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स्ट्रेस और एंग्जाइटी कब बनते हैं हार्ट अटैक के कारण? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर्स

Stress and heart attack : मानसिक स्वास्थ्य का हार्ट पर काफी गहरा असर पड़ता है। अगर मन स्वस्थ हो, तो हार्ट भी स्वस्थ रहता है। आइए डॉक्टर से जानते हैं स्ट्रेस और एंग्जायटी कब बनते हैं हार्ट अटैक का कारण?

स्ट्रेस और एंग्जाइटी कब बनते हैं हार्ट अटैक के कारण? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर्स
Stress and Heart Attack
VerifiedVERIFIED By: Dr Abhijit Borse

Written by Kishori Mishra |Updated : October 8, 2024 1:31 PM IST

Can Stress and Anxiety Cause Heart Attack : पिछले कुछ समय से कई ऐसे मामले देखे गए हैं जब मेंटल हेल्थ का असर शारीरिक हेल्थ खासकर हार्ट हेल्थ पर पड़ा है। टेंशन, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हमारी शारीरिक स्थिति को तो प्रभावित करती ही हैं साथ ही हार्ट पर भी गहरा असर डालती हैं। अगर लंबे समय तक इसे नजरअंदाज किया जाए तो ये गंभीर स्थिति बन सकती है। एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिजीत बोर्स कहते हैं किये जानना हर किसी के लिए जरूरी हो गया है कि आखिर मेंटल हेल्थ हार्ट को कैसे प्रभावित करती है ताकि सही समय पर बेहतर देखभाल करने में मदद मिल सके।

स्ट्रेस और हार्ट हेल्थ का संबंध (Stress-Heart Health Connection)

क्रोनिक स्ट्रेस एक ऐसी कंडीशन है जो हृदय स्वास्थ्य पर सबसे नकारात्मक प्रभाव डालती है। जब आप तनावग्रस्त होते हैं, तो आपका शरीर एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन जारी करता है। ये हार्मोन आपकी हृदय गति और रक्तचाप को बढ़ाते हैं, जो समय के साथ धमनियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और हृदय रोग का कारण बन सकते हैं। लंबे समय तक तनाव के कारण अधिक खाना, धूम्रपान या अत्यधिक शराब का सेवन जैसी अस्वास्थ्यकर आदतें भी हो सकती हैं, जिससे हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जितना जल्दी हो सके स्ट्रेस को कंट्रोल करें।

डिप्रेशन और हार्ट डिजीज (Depression and Heart Disease)

डिप्रेशन यानि कि अवसाद का हृदय रोग से गहरा संबंध है। अवसाद से ग्रस्त लोगों में उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर और बढ़ी हुई सूजन जैसे जोखिम कारक होने की अधिक संभावना होती है, ये सभी हृदय स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। जब कोई व्यक्ति डिप्रेशन में होता है तो वो इतना डिमोटिवेट हो जाता है कि हेल्दी लाइफस्टाइल से बहुत दूर हो जाता है। रोज एक्सरसाइज करना, मेडिटेशन करना, हेल्दी खाने की आदत और वॉकिंग इन सब चीजें उसे बोझ लगने लगती हैं, जिससे हृदय स्वास्थ्य खराब हो जाता है।

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एंग्जाइटी और उसका हार्ट पर असर (Anxiety and Its Effect on the Heart)

एंग्जाइटी में जब कोई व्यक्ति होता है तो उसकी हृदय गति में वृद्धि हो जाती है। साथ ही ये स्थिति हाई ब्लडप्रेशर और दिल की अनियमित धड़कन का कारण भी बनती है। अगर एंग्जाइटी लंबे समय तक रहती है तो इससे हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) हो सकता है जो हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ाती है। इसके अतिरिक्त, एंग्जाइटी नींद में बाधा डाल सकती है और थकान का कारण बन सकती है, जिससे हृदय संबंधी स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

स्ट्रेस फ्री लाइफ और हृदय स्वास्थ्य (The Role of Stress-Relief in Heart Health)

बेहतर हृदय स्वास्थ्य के लिए मेंटल हेल्थ को सही रखना बहुत जरूरी है। ध्यान, गहरी सांस लेने के व्यायाम और योग जैसी तकनीकों को तनाव कम करने और हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में बेहद कारगार माना गया है। ये गतिविधियां रक्तचाप को कम करने, ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करने और बॉडी को रिलेक्स रखने में मदद करती हैं। इसके अतिरिक्त, मनपसंद चीजों में समय देना, प्रियजनों के साथ समय बिताना और डॉक्टरी सलाह लेना मानसिक कल्याण बनाए रखने और हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए प्रभावी रणनीति हो सकती है।

सोशल सपोर्ट कितना महत्वपूर्ण है? (The Importance of Social Support)

अकेलेपन और सामाजिक अलगाव को भी हृदय की समस्याओं से जोड़ा गया है। जिन लोगों को सोशल सपोर्ट नहीं मिलता है उन्हें एंग्जाइटी और डिप्रेशन होने की संभावना ज्यादा होती है। जिसके परिणामस्वरूप हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। मजबूत सोशल नेटवर्क बनाना और परिवार और दोस्तों से भावनात्मक समर्थन लेने से मानसिक और हृदय स्वास्थ्य दोनों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

प्रोफेशनल हेल्प कब लें? (Seeking Professional Help)

जो लोग लंबे समय तक तनाव, चिंता या एंग्जाइटी से जूझ रहे होते हैं उनके लिए जरूरी है कि वो डॉक्टर से मिलें और उनकी मदद लें। मानसिक स्वास्थ्य उपचार, जिसमें थेरेपी, काउंसलिंग और जब आवश्यक हो, दवा शामिल है। ये सभी चीजें मानसिक स्वास्थ्य में काफी सुधार कर सकती हैं और हृदय संबंधी जटिलताओं के जोखिम को कम कर सकती हैं। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के संकेतों को जल्दी पहचानना और उनका समाधान करना हृदय रोग को रोकने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

मानसिक स्वास्थ्य और हृदय स्वास्थ्य का आपस में गहरा संबंध है। तनाव प्रबंधन के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखकर, सामाजिक संबंध बनाए रखकर और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेकर, व्यक्ति अपने हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रख सकता है। यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए जितना जरूरी शारीरिक स्वास्थ्य है उतना ही जरूरी मानसिक स्वास्थ्य भी है।

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