छींक रोकना पड़ा भारी! महिला के दिमाग तक पहुंची हवा, डॉक्टर भी रह गए हैरान

Rare Medical Case: कई बार पब्लिक प्लेस में छींक आने को हम रोक लेते हैं, लेकिन हमारी यह आदत हम पर भारी पड़ सकती है। आइए जानते हैं कैसे?

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Written By: Kishori Mishra | Published : May 12, 2026 10:43 AM IST

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Medically Verified By: Dr. (Prof) Vinit Banga

CSF Leak Rare Medical Case: सार्वजनिक जगहों पर कई लोग छींक की तेज आवाज से बचने के लिए छींक को दबा लेते हैं, लेकिन यह आदत कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है। हाल ही में सामने आए एक दुर्लभ मेडिकल केस ने डॉक्टर्स को भी चौंका दिया। एक 45 वर्षीय महिला को बार-बार छींक रोकने की आदत के कारण दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्या हो गई, जिसमें उसके नाक से ब्रेन का लिक्विड लीक होने लगा और ब्रेन के अंदर हवा भर गई। आइए इस लेख में पूरा मामला समझते हैं-

क्या था पूरा मामला?

NCBI की रिपोर्ट के अनुसार, महिला पिछले तीन महीनों से लगातार हल्के सिरदर्द से परेशान थी। मुख्य रूप से जब वह लेटती थी, तो दर्द कम हो जाता था। इसके साथ ही जब वह आगे की ओर झुकती थी, तो उसकी बाईं नाक से पानी जैसा तरल निकलता था। शुरुआत में यह सामान्य एलर्जी या साइनस की समस्या लग रही थी, लेकिन जांच में मामला काफी गंभीर निकला। डॉक्टर्स ने जब महिला की मेडिकल हिस्ट्री खंगाली, तो पता चला कि वह अक्सर पब्लिक जगहों पर छींक दबा लेती थी। यही आदत उसके लिए खतरनाक साबित हुई।

छींक रोकने से कैसे हुई इतनी बड़ी समस्या?

डॉक्टर्स के अनुसार, छींक शरीर का प्राकृतिक रिफ्लेक्स है। जब कोई व्यक्ति छींक को जबरन रोकता है, तो नाक और सिर के अंदर अचानक दबाव बहुत बढ़ जाता है। यह दबाव खोपड़ी के कमजोर हिस्सों पर असर डाल सकता है।

महिला के मामले में यही दबाव इतना ज्यादा बढ़ गया कि उसकी खोपड़ी के निचले हिस्से यानी क्रिब्रिफॉर्म प्लेट में छोटा सा छेद बन गया। इसके कारण मस्तिष्क के आसपास मौजूद सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड नाक से बाहर आने लगा और हवा ब्रेन के अंदर पहुंच गई। इस स्थिति को प्न्युमोसेफेलस कहा जाता है।

कैसे पता चला इस बीमारी के बारे में?

महिला की CT स्कैन और MRI जांच की गई। जांच में ब्रेन के अंदर हवा के छोटे बुलबुले दिखाई दिए। साथ ही, नाक और दिमाग के बीच मौजूद हड्डी में छोटा सा दोष भी मिला।

शुरुआत में डॉक्टरों ने बिना सर्जरी इलाज करने की कोशिश की। महिला को ऐसी गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई, जिनसे नाक के अंदर दबाव बढ़े, जैसे जोर लगाना, छींक रोकना या बहुत तेज खांसना। उसे CSF प्रेशर कम करने की दवा भी दी गई, लेकिन समस्या बनी रही।

बाद में करनी पड़ी सर्जरी

जब नाक से पानी निकलना बंद नहीं हुआ, तो डॉक्टरों ने एंडोस्कोपिक सर्जरी करने का फैसला लिया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को खोपड़ी के अंदर छोटा सा उभरा हुआ हिस्सा और एक्टिव CSF लीकेज मिला। सर्जरी के जरिए उस हिस्से को सफलतापूर्वक रिपेयर किया गया। अच्छी बात यह रही कि सर्जरी के बाद महिला पूरी तरह स्वस्थ हो गई और एक साल तक फॉलोअप में कोई दिक्कत सामने नहीं आई।

क्या है CSF लीकेज?

फरीदाबाद के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर और एचओडी और जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर विनीत बांगा का कगना है कि CSF का पूरा नाम सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड है, जो दिमाग और रीढ़ की हड्डी को सुरक्षा देता है। जब किसी वजह से यह तरल नाक या कान के रास्ते से बाहर निकलने लगे, तो इसे CSF लीकेज कहा जाता है। यह स्थिति गंभीर संक्रमण, मेनिनजाइटिस और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

  • नाक से लगातार पानी जैसा साफ तरल निकलना
  • आगे झुकने पर डिस्चार्ज बढ़ना
  • बार-बार सिरदर्द
  • लेटने पर दर्द कम होना
  • कानों में दबाव महसूस होना
  • बार-बार संक्रमण होना, इत्यादि।

ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत ENT विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।

छींक रोकना क्यों नहीं चाहिए?

डॉ. बंगा का कहना है कि छींक को दबाने के बजाय मुंह और नाक को टिश्यू से ढककर सामान्य तरीके से छींकना ज्यादा सुरक्षित है। छींक रोकने से कान, गला, आंख और दिमाग तक प्रभावित हो सकते हैं। पहले भी छींक रोकने से कान का पर्दा फटना, गले की नसें क्षतिग्रस्त होना और आंखों की रक्त वाहिकाएं फटने जैसे मामले सामने आ चुके हैं।

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