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खर्राटे (Snoring)

खर्राटे लेना एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिसका लोग अक्सर मजाक उड़ाते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि खर्राटे लेने वाले व्यक्तियों से ज्यादा उनके पास सोने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी होती है। लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि खर्राटे लेना एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है और कुछ मामलो में यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) जैसी गंभीर व जानलेवा समस्याओं का संकेत हो सकता है। खर्राटे की समस्या आमतौर पर तब होती है, जब नींद के दौरान किसी कारण से आपके श्वसन मार्ग रुक जाते हैं। जब हवा रुके हुए श्वसन मार्गों से बलपूर्वक निकलती है, तो इस दौरान खर्राटे की आवाजें आती हैं। सोते समय मुंह और नाक से सीटी, गड़गड़ाना या बड़बड़ाने जैसी आवाजें आना खर्राटे का सबसे प्रमुख लक्षण हैं। साथ ही हर व्यक्ति के अनुसार कुछ अन्य लक्षण भी विकसित हो सकते हैं। खर्राटे का इलाज आमतौर पर उसकी गंभीरता के अनुसार किया जाता है, जिसमें सर्जिकल और नोन सर्जिकल प्रोसीजर शामिल हैं।

खर्राटे के लक्षण

सोते समय सांस लेने के दौरान आवाजें आना ही खर्राटे का सबसे प्रमुख लक्षण है। कुछ लोगों को खर्राटे के दौरान बहुत तेज आवाजें आती हैं, जिसमें सीटी, गड़गड़ाना या बड़बड़ाना जैसी ध्वनि शामिल होती हैं। गहरी नींद में से रहे कुछ लोगों को अपने खर्राटों का पता नहीं चल पाता है। जबकि जबकि कुछ लोग अपने ही खर्राटों की आवाज से उठ जाते हैं। खर्राटों से परेशान व्यक्तियों को आमतौर पर निम्न परेशानियां भी हो सकती हैं -


  • नींद से बार-बार जागना

  • सुबह उठने के बाद गले में सूखापन महसूस होना

  • सुबह के समय सिरदर्द

  • नींद पूरी होने के कारण दिन में नींद आना

  • सोते समय दम घुटना (ओएसए का संकेत)


डॉक्टर को कब दिखाएं


अगर आप या आपके घर में कोई व्यक्ति रात को सोते समय गंभीर रूप से खर्राटे लेता है, तो आपको ऐसे में डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि तेज खर्राटे लेना ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसे खतरनाक रोगों से जुड़ा हो सकता है।

खर्राटे का कारण

रात को सोते समय श्वसन मार्गों (Airways) में किसी भी प्रकार की रुकावट होना ही खर्राटे आने का सबसे मुख्य कारण है। दरअसल मुंह और नाक के पीछे के मार्गों की अंदरूनी सतह नरम ऊतकों से ढकी होती है। गले के पीछे मौजूद नरम तालु (Soft Palate) को खर्राटे की आवाज पैदा करने वाला प्रमुख कारण माना जाता है। नरम तालु आमतौर पर यूव्यूला के आसपास के नरम ऊतक होते हैं। नरम तालु का हिस्सा इतना नरम होता है कि सांस लेने के दौरान अंदर जा रही हवा से ही उसमें कंपन होने लगती है। इसमें कंपन होने के कारण श्वसन मार्ग में रुकावट होती है और खर्राटों की आवाज बनने लगती है।

खर्राटे के जोखिम कारक


श्वसन मार्गों में सामान्य से कम जगह होना खर्राटों जैसी समस्याएं होने के खतरे को बढ़ाता है। श्वसन मार्गों के संकुचित होने का खतरा आमतौर पर निम्न स्थितियों में बढ़ता है -

  • संक्रमण व एलर्जी - श्वसन मार्गों में किसी प्रकार का संक्रमण व एलर्जी होने के कारण अंदरूनी सतह में सूजन आ जाती है और परिणामस्वरूप श्वसन मार्ग संकुचित होने लगते हैं। इसी कारण से कुछ लोगों को फ्लू या एलर्जी जैसी समस्याएं होते ही उन्हें खर्राटों की समस्याएं भी होने लग जाती हैं।

  • गले संबंधी बीमारियां - जिन लोगों को गले संबंधी कोई रोग है या बार-बार गले में संक्रमण हो जाता है, तो उन्हें भी खर्राटे की समस्या होने का खतरा अधिक रहता है।

