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Control Blood Pressure : पिछले कुछ सालों में हार्ट प्रॉब्लम्स के मामले काफी बढ़े हैं। इसका कारण हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन भी होता है। दऱअसल, भागदौड़ भरी जिंदगी और बिजी लाइफस्टाइले की वजह से ब्लड प्रेशर की समस्या भी काफी आम हो गई है। इस समस्या से राहत पाने के लिए ज्यादातर लोग दवाइयों का सहारा लेते हैं। हालांकि, समय पर दवाई लेना थोड़ा मुश्किल टास्क होता है। ज्यादातर लोगों के साथ यही समस्या होती है कि वे समय पर दवाई नहीं ले पाते हैं, भूल जाते हैं। ऐसे में यह दिक्कत खत्म होने के बजाय और ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में जब बीपी कंट्रोल में नहीं रहता है तो इससे हार्ट स्ट्रोक, हार्ट अटैक और अन्य हार्ट प्रॉब्लम्स होने लगती हैं। जो कई बार जानलेवा भी साबित हो सकती है।
बता दें कि जिन लोगों को हाई बीपी की समस्या है, उनके लिए यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग व कई अन्य संस्थानों ने मिलकर एक इंजेक्शन इजाद किया है, जिसका नाम है जाइलेबेसिरन। यह इंजेक्शन सिर्फ साल में या फिर 6 महीने में एक बार दिया जाता है। शुरुआती ट्रायल्स में इसका बेहतरीन रिजल्ट देखने को मिला है। जिन मरीजों को यह इंजेक्शन दिया गया, उनके बीपी में 10 से 20 पॉइंट्स तक गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में इस इंजेक्शन को लेने से हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा काफी कम किया जा सकता है।
बता दें कि शरीर में जब एंजियोटेंसिन नाम का हार्मोन बनने लगता है, तब ब्लड प्रेशर भी हाई होने लगता है। दरअसल, एंजियोटेंसिन खून की नसों को सिकोड़ देता है, जिससे की प्रेशर बढ़ जाता है। ऐसे में जाइलेबेसिरन इंजेक्शन एंजियोटेंसिनोजेन हार्मोन को बनाने वाले जीन को ही ब्लॉक कर देता है। ऐसे में जब यह हार्मोन बन ही नहीं पाता है, तो नसें भी नहीं सिकुड़ती है और ब्लड प्रेशर सामान्य ही रहता है।
हाई ब्लड प्रेशर के लिए बनाई गई जाइलेबेसिरन की बात करें, तो इसे टेस्ट करने के लिए 107 लोगों को शामिल किया गया। इनमें से 80 लोगों को असली इंजेक्शन दिया गया, जबकि बाकी लोगों को नकली इंजेक्शन यानी प्लेसिबो दिया गया। ऐसे में जिन लोगों को असली दवाई यानी जाइलेबेसिरन दिया गया, उनके ब्लड प्रेशर के लेवल में काफी सुधारदेखने को मिला, जबकि जिन्हें प्लेसिबो दिया गया था उनके बीपी में कोई सुधार नहीं था। ऐसे में एडिनबर्ग के प्रोफेसर डेविड वेब का इस पर कहना है कि यह इंजेक्शन बीपी के इलाज के लिए एक बदलाव साबित हो सकती है।
वैसे तो यह दवा बीपी के मरीजों के लिए वाकई बहुत कारगर साबित हो सकती है, लेकिन एक्सपर्ट का ऐसा मानना है कि यह अभी शुरुआती फेज में है और अभी इसे बाजार में लाना जल्दबाजी हो सकता है। हालांकि, अगर इसके सभी ट्रायल्स सफल साबित होते हैं, तो यह दवा बीपी के मरीजों के लिए वरदान साबित होगी। क्योंकि इसे सिर्फ साल में या फिर 6 महीने में एक बार ही लगवाना पड़ेगा।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।