग प्रकार हो सकते हैं, जो आमतौर पर व्यक्ति की शारीरिक तासीर और रोग के कारण पर निर्भर करते हैं। हालांकि, प्रमुख रूप से इसके तीन प्रकार हैं, जो निम्न हैं -

एक्यूट स्ट्रेस - यह तनाव का सबसे आम प्रकार है, जो किसी विशेष परिस्थिति की प्रतिक्रिया के रूप में अचानक से विकसित हो जाता है। एक्यूट स्ट्रेस सकारात्मक व नकारात्मक दोनों स्थितियों में हो जाता है, जैसे सड़क दुर्घटना होते-होते बचना या फिर किसी रोलर कोस्टर पर झूलने के दौरान। स्थिति के सामान्य होने के बाद एक्यूट स्ट्रेस भी ठीक हो जाता है और ऐसा न होने पर यह किसी अन्य मानसिक विकार का लक्षण हो सकता है।

एपिसोडिक एक्यूट स्ट्रेस - इसमें आपको बार-बार एक्यूट स्ट्रेस होने लगता है और आप ज्यादातर समय चिंताग्रस्त रहते हैं। एपिसोडिक एक्यूट स्ट्रेस आमतौर पर किसी मानसिक रोग के कारण होता है।

क्रोनिक स्ट्रेस - लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने की स्थिति को क्रोनिक स्ट्रेस कहा जाता है। क्रोनिक स्ट्रेस से आमतौर पर मरीज में निम्न जटिलताएं देखी जाती हैं -


  • चिंता व अवसाद

  • हृदय संबंधी रोग

  • उच्च रक्तचाप

  • सिरदर्द

  • पेट संबंधी रोग

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना

तनाव के लक्षण

तनाव के लक्षण आमतौर पर शारीरिक, भावनात्मक व्यावहारिक रूप से विकसित होते हैं। हालांकि, तनाव से होने वाले लक्षण हर व्यक्ति के शरीर के अनुसार अलग-अलग भी हो सकते हैं। हालांकि, तनाव से होने वाले प्रमुख शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक लक्षण कुछ इस प्रकार हैं -

तनाव से होने वाले शारीरिक लक्षण


  • ज्यादा पसीना आना

  • पीठ या सीने में दर्द रहना

  • मांसपेशियों में ऐंठन व मरोड़

  • बेहोश होना (गंभीर मामलों में)

  • सिरदर्द

  • नसों में ऐंठन आना

  • शरीर में चुभन महसूस होना

  • चक्कर आना

  • नींद न आना या अत्यधिक नींद आना

  • बदहजमी होना


तनाव से होने वाले भावनात्मक लक्षण

  • क्रोधित रहना

  • काम से तंग आ जाना

  • काम में ध्यान न लगा पाना

  • थकावट रहना

  • अपने आप को सुरक्षित महसूस न करना

  • याददाश्त कम होना

  • चिड़चिड़ापन व बेचैनी रहना

  • नाखून चबाने की आदत पड़ना


तनाव से होने वाले व्यवहार संबंधी लक्षण

  • नशे की लत लग जाना

  • सिगरेट व तंबाकू का अत्यधिक सेवन करना

  • समाज से दूरी बनाना (अकेले रहने की आदत)

  • बहुत कम या बहुत ज्यादा खाना

  • यौन क्रियाओं रुचि कम हो जाना


डॉक्टर को कब दिखाएं

यदि आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

तनाव के कारण

मानव शरीर समय-समय पर कई बदलावों से गुजरता है, जिनमें से कुछ नकारात्मक भी होते हैं। ये नकारात्मक बदलाव शरीर की सामान्य क्रिया को प्रभावित कर देते हैं, जिससे तनाव विकसित हो जाता है। सिर्फ शारीरिक ही नहीं कई ऐसी व्यवहार संबंधी भी स्थितियां हैं, जो शरीर की सामान्य प्रक्रिया को बदल देती हैं और तनाव विकसित हो जाता है। हाइपोथैलेमस (मस्तिष्क का एक छोटा सा हिस्सा) में एचपीए (Hypothalamic-pituitary-adrenal) एक्सिस सक्रिय रूप से काम करना भी तनाव का कारण बन सकता है।

तनाव के जोखिम कारक

अनुवांशिक स्थितियां, शुरुआती जीवन का वातावरण और कोई गहरा दुख होना (जैसे किसी करीबी की मृत्यु होना) तनाव के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है।

तनाव की रोकथाम

तनाव की रोकथाम के प्रमुख रूप से तीन तरीकों से की जा सकती है, जो इस प्रकार हैं -

प्राथमिक रोकथाम - तनाव के विकसित होने से पहले ही उससे बचाव के तरीके अपनाना प्राथमिक रोकथाम कहलाता है। इसमें तनाव का कारण बनने वाली स्थितियों से दूर रहना और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य की देखभाल करना आदि शामिल है।

द्वितीयक रोकथाम - तनाव होने के बाद लक्षण विकसित होने से पहले ही बिना देरी किए उसकी रोकथाम के तरीके अपनाना द्वितीयक रोकथाम में आते हैं।

तृतीयक रोकथाम - जब तनाव के लक्षण विकसित होने के बाद उसे गंभीर होने से बचाने के लिए रोकथाम के तरीके अपनाए जाते हैं, तो उन्हें तृतीयक रोकथाम कहा जाता है। ये तरीके आमतौर पर इलाज के साथ-साथ अपनाए जाते हैं।

तनाव का निदान

तनाव का निदान करने के लिए कोई विशेष टेस्ट उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इस स्थिति का निदान साइकोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है, जो मरीज से उसके द्वारा महसूस किए जाने वाले लक्षणों के बारे में पूछते हैं। मरीज को एक प्रश्नावली भी दी जाती है, मरीज द्वारा भरा जाना होता है। तनाव के निदान के दौरान स्थिति की गंभीरता और उसके कारण का पता लगाने की कोशिश की जाती है, ताकि उचित इलाज प्रक्रिया शुरू की जा सके।

तनाव का इलाज

तनाव का इलाज प्रमुख रूप से स्थिति के अंदरूनी कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। इसका इलाज आमतौर पर निम्न चार चिकित्सा विधियों को शामिल किया जाता है -

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी - इसमें मरीज के सोचने के तरीके को समझा जाता है, ताकि तनाव का कारण बनने वाली संभावित स्थितियों का पता लगाया जा सके। इसमें तनाव को कम करने के लिए उपयोग की जाने वाली थेरेपी आमतौर पर योग के साथ की जाती हैं।

फार्माकोलॉजिकल थेरेपी - तनाव के काम नींद न आने पर ट्रैंक्विलाइजर का इस्तेमाल किया जाता है। डिप्रेशन व चिंता विकारों के लक्षणों को कम करने के लिए सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीप्टेक इनहिबिटर और सेरोटोनिन-नॉरपेनेफ्रिन रीप्टेक इनहिबिटर आदि दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। चिंता के शुरुआत लक्षणों को कम करने के लिए बेंज़ोडायजेपाइन दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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