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Written By: Anshumala | Published : February 19, 2019 9:59 AM IST
पैराप्लेजिया, एक स्पाइनल कार्ड इंजरी है जिसके कारण शरीर का निचला भाग लकवाग्रस्त हो जाता है। © Shutterstock
स्पाइनल कॉर्ड दिमाग का संदेश शरीर के अन्य अंगों तक पहुंचाती है। ऐसे में, स्पाइनल कॉर्ड में किसी भी प्रकार चोट लग जाना यानी स्पाइनल कार्ड इंजरी को पूरे शरीर के लिए बेहद गंभीर माना जाता है। इसके कारण शरीर की गतिविधियां प्रभावित होने से लेकर लकवा मारने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। क्षतिग्रस्त स्पाइनल कॉर्ड का फिजियोथेरेपी से लेकर सर्जरी के द्वारा उपचार करने का प्रयास किया जाता था लेकिन अधिकतर मामलों में पीड़ित के लिए सामान्य जीवन जीना संभव नहीं होता था। अब स्टेम सेल थेरेपी जैसे नवीनतम उपचार ने स्पाइनल कॉर्ड की इंजरी से जूझ रहे लोगों को उम्मीद की एक नई किरण दिखाई है। न्यूटेक मैडीवर्ल्ड (नई दिल्ली) की निदेशक और स्टेम सेल विशेषज्ञ डॉ. गीता शर्राफ का कहना है कि स्पाइनल कॉर्ड में चोट लगने की वजह से विश्वभर में लाखों युवा, बच्चे और बुजुर्ग किसी न किसी विकार, दिव्यांगता या मौत का शिकार हो जाते हैं।
Spinal Cord Injury: स्टेम सेल थेरेपी से इलाज की राह हुई आसान
क्या है पैराप्लेजिया
पैराप्लेजिया, एक स्पाइनल कॉर्ड इंजरी है, जिसके कारण शरीर का निचला भाग लकवाग्रस्त हो जाता है। यह स्पाइनल कॉर्ड और तंत्रिका तंत्र को हुई गंभीर क्षति के परिणामस्वरूप होता है। पैराप्लेजिया मुख्य रूप से कमर के निचले हिस्से, पैरों और पेल्विक क्षेत्र को प्रभावित करता है, जिसके परिणामस्वरूप पीड़ित के लिए चलना संभव नहीं होता है। इसकी दो मुख्य श्रेणियां होती हैं - कम्प्लीट और इनकम्प्लीट। कम्प्लीट पैराप्लेजिया तब होता है, जब चोट मरीज को न्युरोलॉजिकल स्तर पर प्रभावित करती है और पैरों की मूवमेंट प्रभावित होती है, जबकि इनकम्प्लीट पैराप्लेजिया के मामलों में, पैरों की मूवमेंट पूरी तरह प्रभावित नहीं होती है। इसके निम्न कारण हो सकते है जैसे कि दुर्घटनाएं, स्पाइनल कॉर्ड में गंभीर चोट लग जाना, मोटर न्यूरॉन डिजीज, स्पाइनल कॉर्ड में कैंसरग्रस्त कोशिकीय विकास, ट्यूमर या रक्त का थक्का जमना, स्पाइनल बाइफिडा, लंबे समय से चली आ रही कोई गंभीर बीमारी, शराब की लत, कैंसर, अर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस और स्पाइनल कॉर्ड की सूजन जैसी स्वास्थ्य समस्याएं स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का कारण बन सकती हैं।
क्या हैं स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के लक्षण
डॉ. गीता शर्राफ का कहना है कि लक्षण इस पर निर्भर करते हैं कि स्पाइनल कॉर्ड किस स्थान पर क्षतिग्रस्त हुई है और चोट कितनी गहरी है लेकिन स्पाइनल कॉर्ड को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचने पर निम्न में से एक या अधिक लक्षण दिखाई दे सकते हैं। मरीज में कुछ इस तरह के लक्षण भी उभर सकते हैं जैसे मांसपेशियों में कमजोरी, पैरों-हाथों व छाती की मांसपेशियों में हरकत न होना, सांस लेने में तकलीफ, इसके अलावा पैरों-हाथों व छाती में कोई हरकत न होना, मल और मूत्र त्यागने की गतिविधियों पर नियंत्रण न होना, चलने और महसूस करने की क्षमता प्रभावित होना। कमर के निचले हिस्से, पैरों और पेल्विक क्षेत्र में अत्यधिक दर्द होना, गर्म, ठंडा और स्पर्श का एहसास खत्म हो जाना। शरीर के लिए रक्त दाब को सामान्य बनाए रखना कठिन होता है। उपरोक्त लक्षणों के कुछ सप्ताह या महीने बाद सुन्नपन और लकवा जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
उपचार
दुर्भाग्य से, स्पाइनल कॉर्ड को पहुंची क्षति को पूरी तरह ठीक करने के लिए कोई उपचार उपलब्ध नहीं है लेकिन नए उपचार की खोज करने के लिए लगातार शोध किए जा रहे हैं, जिसमें प्रोसथेसेस और दवाइयां सम्मिलित हैं। ये तंत्रिका कोशिकाओं के जीवन को बढ़ाते हैं या तंत्रिकाओं की कार्यप्रणाली को ठीक करते हैं। स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के उपचार में इस बात पर भी ध्यान दिया जाता है कि इसे और अधिक क्षति न पहुंचे लेकिन अब स्टेम सेल की मदद से इसका इलाज किया जा रहा है। वास्तव में स्टेम सेल का रिश्ता जीवन से है और जब तक यह बनता रहता है, तब तक ही जीवन कायम रहता है। शरीर की रोग ग्रस्त एवं क्षतिग्रस्त कोशिकाओं का स्थान लेकर ये स्टेम सेल उनमें नए जीवन का संचार करते हैं। इस सेल थेरेपी को नई तकनिकों का समूह कहा जा सकता है।