Spine Problems : मिनिमली इनवेसिव तकनीकों की मदद से स्पाइन की मुश्किल सर्जरी हुई आसान

न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में प्रगति के साथ, मस्तिष्क और स्पाइनल सर्जरी के बाद की गुणवत्ता में सुधार आया है, जिनके परिणाम भी बेहतर होते हैं।

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Written By: Anshumala | Updated : January 26, 2020 11:00 AM IST

न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में प्रगति के साथ, मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया की मदद से आज सबसे मुश्किल मामलों में भी सर्जरी करना आसाना हो गया है। इलाज के नवीन और एडवांस विकल्पों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (वैशाली) ने एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में कई स्पाइनल मरीजों के बारे में चर्चा की गई, जहां स्पाइन संबंधी गंभीर समस्या (Spine Problems) के बाद भी आज वे इलाज के इन एडवांस विकल्पों का फायदा उठाकर एक खुशहाल जीवन बिता रहे हैं।

मैक्स के न्यूरो सर्जरी निदेशक डॉ. मनीष वैश्य ने बताया, “कई मरीज ओपन और परंपरागत सर्जरी की मुश्किलों से घबराते हैं, लेकिन हालिया उन्नत के साथ, आज स्पाइनल सर्जरी मिनिमली इनवेसिव (Spinal Surgery Minimally Invasive) होने के साथ 100% सुरक्षित हो गई है। इस प्रक्रिया में खून का बहाव न के बराबर होता है और रिकवरी भी तेज गति से होती है। कीहोल सर्जरी में माइक्रो-एंडोस्कोपिक डिकम्प्रेशन सर्जरी शामिल है, जहां मात्र 1.5 से 2 सेंटीमीटर के चीरे से ही काम बन जाता है, जिसके कारण शरीर पर किसी प्रकार के कोई घाव नहीं पड़ते हैं। इसमें हड्डियों या मांसपेशियों को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचता है और मरीज सर्जरी के बाद जल्दी रिकवर करता है।”

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इस सेशन में उन मरीजों के बारे में भी बात की गई, जिन्होंने एक बेहतर जीवन के लिए स्पाइन सर्जरी का सहारा लिया। इस अवसर पर, 42 साल की पूजा गगनेजा, 64 साल के राम सिंह और 43 साल के अमित गुप्ता उपस्थित थे। पूजा की पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द की शिकायत थी, जो हाथों से होते हुए दोनों घुटनों तक पहुंच जाता था। 2 सालों तक समस्या से परेशान रहने के बाद एमआरआई टेस्ट कराने के बाद मरीज की पीठ में 8 कमजोर हिस्से पाए गए, जिसके बाद उन्हें कीहोल डिकम्प्रेशन सर्जरी कराने की सलाह दी गई। सर्जरी के डर से वे एक साल से दर्द को बर्दाश्त करती आ रही थीं, लेकिन जब उन्हें मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के बारे में पता चला तो वो इसके लिए तुरंत तैयार हो गईं। आज पूजा अपने सामान्य जीवन में वापस लौट चुकी हैं।

डॉ. वैश्य ने आगे बताया, “अमित नाम के मरीज को एडवांस स्पाइनल फ्युजन सर्जरी की मदद से सफलतापूर्वक ठीक किया गया। इस सर्जरी का नाम ट्रांसफॉरेमिनल लंबर इंटरबॉडी फ्युजन (टीएलआईएफ) सर्जरी है, जिसमें इमेजिंग गाइडेंस की मदद से ऑपरेशन की जगह को बेहतर तरीके से देखा जा सकता है। इस प्रकार की सर्जरी की मदद से स्पॉन्डिलाइटिस, डिस्क हर्निएशन या पीआईवीडी की समस्या में दर्द और नसों में गड़बड़ी को कम करने में सहायता मिलती है। चूंकि, इस प्रक्रिया में निवारक और सुरक्षित तरीके शामिल हैं, जिससे यह तकनीक सबसे अच्छी और सुरक्षित सर्जरीज़ में से एक है। इसमें रीढ़ (Spine Problems) को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।”

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