सोनाली बेंद्रे को हुए मेटास्टेसिस कैंसर को कितना जानते हैं आप ?

थर्ड-ग्रेड मेटास्टेसिस कैंसर का इलाज आसान नहीं है, क्योंकि देर होने के बाद इसके सेल्स ग्रोथ को रोकना काफी मुश्किल हो जाता है।

WrittenBy

Written By: Anshumala | Published : July 5, 2018 11:27 AM IST

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्र थर्ड-ग्रेड मेटास्टेसिस कैंसर से जूझ रही हैं। उन्होंने ट्वीट करके कैंसर होने के बारे में अपने फैंस को जानकारी दी थी। इसके बाद से ही उनके चाहने वाले, परिवार और दोस्त उनकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। सोनाली का इलाज इन दिनों न्यूयॉर्क में चल रहा है। सोनाली ने ट्वीट करके बताया था कि उन्हें मेटास्टेटिक कैंसर है। क्या होता है मेटास्टेसिस कैंसर और कैसे होता है इसका इलाज, आइए जानते हैं।

क्या है यह कैंसर

विशेषज्ञों की राय में शरीर में होने वाले अन्य किसी भी कैंसर की तुलना में मेटास्टेसिस कैंसर या ट्यूमर सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इसका इलाज जल्द शुरू न किया जाए तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर देता है। मेटास्टेसिस यानी रूप बदलना। किसी भी कैंसर को उस स्थिति में मेटास्टेसिस कहते हैं, जब वह प्राइमरी जगह (जहां कैंसर विकसित हुआ है) से दूसरे भागों में फैल जाता है। इसमें कैंसर का नाम प्राइमरी भाग के कैंसर पर आधारित रखा जाता है, जैसे अगर किसी को ब्रेस्ट कैंसर हो और वह हड्डियों तक फैल जाए, तो उसे ब्रेस्ट कैंसर विद बोन मेटास्टेसिस कहेंगे। इसमें कैंसर के सेल्स टूटने के बाद खून में मिलकर शरीर के बाकी हिस्सों में भी फैलने लगता है। ऐसी स्थिति में शरीर की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है।

metastasis cancer and sonali bendre

मेटास्टेसिस कैंसर के लक्षण

इस तरह के कैंसर के लक्षण आमतौर पर इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैंसर शरीर के किस हिस्से तक फैल रहा है। उदाहरण के लिए यदि कैंसर हड्डियों में हुआ है, तो इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। दर्द रहता है और कई केसेज में फ्रैक्चर की संभावना भी बढ़ जाती है। जब कैंसर मस्तिष्क में होता है, तो सिरदर्द, दौरे पड़ना या चक्कर आना के लक्षण दिखते हैं। जब कैंसर फेफड़ों की ओर बढ़ता है तो सांस लेने में दिक्कत आने लगती है। वहीं जब कैंसर यकृत (लीवर) तक पहुंचता है तो पेट में सूजन, दर्द और पीलिया लक्षण के रूप में उभरते हैं।

कैसे इलाज संभव

हालांकि थर्ड-ग्रेड मेटास्टेसिस कैंसर का इलाज आसान नहीं है, क्योंकि देर होने के बाद इसके सेल्स ग्रोथ को रोकना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि देर होने पर यह पूरे शरीर में फैल गया होता है। हां, समय रहते शुरुआती स्टेज में ही शारीरिक लक्षणों को देखते हुए इलाज करवाया जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।

किसे होता है अधिक

कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में इस कैंसर के होने का खतरा अधिक रहता है। इसका इलाज तभी संभव है, जब यह पता लगा लिया जाए कि कैंसर की शुरुआत कहां से हुई और कैसे आगे बढ़ रहा है। उस आधार पर ही डॉक्टर इसका इलाज शुरू करते हैं। दवाइयां, इंजेक्शन, कीमो या हार्मोन थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, सर्जरी, बायोलॉजिकल थेरेपी आदि के जरिए इस जानलेवा बीमारी पर काबू पाने की कोशिश की जाती है।

चित्रस्रोत:Shutterstock.

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source