
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
life with nature
पेड़-पौधों और नेचर के पास रहना ज्यादातर लोगों को पसंद होता है। इसलिए अक्सर लोग लॉन्ग वेकेशन या वीकेंड पर पहाड़ों का रुख करते हैं। पेड़-पौधों के बीच रहने पर शांति महसूस होती है, ठंडी हवा महसूस होती है और पक्षियों की चहचहाहट मन को सुकून देती है। इतना ही नहीं, घने पेड़ों से भरे जंगल में रहने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिल सकता है। एक नई स्टडी में पाया गया है कि शहरी जंगल में रोजाना सिर्फ 10 मिनट बिताने और पक्षियों की आवाज सुनने से लोगों का तनाव कम हुआ है। लोगों में पॉजिटिविटी आई है और वे मानसिक रूप से पहले की तुलना में ज्यादा अच्छा महसूस करते हैं।
Cambridge University Press द्वारा प्रकाशित जर्नल Environmental Conservation में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, पक्षियों की चहचहाहट सुनने और हरियाली के बीच सिर्फ कुछ मिनट बैठने से लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ सकता है। यह लोगों की भावनात्मक तंदुरुस्ती में भी सुधार कर सकती है।
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में North Carolina State University के 106 प्रतिभागियों को शामिल किया। हर प्रतिभागी को चार अलग-अलग तरह के वातावरण और ध्वनि यानी आवाजों का अनुभव कराया गया। कुछ प्रतिभागियों को नदी किनारे के जंगल में बैठाया गया था और उन्हें नॉइज-कैंसलिंग हेडफोन के जरिए रिकॉर्ड की गई पक्षियों की चहचहाहट सुनाई गई। वहीं, कुछ प्रतिभागियों को पास स्थित शहरी क्षेत्र में बैठाया गया और इस दौरान उन्हें ट्रैफिक का शोर सुनाया गया।
स्टडी के अनुसार, जिन लोगों को नदी किनारे के जंगल और पक्षियों की चहचहाहट के बीच बैठाया गया, उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिला और तनाव भी कम देखने को मिला। इस वातावरण में समय बिताने वाले प्रतिभागियों में तनाव कम हुआ और नकारात्मक भावनाओं में भी कमी आई। वे पहले से ज्यादा मेंटली फ्रेश नजर आने लगे।
वहीं, जिन लोगों को शहरी माहौल में बैठाकर ट्रैफिक का शोर सुनाया गया था, उन सभी प्रतिभागियों में मनोवैज्ञानिक पैमानों पर सबसे खराब परिणाम देखने को मिले।
Disclaimer: इस स्टडी में साबित होता है कि प्राकृतिक वातावरण में रहने और वहां से जुड़ी आवाजें सुनने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। वहीं, शहरों का ट्रैफिक और शोर-शराबा लोगों के मानसिक स्वास्थ्य अलग-अलग तरीके से प्रभावित कर सकता है। इसलिए आपको कोशिश करनी चाहिए कि रोजाना कुछ समय प्रकृति के साथ बिताएं। अगर आपके घर के आस-पास जंगल नहीं है, तो आप पार्क या किसी शांति वाली जगह पर बैठकर प्रकृति का आनंद उठा सकते हैं।