बार-बार मुंहासेे निकलने का कारण कहीं तनाव तो नहीं , जानें तनाव के अन्‍य संकेत

उच्च तनाव के स्तर में तेजी दिल के तेज धड़कने से जुड़ा हुआ है।

बार-बार मुंहासेे निकलने का कारण कहीं तनाव तो नहीं , जानें तनाव के अन्‍य संकेत
उच्च तनाव के स्तर में तेजी दिल के तेज धड़कने से जुड़ा हुआ है। © Shutterstock

Written by Yogita Yadav |Published : October 17, 2018 3:26 PM IST

ज्यादा तनाव लेना कई बीमारियों की जननी के रूप में जाना जाता है। क्रोनिक स्ट्रेस आपके शरीर के लगभग सभी अंगों को प्रभावित कर सकता है।

सिरदर्द

नियमित रूप से होने वाला सिरदर्द भावनात्मक तनाव, थकान व शोरगुल से भी हो सकता है। तनाव सिरदर्द के लिए एक आम ट्रिगर है। कई अध्ययनों से पता चला है कि तनाव सिरदर्द को बढ़ा सकता है। सिर या गर्दन के क्षेत्र में ये दर्द ज्यादा होता है। ऐसे दर्द अक्सर तनाव की लंबी अवधि से संबंधित होते हैं।

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कम एनर्जी और अनिद्रा

अनिद्रा से ग्रसित कुछ लोग अक्सर रात में नींद न आने और पूरी रात जागने की शिकायत कर सकते हैं। यह समस्या तनाव से शुरू हो सकती है। पुरानी थकान और कम ऊर्जा के स्तर भी लंबे समय तक तनाव का कारण हो सकती है। तनाव भी नींद को बाधित कर सकता है और अनिद्रा का कारण बन सकता है, जिससे शरीर को भरपूर ऊर्जा नहीं मिलती है।

मुंहासे

ज्यादा तनाव लेने पर इसका असर आपके चेहरे पर मुंहासे के रूप में दिखाई देता है। तनाव की वजह से हार्मोन में बदलाव होता है जो मुहांसों का कारण है। आपको बता दें कि शरीर में जरूरत से ज्यादा टॉक्सिन तत्व जमा होने से हो एक्ने या मुंहासे हो सकते हैं। कई अध्ययनों ने यह भी पुष्टि की है कि मुंहासे तनाव के उच्च स्तर से जुड़ा हो सकता है।

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क्रोनिक पेन

शरीर के किसी भी अंग में भयंकर उठने वाले दर्द को क्रोनिक पेन कहा जाता है। दर्द और पीड़ा एक आम शिकायत है जो तनाव के स्तर को बढ़ा सकती है। कई अध्ययनों से पता चला है कि तनाव हार्मोन कार्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर क्रोनिक पेन से जुड़ा हुआ है।

पसीना आना

आप ज्यादा तनाव ले रहे हैं इसका एक संकेत यह है कि आपको बिना कुछ किए ज्यादा पसीना आएगा। आपको बता दें कि शरीर को अतिरिक्त तनाव में शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखने के लिए अधिक पसीना आता है। अत्यधिक पसीना चिंता, थकावट, थायराइड की स्थिति और कुछ दवाओं के उपयोग के कारण हो सकता है।

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तेज दिल का धड़कना

दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। हमारी जिंदगी तभी तक है जब तक हमारे दिल की धड़कन चल रही है। तेज दिल की धड़कन और हृदय गति में वृद्धि उच्च तनाव के स्तर के लक्षण भी हो सकता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि उच्च तनाव के स्तर में तेजी दिल के तेज धड़कने से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा दिल की बीमारी और पक्षाघात के लिए तनाव को दोषी ठहराया जाता है।

भूख में परिवर्तन

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ज्यादा तनाव लेने से भूख में परिवर्तन आम हैं। इसमें भूख बहुत ही कम लगने लगती है। कई लोग ऐसे भी होते हैं जब वो तनाव में होते हैं तो उन्हें बहुत ज्यादा भूख लगती है।

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