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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 17, 2022 10:18 AM IST
सिगरेट फूंकना आपकी किडनी को बना रहा बीमार! जानें लगातार सिगरेट पीने से शरीर के किस हिस्से में हो सकता है कैंसर
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि धूम्रपान हमारे शरीर के लिए खतरनाक है और ये कई बीमारियों के लिए एक सबसे बड़ा जोखिम कारक भी साबित होता है। इन्हीं में से एक किडनी रोग और कई अध्ययनों में ये साबित हो चुका है कि धूम्रपान गुर्दे के रोग में एक अहम भूमिका निभाता है। धूम्रपान न सिर्फ गुर्दे के रोग के विकास मे एक बहुत बड़ा जोखिम कारक है बल्कि अगर आप पहले से ही किसी किडनी की बीमारी से परेशान हैं तो ये आपकी स्थिति को और ज्यादा बदतर बना सकता है।
हाल ही में एक्सपर्ट्स ने ये पता लगाया है कि सिगरेट पीने से आप किडनी कैंसर और मूत्र पथ के संक्रमण यानी के यूटीआई का शिकार भी हो सकते हैं। ऐसा अनुमान है कि अमेरिका में सिगरेट पीने से करीब 17.4 फीसदी मामले किडनी, गुर्दे पेल्विस और यूरेटर कैंसर के हैं। वहीं बात करें किन लोगों में इसका ज्यादा खतरा है तो बता दें कि किडनी कैंसर की दर महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज्यादा देखने को मिली है।
धूम्रपान से जुड़ा सबसे आम किडनी कैंसर है रेनल सेल कार्सिनोमा। धूम्रपान इस कैंसर के बढ़ने की गति को दोगुना कर देता है। हालांकि आप कितने वर्षों से धूम्रपान कर रहे हैं और आप दिन में कितनी सिगरेट फूंक देते हैं ये उस पर निर्भर करता है। अगर आप एक हेवी स्मोकर हैं तो आपको इन प्रकार के कैंसर का खतरा बहुत ज्यादा है।
अगर आप बीते 10 वर्षों या उससे कम समय से सिगरेट पी रहे हैं तो आपको सिगरेट न पीने वाले लोगों की तुलना में अडवांस रोग होने का खतरा 6 फीसदी ज्यादा होता है। लेकिन अगर आपको सिगरेट फूंकते हुए 10 से 20 साल या फिर 20 से 30 साल हो गए हैं तो आपको ये खतरा क्रमशः 44 फीसदी से लेकर 71 फीसदी तक हो सकता है।
हाल ही में सामने आए एक डेटा के मुताबिक, रेनल सेल कार्सिनोमा विकसित होने का खतरा मौजूदा वक्त में सिगरेट पीने वालोंको 36 फीसदी, सिगरेट छोड़ देने वाले को 16 फीसदी होता है, खासकर उन लोगों के मुकाबले, जिन्होंने कभी भी धूम्रपान नहीं किया है।
बता दें कि धूम्रपान के रूप में तंबाकू का इस्तेमाल जेनेटिक म्यूटेशन, सूजन और कोशिकाओं को होने वाले नुकसान से जुड़ा हुआ है और ये भी सभी चीजें कैंसर को बहुत तेजी से बढ़ाने का काम करती हैं। धूम्रपान करने से रक्त वहिकाओं में सूजन होने लगती है, जिसकी वजह से एथेरोस्केलोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में रक्त वहिकाओं में ब्लॉकेज होने लगती है, जो ब्लड प्रेशर को बिगाड़ने का काम करती है और किडनी रोग का कारण बनती है।
इतना ही नहीं धूम्रपान हाई ब्लड प्रेशर के उपचार में प्रयोग होने वाली दवाओं के कामकाज को प्रभावित करता है और ब्लड प्रेशर को खराब करता है और किडनी कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। गौरतलब हो कि हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा किडनी रोग के दो सबसे ज्यादा बड़े जोखिम कारकों में शामिल हैं।