साइनोसाइटिस (Sinusitis)

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साइनस एक विशेष थैली है, जो गाल व भौहों के पीछे मौजूद होती है। साइनस में होने वाली सूजन और लालिमा की समस्या को साइनसाइटिस के नाम से जाना जाता है।

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साइनोसाइटिस क्या है

साइनस में होने वाली सूजन व लालिमा को साइनोसाइटिस कहा जाता है। साइनस गाल और भौहों के पीछे एक विशेष थैली होती है। साइनस का मुख्य काम बलगम बनाना होता है, जिससे नाक में नमी रहती है और साथ ही यह सूक्ष्म रोगाणुओं से बचाने में मदद करता है। साइनस आमतौर पर चार अलग-अलग भागों से मिलकर बना है, जिन्हें, एथोमोइडल साइनस, स्फेनोइडल साइनस, मैक्सिलरी साइनस और फ्रंटल साइनस के नाम से जाना जाता है। साइनस के ये चारों हिस्से विशेष चैनलों की मदद से एक दूसरे से जुड़े होते हैं और इनके द्वारा बनाया गया बलगम नाक के रास्ते से बाहर निकलता है। बलगम के साथ ही धूल के कण व अन्य बैक्टीरिया शरीर से बाहर निकलते हैं। साइनस में होने वाली सूजन व लालिमा आमतौर पर किसी एलर्जी या संक्रमण के कारण होती है और इसे साइनस रोग भी कहा जाता है। साइनोसाइटिस का इलाज आमतौर पर स्थिति के अंदरूनी कारण व मरीज को हो रहे लक्षणों के आधार पर किया जाता है।

साइनोसाइटिस के प्रकार

रोग के लक्षणों की अवधि के अनुसार साइनस को प्रमुख रूप से चार अलग-अलग भागों में बांटा गया है, जिसमें निम्न शामिल है -


  • एक्यूट साइनोसाइटिस - इसमें लक्षण लगभग 4 हफ्तों तक रहते हैं

  • सबक्यूट साइनोसाइटिस - इसके लक्षण 4 से 12 हफ्तों तक रह सकते हैं।

  • क्रोनिक साइनोसाइटिस - इसके लक्षण 12 हफ्तों से भी अधिक समय तक रह सकते हैं।

  • रीकरंट साइनोसाइटिस - इसमें लक्षण साल में कई बार विकसित हो सकते हैं।

साइनोसाइटिस के लक्षण

साइनस से होने वाले लक्षण आमतौर पर हर व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि, इससे होने वाले प्रमुख लक्षण कुछ इस प्रकार हैं -


  • सिरदर्द

  • बुखार

  • बंद नाक

  • खांसी, विशेष रूप से रात के समय

  • गंध व स्वाद न आना

  • मुंह से बदबू आना

  • दांत दर्द

  • कमजोरी

  • आंखों के आसपास सूजन आना

  • गले में दर्द

  • माथे, गाल या कानों के पास दर्द महसूस होना


डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि उपरोक्त लक्षण गंभीर नहीं है और घरेलू उपचार करने पर भी 10 दिनों से अधिक समय तक मौजूद हैं, तो डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए। साथ ही यदि साइनस के लक्षण शुरुआत में ही गंभीर हो गए हैं, इनसे आपकी सामान्य दिनचर्या प्रभावित होने लगी है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए। जितना जल्दी आप डॉक्टर को दिखाते हैं, डॉक्टर को उसका इलाज करने में उतनी ही आसानी रहती है और स्थिति गंभीर नहीं हो पाती है।

साइनोसाइटिस के कारण व जोखिम कारक

साइनस का मुख्य कारण एलर्जी या संक्रमण है, जिससे साइन की अंदरूनी झिल्ली में सूजन आ जाती है और बलगम का स्राव रुक जाता है। बलगम रुकने के कारण उसे बैक्टीरिया या वारयस बढ़ने लगते हैं, जिनके कारण बलगम अधिक तेजी से बनने लगता है और सिरदर्द व बुखार जैसी समस्याएं विकसित होने लगती हैं। हालांकि, कुछ अन्य कारण भी हैं, जिनसे साइनोसाइटिस विकसित हो सकता है -


  • सेप्टम टेढ़ा होना - नाक के बीच की सीधी दीवार को सेप्टम कहा जाता है, जो कार्टिलेज से बनी होती है। यदि सेप्टम एक तरफ झुका हुआ है, जिससे नाक का एक द्वार बंद का कम खुला हुआ है, तो यह भी साइनोसाइटिस का कारण बन सकता है।

  • चर्बी बढ़ना - नाक या साइनस के किसी हिस्से में चर्बी बनने से मार्ग में रुकावट होने लगती है और परिणामस्वरूप साइनस में बलगम जमा होने लगता है।

  • दवाएं - कुछ प्रकार की दवाएं प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देती हैं, जिन्हें इम्यूनोसप्रासांट्स कहा जाता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण साइनस में संक्रमण हो जाता है।

