2023 तक दक्षिण एशिया से समाप्‍त करना है खसरा और रूबेला, जानें बचाव के उपाय

दक्षिण एशिया में रूबेला और खसरा से लगभग 50 हजार मौतों को रोकना इस क्षेत्र की प्राथमिकता है, जिसे 2023 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 6, 2019 12:54 PM IST

खसरा और रूबेला (Eliminate MR) दोनों ही बीमारियां छोटे बच्‍चों में मृत्‍यु और विकलांगता का कारण बनती हैं। यह दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए एक बड़ी चिंता है। इससे हर साल हजारों बच्‍चे अपने जीवन में कई परेशानियों का सामना करने को मजबूर होते हैं। इससे निपटने के लिए डब्‍ल्‍यूएचओ (WHO) ने इसे 2023 तक इस क्षेत्र (Eliminate MR) से पूरी तरह समाप्‍त करने का लक्ष्‍य रखा है।

ज्‍यादातर बच्‍चों को प्रभावित करने वाले संक्रमण खसरा और रूबेला (Eliminate MR) उनके लिए जीवन भर की जटिलताएं पैदा कर देते हैं। इसमें न सिर्फ उनका जीवन जटिल हो जाता है, बल्कि कई बार ये उनकी मृत्‍यु का भी कारण बनते हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सदस्य देशों ने 2023 तक इन दोनों बीमारियों को खत्म करने का संकल्प लिया है।

राजनीतिक प्रतिबद्धता है जरूरी

डब्ल्यूएचओ में दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह का कहना है कि दोनों (Eliminate MR) बीमारियों को खत्म करने का नया लक्ष्य मौजूदा सरकार की राजनीतिक प्रतिबद्धता, इस बीमारी से निपटने के उनके प्रयासों और विभिन्‍न माध्‍यमों से इस दिशा में की गई प्रगति पर निर्भर करता है। नई दिल्ली में डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रीय समिति के 72वें सेशन में इन दोनों बीमारियों (Eliminate MR) को समाप्‍त करने का लक्ष्‍य निर्धारित करना इस दिशा में ही एक कदम है।

छह देशों ने पूरा किया उन्‍मूलन

खसरा और रूबेला (Eliminate MR) का उन्मूलन 2014 से ही प्राथमिकता रही है। इस क्षेत्र के पांच देशों ने खसरे को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है। इनमें भूटान, डीपीआर कोरिया, मालदीव, श्रीलंका और तिमोर-लेस्ते शामिल हैं। दूसरी और  रूबेला को छह देशों बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका और तिमोर-लेस्ते ने अपने नियंत्रण में ले लिया है।

वैक्‍सीनेशन में लानी होगी तेजी

लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, सदस्य देशों ने अपने-अपने देशों में टीकाकरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए संकल्प लिया। इसमें पहले से भी अधिक सक्रिय लैब टेस्टिंग और केस-आधारित मॉनीटरिंग सिस्‍टम शामिल है। साथ ही इसके लिए अधिकारियों को भी इन दोनों बीमारियों के प्रकोप और प्रतिक्रिया पर अधिक सक्रिय रूप से तैयार होना होगा। डब्लूएचओ के अनुसार, सदस्य देशों ने "खसरा और रूबेला उन्मूलन 2020-2024 के लिए रणनीतिक योजना" को अपनाया, जो क्षेत्र के उन्मूलन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रोड मैप और फ़ोकस क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है।

बचाई जा सकेंगी बेशकीमती जानें

क्षेत्रीय निदेशक ने कहा, "खसरा को खत्म करने से रूबेला/सीआरएस को खत्म करने के दौरान क्षेत्र में एक साल में होने वाली 500,000 मौतों को रोका जा सकेगा। वहीं रूबेला से होने वाली लगभग 55,000 मौतों को रोककर गर्भवती महिला और शिशुओं के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देगा।"

क्‍या है रूबेला

रुबेला की शुरूआत हल्‍के बुखार और लाल दानों के साथ होती है। यह दाने चेहरे और गर्दन से शुरू होते हैं और फिर पूरे शरीर में फैल जाते हैं। रुबेला एक व्यक्ति के खांसने या छींकने से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। रुबेला तेजी से फैलने वाली बीमारी है। इसका डर उन लोगों में ज्‍यादा होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। यह छोटे बच्‍चों और गर्भस्‍थ शिशुओं को जल्‍दी प्रभावित करता है।

वैक्‍सीनेशन ही है बचाव

बच्चों की दो आम बीमारियां खसरा और रूबेला से एम आर (MR vaccine) के वैक्सीन के द्वारा बचा सकते हैं। खसरा में शिशु को बुखार, त्वचा पे चकत्ते, खांसी, नाक का बहना और आँखों में पानी के लक्षण देखने को मिलते हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति में शिशु को कान का संक्रमण, दस्त, निमोनिया, मस्तिष्क को छती और अंतिम चरण में मृत्यु भी हो सकती है।

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