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दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही बीमारियों में मानसिक स्वास्थ्य (Alzheimers disease) से जुड़ी बीमारियां भी शामिल हो रहीं हैं। (Alzheimers disease) अभी तक जिन्हें बीमारी माना ही नहीं जा रहा था, पिछले कुछ वर्षों में इन्होंने अप्रत्याशित रूप से दुनिया को परेशान किया है। बढ़ते तनाव और अवसाद के कारण मानसिक विकार से ग्रस्त लोगों में इजाफा हुआ है। इसकी कई वजह हैं। पर सबसे बड़ा कारण है तनाव। पर घबराएं नहीं अपने लाइफस्टाइल और आहार में बदलाव कर हम इनसे बच सकते हैं। आइए जानते हैं वे उपाय (Alzheimers disease) जिनसे अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।
अल्जाइमर रोग (Alzheimer's Disease) असल में 'भूलने की बीमारी' है। इसका नाम अलोइस अल्जाइमर पर रखा गया है, जिन्होंने सबसे पहले इसका विवरण दिया। इस बीमारी के लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना तथा फिर इसकी वजह से सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं की गंभीर स्थिति आदि शामिल हैं।
अमूमन अल्जाइमर (Alzheimers disease) उम्र के साथ बढ़ता है। पर इसके लिए बहुत से कारण काम करते हैं। इमनें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सर में कई बार चोट लग जाना भी शामिल है। तनाव और अवसाद के कारण भी इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है। हाल ही में आए एक शोध में यह बात भी सामने आई कि जिन महिलाओं की मध्यावधि आयु अर्थात अधेड़ उम्र में तनाव ज्यादा रहता है, वे भी बुढापे में अल्जाइमर की शिकार हो जाती हैं।
अमूमन 60 वर्ष की उम्र के आसपास होने वाली इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है। हालांंकि बीमारी के शुरूआती दौर में नियमित जांच और इलाज से इस पर काबू (Alzheimers disease) पाया जा सकता है। मस्तिष्क के स्नायुओं के क्षरण से रोगियों की बौद्धिक क्षमता और व्यावहारिक लक्षणों पर भी असर पड़ता है। इसके लिए मरीज को अपने दोस्तों, परिजनों के स्नेह और सहायता की जरूरत पड़ती है।
आयुर्वेद बीमारियों के उपचार की भारतीय पद्धति है। इसमें पेड़-पौधों से प्राप्त वस्तुओं तथा अन्य खनिजों के द्वारा बीमारियों का उपचार किया जाता है। साथ ही इसमें बीमारी के होने से पहले ही उससे बचने के उपाय भी दिए गए हैं। हाल ही में हुए एक शोध में कहा गया है कि अल्जाइमर के एन्जाइम की गतिशीलता को रोकने में पीपल काफी मददगार हो सकता है। पीपल के तने से लिये गए टिश्यू का लेबोरेटरी ट्रायल इसके समर्थन में रहा। गौरतलब है कि यह शोध चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के बायो टेक विभाग ने पीपल के पेड़ की मेडिसन प्रापर्टी पर किया गया।
खास भारतीय मसाले हल्दी में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्व करक्यूमिन के नैनो पार्टिकल के रूप में उपयोग से अल्जाइमर का इलाज हो सकता है। नैनो साइज के चलते हल्दी में मौजूद करक्यूमिन कंपाउंड को दिमाग तक आसानी से पहुंचाया जा सकेगा। वहीं दूसरी ओर याददाश्त बनाए रखने के लिए आवश्यक न्यूरोन्स के रिजनरेशन में भी यह खोज प्रभावी हो सकती।
खराब लाइफस्टाइल और बढ़ते दबाव के कारण तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। लोग इससे निकल नहीं पाते, बल्कि इसी को एन्ज्वॉय करने लगते हैं। जिससे मानसिक अवस्था पर असर पड़ता है। हाल ही में हुए एक शोध में यह सामने आया कि प्यार, शादी, तलाक और कॅरियर के कारण अधेड़ उम्र में तनावग्रस्त रहने वाली महिलाओं में अल्जाइमर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि तनाव में रहने की बजाए उससे निकलने की आदत डालें।
दिन में आती है ज्यादा नींद, तो हो सकता है अल्जाइमर का खतरा : शोध