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सोते समय की ये 5 आदतें आपके दिमाग को पहुंचा सकती हैं नुकसान, न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया कैसे बचें

सोते समय की कुछ गलत आदतें दिमाग की सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं। जानें न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार कौन-सी 5 आदतों से बचना चाहिए और बेहतर ब्रेन हेल्थ के लिए क्या करें।

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Written By: Kishori Mishra | Published : July 22, 2026 11:36 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Arvind Kumar

World Brain Day 2026 : रात की अच्छी नींद सिर्फ शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि दिमाग के लिए भी बहुत ही जरूरी होती है। दिनभर दिमाग जितनी जानकारी और तनाव को संभालता है, उसकी क्लिनिंग और रिकवरी का काम नींद के दौरान होता है। लेकिन अगर सोने से पहले या सोते समय कुछ गलत आदतें रोज दोहराई जाएं, तो धीरे-धीरे उनका असर याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। विश्व ब्रेन दिवस (World brain Day) के इस खास मौके पर हम आपको कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताएंगे, जिसका असर हमारे दिमाग पर पड़ सकता है। इस विषय पर नारायणा हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिल्ट डॉ. अरविंद लकेसर का कहना है कि कई लोग यह समझ ही नहीं पाते कि उनकी छोटी-छोटी रात की आदतें भविष्य में बड़ी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकती हैं।

बिस्तर पर लेटकर देर तक मोबाइल चलाना

सोने से ठीक पहले लगातार मोबाइल स्क्रॉल करने से दिमाग आराम मोड में नहीं पहुंच पाता। स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी और लगातार मिलने वाली नई जानकारी दिमाग को सक्रिय बनाए रखती है, जिससे नींद आने में देर लगती है और उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इसलिए अगर आपकी भी आदत सोने से पहले मोबाइल चलाने की है, तो इसे आज की छोड़ दें।

रोज अलग-अलग समय पर सोना

कभी 10 बजे तो कभी 2 बजे सोना सिर्फ आपकी दिनचर्या ही नहीं बिगाड़ता, बल्कि शरीर की बॉडी क्लॉक को भी असंतुलित कर देता है। इसका असर याददाश्त, मूड और अगले दिन की एकाग्रता पर दिखाई दे सकता है। इसलिए हमेशा एक ही समय पर सोएं।

खर्राटों को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना

अगर सोते समय तेज खर्राटे आते हैं या बार-बार सांस रुकती है, तो यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में दिमाग को पूरी रात पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे लंबे समय में स्ट्रोक, याददाश्त की कमजोरी और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

पर्याप्त नींद न लेना

रोजाना 5–6 घंटे की नींद को काफी मान लेना एक बड़ी भूल हो सकती है। लगातार कम नींद लेने से दिमाग की सीखने, निर्णय लेने और जानकारी याद रखने की क्षमता प्रभावित होती है। विशेषज्ञ वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद की सलाह देते हैं।

तनाव के साथ सो जाना

अगर दिमाग दिनभर की चिंता, काम या तनाव में उलझा रहे, तो शरीर भले आराम कर ले, लेकिन दिमाग पूरी तरह रिकवर नहीं कर पाता। सोने से पहले कुछ मिनट गहरी सांस लेना, किताब पढ़ना या स्क्रीन से दूरी बनाना बेहतर नींद में मदद कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी नींद किसी दवा से कम नहीं है। अगर लंबे समय से नींद नहीं आ रही, सुबह उठने पर भी थकान रहती है, बार-बार सिरदर्द होता है या खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी समस्या है, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना भविष्य में कई गंभीर दिमागी बीमारियों से बचाव का सबसे आसान तरीका हो सकता है

Disclaimer : यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आपको लगातार नींद की समस्या, याददाश्त में कमी, सिरदर्द या अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण महसूस हों, तो तुरंत किसी योग्य न्यूरोलॉजिस्ट या डॉक्टर से परामर्श लें।