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Written By: Anshumala | Updated : March 30, 2020 1:05 PM IST
Sports Physiotherapy : महिला एथलीट्स के लिए कैसे फायदेमंद है स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी
Sports Physiotherapy : आईएएएफ में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हीमा दास ने दुनिया में भारत को गौरवान्वित किया। इसी तरह दुति चंद पहली भारतीय महिला फील्ड एथलीट (Sports Physiotherapy) हैं, जिन्होंने स्वर्ण पदक जीत कर दुनिया भर में भारत का नाम रोशन किया है। इस गौरव के साथ यह भी याद रखना जरूरी है कि महिलाओं को अच्छा परफॉर्मेन्स देने और चोट से बचने के लिए ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। किस तरह से महिला एथलीट्स के लिए स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी फायदेमंद है, इस पर महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं फिजियोएक्टिव (PhysioActive) के सीनियर कंसल्टेंट एंड इंडियन वूमेंस हॉकी टीम के डायरेक्टर और फॉर्मर फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. डी एम मनोज, एमपीटी एमआईएपी (स्पोर्ट्स मेडिसिन)...
अपनी शारीरिक संरचना एवं बायोलॉजिकल अंतर के चलते पुरुषों की तुलना में महिलाओं को चोट लगने की संभावना अधिक होती है। इसके कारण महिालाओं में मस्कुलोस्केलेटल चोट एवं चिकित्सकीय समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है।
शारीरिक संरचना की बात करें तो महिलाओं में एस्ट्रोजन का स्तर और बाॅडी फैट ज्यादा तथा मसल मास कम होता है, ऐसे में उनमें लिगामेंट्स लूज होने की संभावना अधिक होती है। इसके चलते उनमें पीठ दर्द, घुटनों और टखनों में चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। बायोलॉजिकल रूप से देखा जाए तो माहवारी चक्र के चलते महिलाओं में मासिक रूप से हाॅर्मोंस का स्तर बदलता रहता है, साथ ही उचित कैलोरीज और पोषण की कमी के चलते महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस की संभावना अधिक होती है।
फिजियोथेरेपी के फायदे और महत्व
ऐसे में वे आसानी से पैर या टांग के फ्रैक्चर का शिकार हो सकती हैं। इसके अलावा महिलाएं खड़े होने के दौरान अपने घुटनों को एक दूसरे के नजदीक रखती हैं, कूदने या दिशा बदलने के दौरान एक पैर का इस्तेमाल करने से महिला एथलीट्स में चोट की संभावना और बढ़ जाती है।
इन सभी कारकों को देखते हुए महिला एथलीट्स के लिए फिटनेस, उचित आहार तथा बेहतर देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है। यहां स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी (Sports Physiotherapy importance) बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, जो मांसपेशियों में कमजोरी, अकड़न तथा बायोमैकेनिक्स के कारण होने वाले असंतुलन को पहचान कर ‘प्रीहेबिलिटेशन’ के जरिए उन्हें चोट से सुरक्षित रख सकती है।
फिजियोथेरेपी मैनेजमेन्ट आसान है, जब इसे चोट रखने के पहले कुछ घंटों से लेकर तीन दिनों के भीतर शुरू कर दिया जाए। ऐसे मामलों में राइस- रेस्ट, आइस, कम्प्रेशन एंड एलिवेशन (RICE- Rest, Ice, Compression and Elevation) प्राथमिक चिकित्सा की भूमिका निभाता है। जिन महिला एथलीट्स में पुरुषों की तुलना में लम्बे समय तक दर्द रहता है, वे अक्सर बार-बार चोट से परेशन रहती हैं। ऐसे मामलों में चोट के इलाज और इसे दोबारा होने से रोकने के लिए मैनुअल थेरेपी, मसाज, ड्राई नीडलिंग, टैपिंग, आईएएसटीएम, कपिंग, प्रोग्रेशन स्ट्रेन्थनिंग व्यायाम कारगर हो सकते हैं।
इलाज के अलावा, स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट कुपोषण या फीमेल एथलीट ट्रायड जैसी समस्याओं को हल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वे एथलीट्स के साथ सबसे ज्यादा समय (चिकित्सक से भी अधिक) बिताते हैं, ऐसे में फिजियोथेरेपिस्ट की जिम्मेदारी होती है कि वे महिला एथलीट्स को सही आहार तथा ट्रायड समस्याओं को हल करने के तरीकों के बारे में जानकारी दें। आज बड़ी संख्या में भारतीय महिलाएं एथलेटिक्स में प्रवेश कर रही हैं, ऐसे में स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपीलोकप्रिय हो रही है। इसके अलावा, फिजियोथेरेपिस्ट के लिए सही मैनेजमेन्ट में बारे में जानकारी रखना महत्वपूर्ण है।