  • नेजल पॉलिप्स - नाक के मार्ग में कहीं पर चर्बी की गांठ बन जाने की समस्या को नेजल पॉलिप्स कहा जाता है। नेजल पॉलिप्स भी आपकी खर्राटे होने के जोखिम को बढ़ा सकती है।

  • नाक की संरचना ठीक न होना - कुछ लोगों की नाक की हड्डी टेड़ी होती है या फिर किसी अन्य बीमारी (जैसे क्लेफ्ट पैलेट) नाक की संरचना असामान्य हो जाती है, जिस कारण से लोगों को खर्राटे होने का खतरा बढ़ जाता है।

खर्राटे का निदान

खर्राटे की समस्या का निदान करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज व उसके परिवारजनों को उसे हो रही परेशानियों के बारे में पूछते हैं। निदान के दौरान पूछा जाता है कि खर्राटों से किस प्रकार की आवाजें आती हैं और साथ ही मरीज से उसकी डाइट व लाइफस्टाइल के बारे में भी पूछा जाता है। इसके बाद शारीरिक परीक्षण किया जाता है और मुंह, नाक व गले की संरचनाओं की जांच की जाती है। इसके अलावा खर्राटे की समस्या की पुष्टि करने के लिए निम्न जांच भी की जा सकती हैं -


  • स्लीप स्टडी

  • ब्रीथिंग पैटर्न

  • हार्ट रेट

  • ऑक्सीजन लेवल

  • स्लीप मूवमेंट

खर्राटे का इलाज

खर्राटे का इलाज आमतौर पर स्थिति की गंभीरता और उसके अंदरूनी कारण के अनुसार किया जाता है। खर्राटे का इलाज करने के लिए सर्जरी और अन्य उपचार थेरेपी शामिल हैं, जो इस प्रकार हैं -


  • जीवनशैली में बदलाव - डॉक्टर आपकी जीवनशैली की आदतों में विशेष बदलाव करते हैं, जैसे सोने से पहले शराब का सेवन न करना, नींद की मुद्रा में सुधार और शरीर का वजन कम करने के लिए व्यायाम करने की सलाह देना आदि।

  • दवाएं - अगर एलर्जी या संक्रमण आदि के कारण खर्राटे की समस्या हो रही है, तो उसका इलाज करने के लिए कुछ अन्य दवाएं दी जा सकती हैं। इन दवाओं की मदद से खर्राटे के अंदरूनी कारणों का इलाज किया जाता है, जिससे खर्राटे की समस्या अपने आप ठीक हो जाती है।

  • नेजल स्ट्रिप्स - इसे खर्राटे के लक्षणों को नियंत्रित करने का अच्छा तरीका माना जाता है। इन स्ट्रिप्स को नाक के ऊपरी हिस्से में लगाया जाता है, जिससे ये नाक को खुला रखने में मदद करती हैं।

  • सर्जरी - अगर दवाओं व अन्य उपचार प्रक्रियाओं से खर्राटे की समस्या का इलाज नहीं हो पा रहा है या फिर स्थिति गंभीर है, तो इस समस्या का इलाज करने के लिए सर्जरी की जा सकती है। खर्राटे के इलाज के लिए निम्न सर्जिकल प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है -

    • लेजर असिस्टेड यूव्यूलापैलेटोप्लास्टी (LAUP)

    • रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन

    • सेप्टोप्लास्टी

    • टॉन्सिल्लेक्टोमी और एडीनोइडेक्टॉमी



खर्राटे की जटिलताएं

खर्राटे की समस्या को आमतौर पर कोई गंभीर समस्या नहीं समझा जाता है, लेकिन यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकता है। खर्राटे के दौरान अगर लंबे समय तक श्वसनमार्ग बंद रहते हैं, तो ऐसे में रक्त में ऑक्सीजन लेवल कम हो सकता है, जिससे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

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रात में सोते समय अधिक ना खाएं। बेहतर होगा कि आप भोजन करने के बाद थोड़ा टहलें और फिर सोने जाएं। इससे खाने को पचने में आसानी होगी। रात को कम भोजन करना खर्राटे की समस्या को रोक सकता है।

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सोते समय गले के पीछे का हिस्‍सा थोड़ा संकरा हो जाता है। ऐसे में ऑक्सीजन जब संकरी जगह से अंदर जाती है तो आस-पास के टिशु वाइब्रेट होते हैं। इस वाइब्रेशन से होने वाली आवाज को खर्राटे कहते हैं।