पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को नुकसान पहुंचाता है धूम्रपान, प्रेग्नेंट लेडी भूलकर भी न करें स्मोकिंग, जानिए दुष्प्रभाव

स्मोकिंग के प्रभावों को कम करने का बेस्ट तरीका स्मोकिंग बंद कर देना ही है। अच्छा खाना खाना और रोज एक्सरसाइज करने से भी स्मोकिंग के प्रभावों को कम नहीं किया जा सकता है।

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Written By: Atul Modi | Published : June 4, 2022 11:31 AM IST

यह जानते हुए कि तंबाकू और उससे बने उत्पाद जानलेवा हैं, बावजूद लोग इनका सेवन करते हैं। एक दौर था जब तंबाकू और सिगरेट का सेवन पुरुष अधिक मात्रा में करते थे, मगर आज महिलाएं भी ऐसे हानिकारक तंबाकू उत्पादों का प्रयोग भारी मात्रा में कर रही हैं, जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं। तंबाकू के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे तमाम वैश्विक संगठनों के मुताबिक, अगर तंबाकू के सेवन पर नियंत्रण नहीं लाया गया तो दुनियाभर में तंबाकू से लोगों की मृत्यु का आंकड़ा और बढ़ेगा, जिसे रोक पाना मुश्किल होगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के हाल ही के तंबाकू एपिडेमिक के अंदाजे के मुताबिक तंबाकू से हर साल 8 मिलियन (80 लाख) लोगों की मृत्यु हो जाती है। 7 मिलियन मृत्यु का कारण डायरेक्ट रूप से तंबाकू का सेवन करना है और 1.2 मिलियन लोगों की मृत्यु इस धूर्मपान के संपर्क में आने से होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में वैश्विक जनसंख्या का 20.3% तंबाकू का प्रयोग करती है, 36.7% इनमें से पुरुष हैं और 7.8% महिलाएं हैं।

तंबाकू में बहुत से टॉक्सिक और कैंसर पैदा करने वाले तत्व जैसे निकोटिन, टार, कार्बन मोनोऑक्साइड आदि हैं। धूम्रपान करने के शॉर्ट टर्म प्रभाव में गले में इरिटेशन होना, अस्थमा, छाती से सीटी बजने की आवाज आना और बहुत सारी ओरल और दांतों से जुड़ी समस्याओं का शामिल होना है। इसके लंबे समय तक देखे जाने वाले प्रभावों में मृत्यु और मृत्यु से जुड़ी काफी गंभीर स्थिति शामिल हैं जिसमें कई प्रकार की कैंसर होना, रेस्पिरेटरी डिसऑर्डर, देखने से जुड़ी समस्याएं और जीवन की अवधी कम होना जुड़े हुए हैं। दिल से जुड़ी बीमारियों का भी धूम्रपान करना एक कारण हो सकता है।

महिला और पुरुष दोनों के लिए हानिकारक है तंबाकू

सभी जेंडर्स के लिए धूम्रपान करना हानिकारक है लेकिन महिलाओं को इसके दुष्प्रभाव कुछ ज्यादा ही देखने को मिल सकते हैं। डॉक्टर तिलक सुवर्ण, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई के मुताबिक, इनमें से कुछ प्रभाव हैं समय से पहले मीनोपॉज होना, फर्टिलिटी कम होना, महिलाओं से जुड़ी कैंसर जैसे ब्रेस्ट कैंसर और सर्विकल कैंसर का रिस्क बढ़ना, समय से पहले बूढ़ा हो जाना आदि।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पुरुष और महिलाओं दोनों में ही स्मोकिंग करने से हार्मोनल असंतुलन हो जाता है। महिलाओं में स्मोकिंग करने से पुरुष और महिला दोनों के सेक्स हार्मोन लेवल बढ़ते हुए दिखते हैं। इससे ब्रेस्ट, सर्विकल कैंसर, डायबिटीज, ओस्टियोपोरोसिस जैसी क्रोनिक बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान भूलकर भी न करें धूम्रपान