  • अन्य बीमारियां - रूमेटाइड आर्थराइटिस या डायबिटीज जैसे अन्य कई रोग हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर देते हैं। इन रोगों से ग्रसित लोगों को भी साइनोसाइटिस हो सकता है।


साइनोसाइटिस के जोखिम कारक

कुछ स्थितियां हैं, जो साइनस का खतरा बढ़ा देती हैं -

  • सिगरेट पीना

  • नाक की आकृति सामान्य न होना

  • किसी प्रकार की एलर्जी या दांत संबंधी रोग होना

  • बार-बार किसी नेजल डिकंजेस्टेन्ट का इस्तेमाल करना

  • साइनस या नाक की परत में सूजन होना

  • बार-बार फ्लू होना


इसके अलावा जो व्यक्ति तैराकी जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं या अधिक धूल मिट्टी के संपर्क में आते हैं उनको भी साइनोसाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है।

साइनोसाइटिस की रोकथाम

साइनस विकसित होने से पूरी तरह से रोकथाम करना संभव नहीं है। हालांकि, जिन लोगों को साइनोसाइटिस होने का खतरा अधिक रहता है, वे निम्न तरीकों से इसके जोखिम कारकों को कम कर सकते हैं -




  • यदि आप किसी पदार्थ से एलर्जिक हैं, तो जितना हो सके इनके संपर्क में आने से बचें

  • यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो उसे तुरंत छोड़ दें और धूम्रपान कर रहे लोगों के संपर्क में न आएं

  • बार-बार मुंह, नाक या आंखों को न छुएं और छूने से पहले हाथों को अच्छे से धो लें

  • अन्य प्रकार के धुएं या गैस आदि के संपर्क में आने से बचें

  • जिन लोगों को जुकाम या फ्लू है, उन्हें नियमित रूप से अपनी नाक साफ करते रहना चाहिए ताकि अंदर बलगम जमा न हो पाए

साइनोसाइटिस का निदान

साइनस का निदान करने के लिए आपको अस्पताल बुलाकर आपके लक्षणों की करीब से जांच की जाती है। साथ ही आपसे इस बारे में भी पूछा जाता है कि आपको लक्षण कब शुरू हुए हैं और हाल ही में आप किसी एलर्जिक पदार्थ के संपर्क में तो नहीं आए हैं।

इसके अलावा कुछ टेस्ट भी किए जा सकते हैं, जिनकी मदद से साइनोसाइटिस की पुष्टि करने में मदद मिलती है। इन टेस्टों में निम्न शामिल हैं -


  • ब्लड टेस्ट

  • नाक से बलगम लेकर उसकी जांच करना (कल्चर)

  • नाक या साइनस का एक्स रे या सीटी स्कैन करना

साइनोसाइटिस का इलाज

साइनोसाइटिस का इलाज रोग की गंभीरता और अंदरूनी कारणों के आधार पर किया जाता है। साइनस के उपचार विकल्पों में मुख्य रूप से निम्न शामिल हैं -


  • नेजल इरिगेशन - इस उपचार प्रक्रिया की मदद से बलगम को पतला किया जाता है, जिससे बलगम बाहर निकल जाता है।

  • नेजल स्प्रे - इसमें विशेष दवाओं को नाक में स्प्रे की मदद से डाला जाता है, जिनकी मदद से साइनस में जमी बलगम बाहर निकल जाती है।

  • डिकंजेस्टेन्ट मेडिसिन - ये दवाएं आमतौर पर कम समय के लिए ही दी जाती हैं, जो साइनस में होने वाले प्रेशर व दर्द से राहत दिलाती हैं। इन दवाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए।

  • एंटीबायोटिक - यदि साइनोसाइटिस किसी बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण हो रहा है, तो एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। ये दवाएं आमतौर पर 5 से 10 दिन तक दी जाती है।

  • एंटी-एलर्जिक दवाएं - जिन लोगों को साइनस में एलर्जी के कारण साइनोसाइटिस हुआ है, तो इसके लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए एंटी-एलर्जिक दवाएं दी जाती हैं।

  • स्टेरॉयड - नेजल स्टेरॉयड की मदद से साइनस में हुई सूजन व लालिमा को कम किया जा सकता है। कुछ स्टेरॉयड दवाएं साइनोसाइटिस के दौरान होने वाली सूजन व लालिमा को कम कर देती हैं, जिससे साइनस के लक्षण कम होने लगते हैं।

साइनोसाइटिस की जटिलताएं

क्रोनिक और रीकरंट साइनोसाइटिस से ग्रस्त लोगों को कुछ गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। विशेष रूप से जब वायरस या बैक्टीरिया आसपास के हिस्सों में फैल जाते हैं, तो उससे निम्न जटिलताएं विकसित हो सकती हैं -


  • कुछ समय के लिए बहरापन होना

  • मध्यम कान में संक्रमण होना

  • गंभीर सिरदर्द

  • गर्दन में जकड़न

  • भ्रम या उलझन महसूस होना

  • बोलने, निगलने या सांस लेने में दिक्कत होना


हालांकि, हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति के अनुसार हर व्यक्ति को होने वाली जटिलताएं अलग हो सकती हैं।

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