... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Editorial Team | Published : October 22, 2018 1:56 PM IST
योग की सहायता से कान से संबंधित रोगों को भी ठीक किया जा सकता है। © Shutterstock
योग और प्राणायाम सिर्फ मांसपेशियों को लचीला बनाने के लिए ही नहीं किया जाता है, बल्कि इससे कई बीमारियों के साथ-साथ कान से संबंधित समस्याओं को भी दूर किया जा सकता है। इसके अलावा योग के जरिए से बहरेपन की बीमारी भी ठीक हो सकती है। तो जानते हैं कानों के लिए कौन से योग लाभकारी साबित हो सकते हैं।
यह भी पढ़ें- ये 5 लक्षण देते हैं कान में कैंसर होने के संकेत, जल्द कराएं जांच
ताड़ासन
ताड़ासन आपके कान के लिए बहुत ही उपयोगी आसन है। इसे नियमित रूप से करने से आपके पोस्चर में सुधार देखने को मिलता है। यह जांघों, घुटनों और टखनों को मजबूत करता है तथा इससे पैर और कूल्हों में ताकत, शक्ति और गतिशीलता बढ़ जाती है।
कैसे करें
तड़ासन करने के लिए आप 4 से 6 इंच का गैप रखकर खड़े हो जाइए। इसके बाद दोनों भुजाओं को ऊपर की ओर उठाइए। इस दौरान अपनी आंखों को सामने पड़ने वाली किसी भी चीज पर अपनी दृष्टि जमा लीजिए। इसमें आपके शरीर का सारा भार आपकी पैरों की उंगुलियों पर होगा। कुछ समय तक इस अवस्था में रहने के बाद वापिस इस सामान्य में आ जाइए। इस आसन को आप कम से कम दस बार कीजिए। इस आसन के दौरान ऊपर उठते समय श्वास अंदर व नीचे की ओर आते समय बाहर लीजिए।
यह भी पढ़ें- कान में बहुत ज्यादा खुजली होती है? ऐसे पाएं तुरंत राहत
ब्रीदिंग एक्सरसाइज
कान से कम सुनना या फिर आपको कान की दूसरी समस्या है तो आपको ब्रीदिंग एक्सरसाइज या सांस लेने वाले व्यायाम करना चाहिए। सांस लेने वाले योग को प्राणायाम कहा जाता है। यह अभ्यास तनाव को दूर करने और कान दर्द को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा सांस के व्यायाम से ऑक्सीजन लेने में फेफड़ों की मदद करेंगी और आपका शरीर सही प्रकार से काम करेगा।
कैसे करें
ब्रीदिंग एक्सरसाइज के लिए आप जमीन पर सिद्धासन, सुखासन या पद्मासन में बैठ जाइए और सामान्य रूप से सांस लें। इसमें आप अनुलोम-विलोम का भी अभ्यास कर सकते हैं। अनुलोम-विलोम प्राणायाम में नाक के दाएं छिद्र से सांस को अंदर लेते हैं, तो बाईं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते हैं। इसी तरह यदि नाक के बाएं छिद्र से सांस अंदर लेते हैं, तो नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं।
रेस्टोरेटिव योग
रेस्टोरेटिव योग, योग का ही एक रूप है, जिसमें हम कुछ साधारण घर के सामान का सहारा लेकर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुष्टि और आराम प्राप्त कर सकते हैं। इन सामाग्रियों का इस्तेमाल आपके शरीर में योग की मुद्रा करते समय संतुलित बनाने के लिए किया जाता है। इस योगाभ्यास से शरीर की शक्ति और लचीलेपन को हम बढ़ा सकते हैं। साथ ही यह योग आपके कान के लिए बहुत ही उपयोगी है।
कैसे करें
रेस्टोरेटिव योग आपके शरीर और मन को तनाव तथा कान की बीमारियों को दूर करने में सहायता कर सकता है। इसे तकिए की सहायता से किया जाता है, जिसमें आपको दीवार के सहारे पैर ऊपर करके संतुलन बनाना होता है। इस मुद्रा में पैर, कमर और पीठ के पीछे तकिए का प्रयोग किया जाता है।