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सिगरेट पीने वाले और अन्य किसी प्रकार का धूम्रपान (Smoking) करने वाले लोगों में लंग कैंसर खास तौर पर देखा जाता है। हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं है कि जो लोग सिगरेट पीते हैं, सिर्फ उन्हें ही कैंसर (Cancer in hindi) होता है। दरअसल, इसके कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जिसमें लाइफस्टाइल फैक्टर से एनवायरमेंटल फैक्टर भी शामिल हैं। जैसा कि यह फेफड़ों का कैंसर है और इसलिए इससे सांस संबंधी लक्षण भी होने लगते हैं। लंग कैंसर से सांस संबंधी कुछ ऐसे लक्षण भी विकसित होने लगते हैं, जिन्हें शुरुआत में नजरअंदाज कर दिया जाता है और बाद में उनसे गंभीर लक्षण पैदा होने लगते हैं। सरल शब्दों में कहें तो सांस से जुड़े लक्षण भी कुछ स्थितियों के अनुसार लंग कैंसर का संकेत दे सकते हैं। इस विषय पर हमने गुरुग्राम के एसजीटी हॉस्पिटल में जनरल मेडिसिन और रेस्पिरेटरी डिजीज के स्पेशलिस्ट डॉक्टर आयुष पांडे से बात की जिन्होंने कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए। चलिए जानते हैं कि लंग कैंसर और सांस संबंधी लक्षणों से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां
Symptoms of lung cancer: डॉक्टर आयुष पांडे ने बताया कि फेफड़ों में कैंसर होने पर सांस लेने संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। लंग कैसंर से ग्रस्त लोगों होने वाली सांस संबंधी समस्याएं डिस्पनिया है, जिसे शॉर्टनेस ऑफ ब्रेथ (सांस फूलना) भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे रोग बढ़ता है वैसे-वैसे सांस फूलने की गंभीरता भी बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ट्यूमर का साइज बढ़ने लगता है। इसके अलावा लंग कैंसर या लंग कार्सिनोमा के कारण फेफड़ों में सेकेंड्री इन्फेक्शन होना भी शॉर्टनेस ऑफ ब्रेथ व अन्य सांस संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके अलावा लंग कैसंर से होने वाली अन्य बीमारियां व जटिलताएं और यहां तक कि लंग कैंसर के इलाज के कारण भी सांस फूलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
Breathing symptoms of lung cancer: डॉक्टर आयुष पांडे ने बताया कि सांस लेने में तकलीफ होना ही लंग कैंसर के द्वारा देखा जाने वाला सबसे प्रमुख सांस संबंधी लक्षण है। इस कंडीशन को लेबर्ड ब्रीथिंग भी कहा जाता है, जिसमें मरीज को ऐसा लगता है कि वह सामान्य रूप से सांस नहीं ले पा रहा है या फिर हवा की कमी महसूस होती है। कुछ लोगों को इस कंडीशन में घुटन भी महसूस होने लगती है। इसके बाद रेस्पिरेटरी रेट 20 प्रति मिनट से ज्यादा होना भी लंग कैंसर का संकेत हो सकता है। सांस लेते समय नथुने सामान्य की तुलना में चौड़े हो जाना लंग कैंसर का तीसरा लक्षण हो सकता है। डॉक्टर ने यह भी बताया कि जिन लोगों को संबंधी समस्या होती है, उनकी चमड़ी सांस लेते समय पसलियों के अंदर जाने लगती है। डॉक्टर ने यह भी बताया कि ये लक्षण व उनकी गंभीरता हर व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
डॉक्टर पांडे ने इस सवाल का जवाब देते हुए बताया कि ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि जैसे-जैसे फेफड़ों में ट्यूमर विकसित होता है, तो उसका आकार भी बढ़ने लगता है। ट्यूमर का आकार फेफड़ों में मौजूद श्वसन मार्गों पर दबाव डालने लगता है। ऐसे में फेफड़ों के सामान्य पैरेंकाइमल टिश्यू मालिग्नेंट टिश्यू में बदल जाते हैं। ऐसी स्थित में फेफड़ों का आयतन (Volume) कम हो जाता है और साथ में प्लूरल इफ्यूजन या पेरिकार्डियल इफ्यूजन भी हो जाता है। इसके साथ-साथ लंग कैंसर से निमोनिया या लोअर रेस्पिरेट्री इंफेक्शन भी हो सकते हैं। फेफड़ों में कैंसर होने पर खून के थक्के भी फेफड़ों की धमनियो में जम जाते हैं और इस स्थिति को पल्मोनरी एंबोलिज्म कहा जाता है।
डॉक्टर के अनुसार लंग कैंसर के मरीजों में एनीमिया भी काफी आम देखा जाता है और उस कारण से भी उन्हें सांस लेने में दिक्कत व सांस संबंधी अन्य लक्षण महसूस होते हैं। इन सभी लक्षणों के साथ-साथ मरीज को चिंता विकार भी हो सकते हैं, ऐसा आमतौर पर सांस ठीक से न ले पाने के कारण होता है।
डॉक्टर बताते हैं कि अगर आपको सांस लेने में किसी प्रकार की तकलीफ या सांस फूलने जैसे लक्षण हो रहे हैं तो डॉक्टर से बात करें। वहीं डॉक्टर कहते हैं कि अगर आपके घर पर पल्स ऑक्सीमीटर है, तो उससे जांच करें और अगर रूम एयर में ऑक्सीजन सैचुरेशन 92% से कम है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। अगर हार्ट रेट बढ़ी हुई है और प्रति मिनट 100 से अधिक बढ़ गई है और साथ ही में पल्स ऑक्सीमीटर से भी रिजल्ट अच्छा नहीं आ रहा है, तो डॉक्टर जल्द से जल्द डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए। इसके साथ-साथ मरीज को अगर लगातार सिर में दर्द और चेहरे, गले व पैरों में सूजन है, तो डॉक्टर से बात कर लेना चाहिए। डॉक्टर कहते हैं कि अगर मरीज को घुटन जैसा महसूस हो रहा है या फिर उसके सांस लेते समय ‘सांय-सांय’ जैसी आवाज आ रही है, तो उसे तुरंत डॉक्टर की हेल्प ले लेनी चाहिए।