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कैंसर का कारण बन सकता है बाल स्ट्रेट करवाना, जानिए क्यों अमेरिका में उठ रही इसे “बैन” करनी की मांग

शोध बताते हैं कि हेयर स्ट्रेटनिंग ट्रीटमेंट का उपयोग नहीं करने वाली 1.6% महिलाओं को यूट्रस कैंसर होने का खतरा रहता है। लेकिन जो महिलाएं ऐसे ट्रीटमेंट लेती हैं उनमें यह खतरा 4.1% तक बढ़ जाता है।

कैंसर का कारण बन सकता है बाल स्ट्रेट करवाना, जानिए क्यों अमेरिका में उठ रही इसे “बैन” करनी की मांग

Written by Atul Modi |Updated : February 1, 2024 7:31 PM IST

ट्रेंडिंग हेयरस्टाइल्स को फॉलो करना आपको फैशनेबल दिखाता है। यही कारण है कि लड़कियां आजकल स्ट्रेट हेयर करती हैं। इससे बाल लंबे और चमकदार दिखते हैं। इसी के साथ बालों की एक्स्ट्रा केयर करने के लिए कई प्रकार के अन्य हेयर ट्रीटमेंट भी करवाने पड़ते हैं। इन सभी में कहीं न कहीं केमिकल्स का उपयोग किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुंदर दिखने का यह हेयर ट्रीटमेंट जानलेवा भी हो सकता है। इन प्रोडक्ट्स का ज्यादा उपयोग करने से कैंसर तक होने की आशंका रहती है। शोध बताते हैं कि हेयर स्ट्रेटनिंग ट्रीटमेंट का उपयोग नहीं करने वाली 1.6% महिलाओं को यूट्रस कैंसर होने का खतरा रहता है। लेकिन जो महिलाएं ऐसे ट्रीटमेंट लेती हैं उनमें यह खतरा 4.1% तक बढ़ जाता है। वर्ल्ड कैंसर डे पर जानते हैं आपके हेयर ट्रीटमेंट आपके लिए कितने सेफ हैं।

इसलिए उठ रहे सवाल

भारत की तरह अमेरिका में भी हेयर स्टाइलिंग का बड़ा बाजार है। यहां भी गल्र्स बालों को स्ट्रेट करवाना पसंद करती हैं। हाल ही में अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की एक रिपोर्ट में सामने आया कि बालों को चमकदार और स्ट्रेट बनाने के लिए उपयोग में लिए जाने वाले प्रोडक्ट्स में फॉर्मेल्डिहाइड और फॉर्मेल्डिहाइड-रिलीजिंग केमिकल का उपयोग किया जाता है, जो बेहद खतरनाक हैं। एफडीए ने इनके नुकसान को देखते हुए इन्हें बैन करने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव ने भारत में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

ये केमिकल हैं कैंसर के लिए जिम्मेदार

दिल्ली स्टेट कैंसर संस्थान में क्लिनिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा शुक्ला के अनुसार इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर और नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम ने फॉर्मेल्डिहाइड को कैंसर के लिए जिम्मेदार मानते हुए इसे वर्गों में बांटा है। यह नासॉफिरिन्जियल और साइनोनसल कैंसर के साथ-साथ ल्यूकेमिया के बढ़ते खतरे से जुड़ा है। डॉ़.शुक्ला के अनुसार फॉर्मेल्डिहाइड युक्त प्रोडक्ट्स का उपयोग करने पर निकलने वाला धुआं कैंसर का कारण बन सकता है। ऐसे में इनका बार-बार उपयोग करना खतरनाक हो सकता है।

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अगर करते हैं ये, तो संभलें

वहीं आरएमएल अस्पताल के स्किन स्पेशलिस्ट डॉ. कबीर सरदाना का कहना है कि बालों को स्ट्रेट करने वाले पदार्थों और यूट्रस व ब्रेस्ट कैंसर के बीच संबंध गहरा संबंध है। इसे लेकर पर्याप्त डेटा भी है। अगर आप 15 साल से अधिक समय से इसका उपयोग कर रहे हैं या फिर साल में कम से कम 5 बार इन प्रोडक्ट्स का उपयोग कर रहे हैं तो ये कैंसर का कारण बन सकता है। इसलिए केमिकल युक्त हेयर प्रोडक्ट का उपयोग करने से बचना चाहिए।

इसलिए बढ़ जाता है खतरा

बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के वरिष्ठ निदेशक डॉ. सज्जन राजपुरोहित का कहना है कि कैंसर के साथ ही केमिकल युक्त हेयर प्रोडक्ट यूज करने के कई अन्य दुष्प्रभाव भी हैं। इनके उपयोग से आंखों में जलन, नाक व कान में परेशानी होना, सांस लेने में दिक्कत होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं लंबे समय तक इनका उपयोग यूट्रस और ब्रेस्ट कैंसर का कारण बन सकता है। धर्मशिला नारायण सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राजित चानाना का कहना है कि थोड़ी सी सावधानियां अपनाकर आप बड़े खतरे से बच सकते हैं। रोजमर्रा के उत्पादों में कार्सिनोजेनिक एजेंटों को पहचानें और उनका उपयोग करने से बचें। फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग में प्रसूति एवं स्त्री रोग विज्ञान की निदेशक डॉ. अर्पणा जैन के अनुसार सिर पर रासायनिक पदार्थों का उपयोग इसलिए खतरनाक है, क्योंकि शरीर के इस हिस्से में अवशोषण अधिक होता है। ऐसे में सिर की सतह केमिकल को भी सोख लेती है, जो जानलेवा हो सकता है।

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सोर्स- TOI

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