खराब दांत और चेहरे की समस्या खत्म! Stem Cells से मिलेगा नया जीवन

डेंटल हेल्थ में स्टेम सेल्स एक नई दिशा लेकर आई है। स्टेम सेल्स तकनीक केवल लक्षणों का इलाज नहीं करती, बल्कि समस्या की जड़ को ठीक करने की क्षमता रखती है। आइए डॉक्टर से जानते हैं इसके बारे मे-

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : April 10, 2026 8:08 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Jagriti Yadav

Stem Cells in Dental and Craniofacial Regeneration: वक्त के साथ मेडिकल साइंस तेजी से तरक्की कर रही है। खासकर डेंटल हेल्थ का सेक्टर लगातार बदलते जा रहा है। पहले जहां दांतों और चेहरे से जुड़ी समस्याओं का इलाज केवल इम्प्लांट, नकली दांत (प्रोस्थेटिक्स) और ग्राफ्ट के जरिए किया जाता था, लेकिन अब इसके लिए नई तकनीक स्टेम सेल्स (Stem Cells) को लगाया जा रहा है। Cryoviva Life Sciences, मेडिकल डायरेक्टर- लैब ऑपरेशन्स डॉ. जागृति यादव बताती हैं कि स्टेम सेल्स की तकनीक सिर्फ दांत और मुंह के खराब हिस्से को बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर नए टिश्यू को भी बनाने की क्षमता रखती है। आगे डॉक्टर से जानते हैं स्टेम सेल्स तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है।

डॉ. जागृति यादव के अनुसार, अब तक डेंटल ट्रीटमेंट का मुख्य उद्देश्य खराब दांत या हड्डी को रिप्लेस (replace) करना था। जैसे अगर किसी व्यक्ति का दांत टूटता है तो नकली दांत लगा दिए जाते हैं। वहीं, किसी की दांतों की हड्डी में कमी है तो बोन ग्राफ्ट तैयार कर दिया जाता है। लेकिन इन तरीकों में एक कमी थी। यह प्रक्रिया किसी भी परिस्थिति में शरीर के प्राकृतिक टिश्यू को वापस लेकर नहीं आ पाती थी। लेकिन अब स्टेम सेल्स की मदद से डॉक्टर डैमेज हुए टिश्यू को फिर से उगाने (Regenerate) की कोशिश कर रहे हैं। यह बदलाव इलाज को ज्यादा नेचुरल, टिकाऊ और प्रभावी बना सकता है।

स्टेम सेल्स क्या होते हैं और कैसे काम करते हैं?

स्टेम सेल्स शरीर की ऐसी खास कोशिकाएं होती हैं जिनमें दो मुख्य गुण होते हैं:

  1. Self-renewal (खुद को बार-बार बनाना)
  2. Differentiation (दूसरे प्रकार की कोशिकाओं में बदलना)
  3. ये कोशिकाएं जरूरत के हिसाब से दांत, हड्डी या अन्य टिश्यू में बदल सकती हैं।

डेंटल स्टेम सेल्स: कहां से मिलते हैं?

वैज्ञानिकों ने दांतों से जुड़े कुछ खास स्टेम सेल्स खोजे हैं। जैसे- Dental Pulp Stem Cells (DPSC)- दांत के अंदर के नरम हिस्से से, SHED (Stem Cells from Human Exfoliated Deciduous Teeth)- बच्चों के गिरने वाले दूध के दांत से। ये स्टेम सेल्स बहुत पावरफुल माने जाते हैं और इनमें नई कोशिकाएं बनाने की क्षमता ज्यादा होती है ।

डेंटिस्ट्री में स्टेम सेल्स के फायदे

दांत के अंदर की लाइफ वापस लाना- अगर दांत का पल्प (नस) खराब हो जाए, तो आमतौर पर रूट कैनाल किया जाता है। लेकिन स्टेम सेल्स से भविष्य में पल्प को फिर से जिंदा किया जा सकता है।

  1. मसूड़ों और हड्डी की मरम्मत- पीरियोडोंटल डिजीज (मसूड़ों की बीमारी) में हड्डी गल जाती है। इससे स्टेम सेल्स इस हड्डी को दोबारा उगा सकते हैं।
  2. इम्प्लांट का सक्सेस रेट बढ़ना- स्टेम सेल्स हड्डी को मजबूत बनाते है। इससे डेंटल इम्प्लांट ज्यादा समय तक टिकते हैं।

कौन सी तकनीक का हो रहा है इस्तेमाल?

बायोमैटेरियल्स और स्कैफोल्ड्स- ये ऐसे स्ट्रक्चर होते हैं जहां स्टेम सेल्स बढ़कर नया टिश्यू बनाते हैं।

  1. 3D बायोप्रिंटिंग- अब 3D प्रिंटर से टिश्यू और हड्डी जैसे स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। इससे इलाज ज्यादा सटीक और पर्सनलाइज्ड हो रहा है।
  2. टिश्यू इंजीनियरिंग- यह तकनीक लैब से निकलकर अब क्लीनिकल इस्तेमाल की ओर बढ़ रही है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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