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क्या ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने से बच्चे का दिमाग अंदर से खोखला हो रहा है? क्या कहते हैं रिसर्च के आंकड़े?

बच्चों में स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ रहा है और रिसर्च कहती हैं कि इससे बच्चों के ब्रेन पर गहरा असर पड़ रहा है। इस लेख में एक्सपर्ट से जानेंगे कि बच्चों की फोन की लत कैसे छुड़ाएं।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : July 10, 2026 10:39 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Sanjay Jain

बच्चों के लिए स्मार्टफोन एक लत बनता जा रहा है और दुनियाभर के पेरेंट्स परेशान है। जहां पहले बच्चे दिनभर खेल-कूदते रहते थे और शरारतें करते थे, अब वे चुपचाप एक कमरे के किसी कोने में बैठकर घंटों शॉर्ट वीडियोज को स्क्रॉल करने में लगे रहते हैं। पेरेंट्स को भी अच्छे से पता है कि बच्चे अगर ज्यादा फोन देखेंगे तो उनकी आंखें खराब हो जाएंगी, लेकिन बात सिर्फ आंखें खराब होने तक नहीं है बल्कि ज्यादा स्क्रीन देखने का प्रभाव बच्चों के दिमाग पर भी बहुत ज्यादा पड़ रहा है, जिसे न तो अभी बच्चे नोटिस कर पा रहे हैं और न ही पेरेंट्स। इस टॉपिक पर दुनियाभर में कई रिसर्च हो चुकी हैं और ज्यादातर में यही पाया गया है कि स्मोर्टफोन्स या कोई भी डिजिटल स्क्रीन को लंबे समय तक देखना बच्चे की सिर्फ आंखों पर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी असर डालता है। डॉ. सुमित अग्रवाल ने भी भी बच्चों के दिमाग पर स्क्रीन से पड़ रहे प्रभाव के बारे में कुछ जरूरी जानकारियां दी।

स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल से खोखल हो रहा बच्चों का दिमाग?

Sciencedirect की एक रिपोर्ट के अनुसार Adolescent Brain Cognitive Development) Study (ABCD) की एक रिसर्च में 10 से 13 साल के कई हजारों बच्चों पर रिसर्च की गई। जिसमें बच्चों के सोशलमीडिया और स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल को एनालाइज किया गया और साथ ही में इमेजिंग स्कैन्स की मदद से उनके ब्रेन की संरचना का निरीक्षण किया गया। जिसमें कुछ क्षेत्रों में पाया गया कि जो बच्चे ज्यादा स्क्रीनटाइम दे रहे हैं या समार्टफोन्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनकी ब्रेन की कोर्टिकल मोटाई (Cortical Thickness) थोड़ी कम मिली और साथ ही ब्रेन वॉल्यूम भी अन्य बच्चों से थोड़ी कम मिली। साइंसडायरेक्ट के एक्सपर्ट्स के ब्रेन की ये दोनों चीजें दिमाग के कई जरूरी कार्यों को करने में मदद करती हैं जैसे -

  • ध्यान देना या फोकस करना
  • निर्णय लेना (डिसीजन मेकिंग)
  • सोचना व समझना (रीजनिंग)
  • याददाश्त या याद रखने की क्षमता

हालांकि, एक्सपर्ट्स ने यह भी बताया कि बचपन में कोर्टिकल थाइनिंग ब्रेन डेवलपमेंट का एक सामान्य हिस्सा हो सकता है। क्योंकि इस दौरान ऐसे न्यूरल कनेक्शन को हटाता रहता है, जिनकी जरूरत नहीं होती है ताकि न्यूरल नेटवर्क बिना किसी उलझन के सामान्य रूप से काम करता रहे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

पीडियाट्रिक्स डॉ. संजय जैन, मैक्योर हॉस्पिटल द्वारका के अनुसार अगर बच्चा लंबे समय तक स्मार्टफोन्स देखता या फिर उसका स्क्रीनटाइम ज्यादा है, तो उससे बच्चे की आंखों पर विपरीत असर तो पड़ता ही है, दिमाग की कार्यक्षमता और ब्रेन हेल्थ को भी काफी नुकसान पहुंचता है। रिसर्चों में भी साबित हो चुका है कि जिन बच्चों का स्क्रीनटाइम ज्यादा होता है, अन्य बच्चों की मुकाबले उनके दिमाग की क्षमता कम हो सकती है।

बच्चे की स्मार्टफोन की लत कैसे छुड़ाएं

इस पर डॉ. संजय जैन ने बताया कि बच्चे का स्मार्टफोन एडिक्शन खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है उसे टाइम देना और जितना हो सके उसे फिजिकल एक्टिविटी में शामिल करना। इसमें ध्यान रखना होगा कि बच्चे को डांटकर उसकी फोन की की आदत नहीं छुड़ानी है, बल्कि उसके लिए निम्न बातों का ध्यान रखना है -

  • सबसे पहले बच्चे के आगे खुद फोन इस्तेमाल करना बंद कर दें
  • जितना हो सके फोन्स को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और ताकि उन्हें फोन की याद न आए
  • बच्चे को खुद टाइम देना शुरू कीजिए उनसे बातें करें, कहानियां सुनाएं
  • रोजाना बच्चे को आउटडोर एक्टिविटी कराएं, ऐसे स्पोर्ट्स में शामिल करें जिनमें उसकी रुचि हो
  • बच्चे को घर के छोटे-छोटे काम करना सिखाएं जैसे अपना बैग खुद पैक करना आदि

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल समार्टफोन्स से बच्चों के दिमाग पर पड़ने वाले असर के बारे में जानकारी देना है। इस लेख में दी गई जानकारी रिसर्च और सर्टिफाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है और thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी सलाह के लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए