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Written By: Atul Modi | Updated : March 28, 2024 4:31 PM IST
लोग क्या कहेंगे? अगर घर से कदम बाहर निकालने से पहले या घर में किसी के आने पर आपके दिमाग में सबसे पहले यही बात घूमती है तो संभव है कि आप सोशल एंग्जायटी के शिकार हैं। सोशल एंग्जायटी एक मानसिक विचार है, जिससे पीड़ित शख्स खुद को भीड़ में कंफर्टेबल महसूस नहीं करता है। वह बड़े फंक्शन या पार्टी में जाना तो दूर घर आए लोगों तक से मिलने से भी बचता है। उसे महसूस होता है कि हर कोई उनके बारे में कुछ कमतर ही सोचते हैं। यही कारण है कि वे कुछ भी खुलकर नहीं बोल पाते।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार कोरोना महामारी के बाद दुनियाभर के लोगों में सोशल एंग्जायटी बढ़ी है। दिसंबर 2017 से जनवरी 2018 के बीच भारत के पुडुचेरी में की गई एक स्टडी में सामने आया कि लड़कियों के मुकाबले लड़कों में सोशल एंग्जायटी के मामले ज्यादा हैं। करीब 1081 बच्चों पर की गई इस स्टडी में 10 से 13 साल के 738 बच्चे सोशल एंग्जायटी का शिकार पाए गए। हैरानी की बात ये है कि इनमें से करीब 520 लड़के थे। ऐसे में साफ है कि पांच में से हर एक बच्चा सोशल एंग्जायटी का शिकार है। आमतौर पर लोग इसे शर्मीलापन मान लेते हैं, लेकिन असल में ये फोबिया है। कई शोध बताते हैं कि कोरोना के बाद सोशल एंग्जायटी के लेवल में बड़ा अंतर आया है। पीकिंग यूनिवर्सिटी के अनुसार कोरोना से पहले की तुलना में अब 43 प्रतिशत से ज्यादा लोगों में सोशल एंग्जायटी बढ़ी है। हालांकि करीब 28 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनकी सोशल एंग्जायटी कम हुई है।
सोशल एंग्जायटी के लक्षणों को पहचानकर आपको इसके समाधान की ओर सोचना चाहिए। ये लक्षण सोशल एंग्जायटी की ओर इशारा करते हैं।
सोशल एंग्जायटी का सबसे पहला लक्षण है किसी भी सोशल गैदरिंग यानी शादी, पार्टी, फंक्शन, रिश्तेदारी या दोस्तों आदि के घर जाने से परहेज करना। इस फोबिया से पीड़ित लोग भीड़ से बचते हैं। अगर वे कहीं चले भी जाएं तो खुद को अलग ही रखते हैं।
वैसे तो सोशल एंग्जायटी से पीड़ित लोग दूसरों लोगों से मिलना पसंद नहीं करते हैं। लेकिन अगर उन्हें कहीं जाना भी पड़े तो वे दूसरों से बात नहीं करते। या फिर बातचीत को आगे बढ़ाने में परेशानी महसूस करते हैं।
सोशल एंग्जायटी से पीड़ित लोग आमतौर पर खुद को दूसरों से कमतर आंकते हैं। उन्हें लगता है कि उनमें ऐसी कमियां हैं, जिनके बारे में दूसरे बात करेंगे। वे किसी भी गलती के लिए खुद को जिम्मेदार मानने लगते हैं। या फिर खुद की ही आलोचना करते हैं।
दूसरों से बात करने में असहज महसूस करने वाले लोग आमतौर पर उनसे बात करते समय घबरा जाते हैं। बातचीत के दौरान पसीना आना, हाथ-पैर कांपना, दिल की धड़कने बढ़ जाना आदि लक्षण सोशल एंग्जायटी के हैं। कई बार तो इस फोबिया से पीड़ित लोग इंटरव्यू तक नहीं दे पाते। मंच पर बोलने में भी उन्हें परेशानी होती है।