
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : August 12, 2023 5:38 PM IST
Spinal Muscular Atrophy in Hindi: स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) एक आनुवंशिक बीमारी है और भारत में भी हर साल लगभग 3 हजार से ज्यादा बच्चे इस बीमारी के साथ जन्म लेते हैं। इस बीमारी से जुड़ी खबरें पहले भी आपने कई सुनी होंगी कि इसका इलाज इतना महंगा है कि गरीब तो क्या मिडिल क्लास व्यक्ति अपना सब कुछ बेच कर भी इस बीमारी का इलाज नहीं करवा सकता है। अगस्त का महीना आ गया है, जो स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी अवेयरनेस मंथ है। इस मौके पर इंडियन स्पाइनल इंजरी में चीफ ऑफ स्पाइन सर्विस डॉक्टर विकास टंडन से मिली जानकारी से कुछ अच्छी खबर आने की संभावना है। डॉक्टर टंडन ने इस बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी में ब्रेन की नर्व सेल्स और रीढ़ की हड्डी (मोटर न्यूरॉन्स) को नुकसान पहुंचाती है। इस स्थिति के कारण मांसपेशियों में कमजोरी, शारीरिक गतिशीलता में कमी और दैनिक कार्यों को पूरा करने में कठिनाई होती है। शिशु मृत्यु दर को बढ़ाने में मुख्य कारण एसएमए भी रहा है।
भारत में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी लगभग 10,000 जन्मे बच्चों में 1 बच्चे को प्रभावित करती है। देखने में यह आंकड़ा काफी कम लग सकता है और इसे हमारे देश में एक दुर्लभ बीमारी की लिस्ट में रखा गया है। लेकिन यह बीमारी जितनी दुर्लभ दिख रही है, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक भी है। टाइप 1 एसएमए जो सबसे गंभीर स्थिती होती है इसमें सांस लेने और खाना निगलने में कठिनाई होती है।
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी का इलाज हर किसी के बस का नहीं है क्योंकि इसका इलाज हजारों या लाखों में नहीं बल्कि कई करोड़ों में होता है। हालांकि, एसएमए से पीड़ित बच्चों के लिए उचित देखभाल उपलब्ध है, जिसमें फिजियोथेरेपी, ऑर्थोटिक्स, सहायक वेंटिलेशन और स्पाइन स्पाइन स्टेबिलाइजेशन यानी रीढ़ की हड्डी का स्थिरीकरण शामिल है। इसी कारण मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक आशा की किरण देखी जा रही है।
वैज्ञानिक लगातार इस गंभीर बीमारी से निपटने के लिए अलग-अलग तरीके से इसके इलाज ढूंढ रहे हैं, ताकि इसके इलाज की कीमत को जितना हो सके कम किया जा सके। कुछ ट्रीटमेंट स्ट्रेटेजी पर काम किया जा रहा है, जो निम्न हैं -
जीन थेरेपी एसएमए उपचार एक आशा की किरण की तरह है। ज़ोल्गेन्स्मा जैसे नए प्रयासों ने एसएमए के उपचारों में सफलता से कई लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। ज़ोल्गेन्स्मा में रोगी की कोशिकाओं में लापता एसएमएन1 (सर्वाइवल मोटर न्यूरॉन 1) जीन की एक प्रतिलिपि पहुंचाई जाती है, जिसका उद्देश्य मोटर न्यूरॉन फ़ंक्शन को बहाल करना है। यह क्रांतिकारी थेरेपी मांसपेशियों की ताकत और कार्य में सुधार के लिए नई आशा प्रदान करती है।
जीन थेरेपी से अगल स्पिनर्जा जैसे फार्माकोलॉजिकल इंटरवेंशन सामने आये हैं। उसमें मोटर न्यूरॉन 1 (एसएमएन1) जीन को बदल दिया गया है या हटा दिया गया है। एसएमए वाले लोग पर्याप्त एसएमएन प्रोटीन का उत्पादन करने में असमर्थ हैं जो उनके मोटर न्यूरॉन्स को कार्य करने के लिए आवश्यक है। उनके पास SMN2 है, लेकिन यह मोटर न्यूरॉन्स के जीवित रहने के लिए आवश्यक पर्याप्त प्रोटीन नहीं बनाता है। यहां स्पिनर्जा सहायता प्रदान कर सकता है।
हालांकि, इलाज के अलावा जीवन मरीज के जीवन को आसान बनाने और उसको हो रही परेशानियों को कंट्रोल करने के लिए इस बीमारी के कारण होने वाली जटिलताओं को जितना हो सके कम करना जरूरी होता है। एसएमए रोगियों में होने वाली एक आम समस्या स्पाइनल फ्यूजन जैसे सर्जिकल हस्तक्षेप स्कोलियोसिस को रोकने में मदद मिलती है। इसके अलावा ऑर्थोटिक उपकरण और भौतिक चिकित्सा गतिशीलता को बनाए रखने में सहायता करते हैं।