उम्र के साथ कम करना है डिमेंशिया का जोखिम, तो दोस्‍तों से मिलते रहें

एक नए शोध में यह सामने आया है कि साठ वर्ष की उम्र में भी जो लोग सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हैं, उनमें डिमेंशिया होने का जोखिम काफी कम हो जाता है।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : August 6, 2019 2:24 PM IST

अगर आप डिमेंशिया (Dementia) जैसी खतरनाक बीमारियों से बचना चाहते हैं तो जरूरी है कि सामाजिक रूप से सक्रिय रहें। सामाजिक मेल-जोल मस्तिष्‍क के उस हिस्‍से की हानि से रक्षा करता है,‍ जिससे डिमेंशिया होने का खतरा रहता है। लंदन में हाल ही में हुए एक शोध में इस बात का दावा किया गया है। आइए जानें कि क्‍या है डिमेंशिया (Dementia)  और इसकी संभावना को कैसे कम किया जा सकता है। खासतौर से 60 की उम्र में दोस्‍तों के साथ मिलना और भी जरूरी हो जाता है।

क्‍या है डिमेंशिया (Dementia) 

इस बीमारी  (Dementia) में दिमाग के कुछ खास सेल्स खत्म होने लगते हैं, जिससे उस शख्स की सोचने-समझने की क्षमता कम हो जाती है और बर्ताव में भी बदलाव आ जाता है। डिमेंशिया मूलत: दो तरह का माना गया है। पहला जिसका इलाज मुमकिन है, जिसकी वजह ब्लड प्रेशर, डायबीटीज, स्मोकिंग, ट्यूमर, टीबी, स्लीप एप्निया, विटमिन की कमी आदि हो सकती हैं। जबकि दूसरी तरह का डिमेंशिया उम्र के साथ बढ़ता है और इसका इलाज संभव नहीं है।

क्‍या कहता है शोध (Dementia) 

जर्नल पीएलओएस मेडिसिन में प्रकाशित शोध में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के वरिष्ठ शोधकर्ता गिल लिविंग्स्टन ने एक विस्‍तृत शोध के बाद दावा किया है कि, ‘सामाजिक रूप से सक्रिय लोग याददाश्त और भाषा जैसे संज्ञानात्मक कौशलों में सक्रिय रहते हैं, जो उन्हें संज्ञानात्मक रूप से सक्रिय रखने में मदद करता है। जिससे उनमें डिमेंशिया के खिलाफ एक बचाव तंत्र विकसित होता है। संभवत: यह उनके मस्तिष्क में होने वाले बदलाव को ना रोक पाए, लेकिन यह बढ़ती उम्र के प्रभाव से होने वाले डिमेंशिया के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है।

ऐसे किया गया शोध (Dementia) 

जर्नल पीएलओएस मेडिसिन में प्रकाशित शोध में वाइटहॉल-2 के अध्ययन के आंकड़े का उपयोग किया गया। इसमें 10,228 प्रतिभागियों पर नजर रखी गई थी। इन प्रतिभागियों को 1985 से 2013 के बीच छह मौकों पर उनके दोस्तों और रिश्तेदारों से मेल-जोल बढ़ाने के लिए कहा गया। में 50, 60 और 70 की उम्र के लोग शामिल थे। इसमें यह अध्‍ययन किया गया कि क्‍या सामाजिक संपर्क के दौरान इनमें डिमेंशिया की व्यापकता और संज्ञानात्मक सक्रियता में कोई बदलाव नजर आया। शोधकर्ताओं ने पाया कि 60 की उम्र पर सामाजिक रूप से ज्यादा सक्रियता से बाद में डिमेंशिया विकसित होने का खतरा उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है।

ये है ज्‍यादा खतरनाक (Dementia) 

अल्जाइमर डिमेंशिया का ही एक रूप है, जिसका असर याददाश्त पर होता है। यह एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जो मस्तिष्क कोशिकाओं के लगातार नुकसान के कारण होती है। इस समय विश्‍व भर में हालात ये हैं कि हर तीसरे सैकेंड एक व्‍यक्ति अपनी याददाश्‍त खो रहा है।

भागती-दौड़ती जिंदगी के तनाव, सही खानपान व कसरत की कमी और बढ़ती उम्र जैसे कई कारण हमारी याददाश्त छीनने में लगे हुए हैं। डिमेंशिया के ही एक प्रकार अल्जाइमर में खासतौर से बुजुर्ग धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगते हैं। हालांकि सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं बल्कि बच्चे भी इस बीमारी की गिरफ्त में आने लगे हैं। विश्व अल्जामइर दिवस के मौके पर आइए जानते हैं इस खतरे के बारे में।

डराते हैं आंकड़ेें  (Dementia) 

विश्‍व भर में  4.68 करोड़ लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैैं। 2030 तक इनकी संख्‍या 7.47 करोड़  पहुंचने की आशंका है। जबकि वर्ष 2050 तक इनकी संख्‍या 13.15 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है ।

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