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tonsil ki sujan: जब भी मौसम बदलता है, तो उसके साथ हमारे शरीर में भी कुछ बदलाव आते हैं। कई बार इन बदलावों का असर हमारी तबीयत पर भी पड़ जाता है। यही कारण है कि बदलते मौसम में लोगों को गले में खराश जैसे लक्षण होने लगते हैं। वैसे तो गले में खराश होना एक आम समस्या है, लेकिन कई बार यह किसी गंभीर समस्या का लक्षण हो सकता है। इन्हीं समस्याओं में से एक है, टॉन्सिलाइटिस जिसे हिंदी में टॉन्सिल में सूजन आना भी कहा जाता है। अगर समय रहते टॉन्सिलाइटिस के लक्षणों की पहचान करके उसका इलाज न किया जाए तो स्थिति गंभीर हो जाती है, जिससे व्यक्ति को निगलने में कठिनाई व दर्द जैसी कई समस्याएं हो जाती हैं। इस लेख में जानेंगे क्या है टॉन्सिल की सूजन, इसके लक्षण कारण और इलाज क्या है।
मुंह के पिछले हिस्से और गले के ऊपरी हिस्से में मौजूद लिम्फ नोड को टॉन्सिल कहा जाता है, जो गले के दोनों तरफ एक चर्बी की गांठ जैसी संरचना होती है। जब किसी कारण से टॉन्सिल में सूजन या लालिमा आ जाती है, तो उस स्थिति को टॉन्सिलाइटिस (tonsil inflammation) के नाम से जाना जाता है। कई बार टॉन्सिल्स के साथ-साथ आसपास के संरचना में भी सूजन जाती है, जो एक गंभीर स्थिति है।
ज्यादातर मामलों में टॉन्सिल में सूजन किसी प्रकार के संक्रमण के कारण होती है, जिनमें अधिकतर मामलों में वायरल संक्रमण पाया जाता है। वहीं कुछ मामलों में बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण भी टॉन्सिल में सूजन हो जाती है, जो काफी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है। वहीं कुछ लोगों के एलर्जी जैसी समस्याओं के कारण भी टॉन्सिल्स में सूजन हो सकती है।
गले में खराश व चुभन महसूस होना टॉन्सिल की सूजन का सबसे पहले लक्षण होता है और धीरे-धीरे जब यह स्थिति गंभीर होती है, तो अन्य लक्षण भी विकसित होने लगते हैं। अगर आपको गले में खराश के साथ निम्न लक्षण महसूस होने लगे हैं, तो यह टॉन्सिल की सूजन का संकेत हो सकता है -
अगर आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए। डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करके उसके अनुसार ही समस्या का इलाज करते हैं।
टॉन्सिल में होने वाली सूजन का इलाज प्रमुख रूप से उसके अंदरूनी कारणों पर निर्भर करता है और साथ ही साथ मरीज को महसूस हो रही दवाओं के अनुसार भी कुछ दवाएं दी जाती है। उदाहरण के लिए अगर टॉन्सिलाइटिस किसी बैक्टीरियल संक्रमण के कारण हुआ है, तो उसका इलाज करने के एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपको लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो आपको डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवाएं लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि कई बार दवाएं स्थिति को और गंभीर बना देती हैं।