सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 18वां दिन, जानिए बिना खाना खाए एक व्यक्ति कितने दिनों तक जिंदा रह सकता है?
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 18वां दिन, जानिए बिना खाना खाए एक व्यक्ति कितने दिनों तक जिंदा रह सकता है?
सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल का आज 18वां दिन है और उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। उनका बीपी और शुगर लेवल गिर रहा है और वजन भी काफी कम हो गया है। ऐसे में सवाल है कि कोई व्यक्ति बिना खाना खाए कितने दिनों तक जिंदा रह सकता है?
Written By:
Anju Rawat
| Updated : July 15, 2026 4:04 PM IST
Sonam Wangchuk Hunger Strike: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज 18वां दिन है। दरअसल, दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरोध में इस अनशन को शुरू किया गया था, लेकिन अभी उनकी सेहत लगातार बिगड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि उनका वजन करीब 8 किलो तक कम हो गया है और अगर भूख हड़ताल जारी रही, तो उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ सकती है। इस बीच कई लोगों के मन में सवाल है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहने से शरीर पर क्या असर पड़ता है और ऐसी स्थिति कब गंभीर और जानलेवा बन सकती है? इस विषय पर जानने के लिए हमने PSRI Hospital के हेड ऑफ इमरजेंसी डॉ. प्रशांत सिन्हा से बातचीत की-
भूख हड़ताल के दौरान शरीर कैसे काम करता है?
डॉ. प्रशांत सिन्हा बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति भूख हड़ताल पर रहता है, तो भोजन बंद करने के शुरुआती 24 घंटों तक शरीर, पहले से जमा ग्लूकोज (ऊर्जा) का इस्तेमाल करता है। यह ग्लूकोज या ऊर्जा आमतौर पर लिवर और मांसपेशियों में एकत्रित रहती है। लेकिन, जैसे-जैसे शरीर में जमा ऊर्जा खत्म होती है, शरीर ऊर्जा के लिए फैट को जलाना शुरू कर देता है।
भोजन बंद करने के 2 से 3 दिन बाद शरीर कीटोसिस की स्थिति में पहुंच सकता है। कीटोसिस शरीर की एक प्राकृतिक मेटाबॉलिक अवस्था है, जब शरीर को पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट नहीं मिलता है। इस स्थिति में शरीर ऊर्जा के लिए ग्लूकोज की बजाय फैट जलाकर कीटोन बनाता है और इसी को ऊर्जा के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
इस दौरान भूख हड़ताल कर रहे व्यक्ति को कमजोरी, थकान, सिरदर्द, चक्कर आना, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
लंबे समय तक भूखे रहने से क्या होता है?
डॉ. प्रशांत सिन्हा बताते हैं कि अगर कई दिनों तक भोजन नहीं किया जाता है, तो शरीर सिर्फ फैट पर निर्भर नहीं रह पाता है। इस स्थिति में शरीर मांसपेशियों में मौजूद प्रोटीन को तोड़कर ऊर्जा बनाना शुरू कर देता है। इससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और शरीर का वजन भी तेजी से कम होने लगता है। लंबे समय तक भूखे रहने से हो सकती हैं ये समस्याएं-
शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है।
चक्कर आने और बेहोशी जैसी स्थिति हो सकती है।
लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर का तापमान भी कम हो सकता है।
अगर कोई व्यक्ति खाने के साथ ही, पानी भी नहीं पी रहा है तो यह स्थिति अधिक गंभीर और जानलेवा हो सकती है। डिहाइड्रेशन की वजह से भूख हड़ताल कर रहे व्यक्ति की जान तक जा सकती है।
क्या लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहने से जान जा सकती है?
डॉ. प्रशांत सिन्हा बताते हैं, "भूख हड़ताल कितने दिनों तक सुरक्षित रह सकती है, इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है। यह व्यक्ति की उम्र, वजन, मेडिकल कंडीशन, शरीर में फैट की मात्रा और पानी पीने की मात्रा पर निर्भर करता है।
अगर कोई व्यक्ति खाना छोड़ देता है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीता है तो 1 से 2 सप्ताह तक जीवित रह सकते हैं। लेकिन, उस व्यक्ति को कोई गंभीर स्वास्थ्य बीमारी नहीं होनी चाहिए।
लंबे समय तक खाना न खाने से कुछ सप्ताह बाद गंभीर जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। अगर लंबे समय तक खाना न खाया जाए, तो इससे शरीर के जरूरी अंग काम करना बंद कर सकते हैं। संक्रमण, हृदय रोग और मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है।
अगर खाना और पानी दोनों छोड़ दिया जाए तो कुछ ही दिनों में जीवन के लिए खतरा हो सकता है।"
मेडिकल निगरानी क्यों जरूरी है?
डॉ. प्रशांत सिन्हा बताते हैं कि लंबे समय तक भूख हड़ताल पर बैठे व्यक्ति का रेगुलर मेडिकल चेकअप कराना बहुत जरूरी है। ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, वजन, ब्लड शुगर, किडनी की कार्यक्षमता और इलेक्ट्रोलाइट्स की नियमित जांच जरूरी है।
इतना ही नहीं, लंबे समय तक भूखे रहने के बाद अचानक से खाना शुरू करना भी खतरनाक हो सकता है। इससे रीफीडिंग सिंड्रोम (Refeeding Syndrome) नामक गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इस स्थिति में शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन तेजी से बिगड़ जाता है। इससे दिल की धड़कन में गड़बड़ी, सांस लेने में परेशानी और अन्य गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए लंबे उपवास या भूख हड़ताल के बाद भोजन हमेशा डॉक्टर की निगरानी में धीरे-धीरे शुरू करना चाहिए।
Disclaimer: भूख हड़ताल का मतलब सिर्फ खाना छोड़ना नहीं होता है, इससे शरीर की पूरी कार्यप्रणाली प्रभावित होने लगती है। शुरुआती दिनों में शरीर, पहले से मौजूद ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन, अगर लंबे समय तक भूखा रहा जाए तो इससे मांसपेशियों, हृदय और किडनी को नुकसान पहुंच सकता है। लंबे समय तक भोजन न खाया जाए तो इससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है और कुछ मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है।
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