प्रेग्नेंसी के दौरान तो धूम्रपान करना ही नहीं चाहिए क्योंकि इससे काफी सारे गलत प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। इससे बच्चे का संपर्क टॉक्सिक पदार्थों से हो सकता है जिससे मिसकैरिज होने तक का रिस्क बढ़ सकता है। कुछ दवाइयां ऐसी भी होती हैं जिन्हें मुसीबत के समय भी धूर्मपान करने वाली महिलाएं प्रयोग नहीं कर सकती हैं। इसमें हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी, ओरल कंट्रेसेप्टिव आदि दवाइयां हैं जो हार्मोन्स को संतुलित करने में मदद करती हैं। हालंकि हर महिला का शरीर धूम्रपान से अलग तरह रिएक्ट करता है। जो महिलाएं धूम्रपान करती हैं, उन्हें मासिक धर्म से जुड़ी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। असामान्य तरह से ब्लीडिंग होना इसका एक मुख्य प्रभाव है। जब महिलाएं धूम्रपान करना बंद करती हैं तो उन्हें और ज्यादा ब्लीडिंग देखने को मिल सकती है।

डॉक्टर संतोष कुमार डोरा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई का कहना है कि, स्मोकिंग से शरीर में हार्मोनल असंतुलन बनता है। पीरियड्स की तरह ही इस समय काफी सारे हार्मोन्स में बदलाव आता है। इसलिए स्मोकिंग से आपके पीरियड्स पर कुछ असर जरूर पड़ता है। यह प्रभाव हर महिला में अलग अलग देखने को मिल सकता है। कुछ कॉमन प्रभाव दर्द होना, अनियमित पीरियड्स और प्री मेंस्ट्रुअल लक्षण होते हैं। स्मोकिंग करने से महिलाओं में समय से पहले मीनोपॉज देखने को मिल सकता है। हालांकि इसका कारण केवल धूम्रपान करना ही नहीं होता बल्कि कुछ और फैक्टर भी हो सकते हैं। हालांकि अनियमित साइकिल हो जाना इसका मुख्य प्रभाव है।

स्मोकिंग के प्रभावों को कैसे कम करें?

स्मोकिंग के प्रभावों को कम करने का बेस्ट तरीका स्मोकिंग बंद कर देना ही है। अच्छा खाना खाना और रोज एक्सरसाइज करने से भी स्मोकिंग के प्रभावों को कम नहीं किया जा सकता है। इसे बंद कर देने में कभी देर नहीं होती। इसे बंद कर देने के लाभ आपको तुरंत देखने को मिलते हैं क्योंकि आपका शरीर स्मोकिंग के दुष्प्रभावों से काफी जल्दी रिकवर हो जाता है। इसके द्वारा बीमारियों का बढ़ा हुआ रिस्क कम होने में देर लगती है। केवल कुछ सालों में ही एक धूम्रपान करने वाला व्यक्ति यह आदत छोड़ने के बाद धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति की सेहत के बराबर अपनी सेहत कर सकता है।

डॉक्टर तिलक ने बताया, अगर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रोजाना इस छोड़ने का प्रयास किया जाए तो वह एकदम बंद कर देने से काफी बेहतर होगा। दूसरे तरीके से छोड़ना हानिकारक प्रभावों का कारण बन सकता है। इसे एक बार ही करने की बजाए एक प्रक्रिया की तरह समझें।

इसे बंद करना एक निर्णय ही नहीं होता बल्कि यह लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया होती है। इसके साथ ही कुछ लाइफस्टाइल बदलाव करने की भी जरूरत होती है लेकिन उनके साथ आपको स्मोकिंग छोड़ने का प्रयास भी जारी रखना होगा।

डॉक्टर डोरा के अनुसार, अपने आप को व्यस्त रखें और अन्य विकल्पों का ध्यान रखें, खुद को शारीरिक गतिविधियों में व्यस्त रखें, ट्रिगर को अवॉइड करने की कोशिश करे। एक सपोर्ट पाने के लिए अपने दोस्तों और परिवार का सहारा लें ।

इस प्रक्रिया में और मदद पाने के लिए किसी प्रोफेशनल या फिर सपोर्ट ग्रुप की भी सहायता ली जा सकती है।

इनपुट्स: डॉक्टर तिलक सुवर्ण और डॉक्टर संतोष कुमार डोरा, (सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई)

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