शरीर में सूजन बन रही हैं बीमारियों की जड़, डॉक्टर से समझें कैसे साइलेंट इंफ्लेमेशन शरीर को कर रही है खराब

शरीर में सूजन होने की परेशानी को काफी लोग इग्नोर कर देते हैं, लेकिन इसे इग्नोर करना आपके लिए घातक हो सकता है। क्योंकि शरीर का सूजन कई तरह की समस्याओं का जड़ हो सकता है। आइए जानते हैं इस बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : May 4, 2026 12:58 PM IST

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Medically Verified By: Dr Brij Vallabh Sharma

Silent inflammation symptoms : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर के अंदर होने वाली हल्की सूजन को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। इसे आम भाषा में इंफ्लेमेशन कहा जाता है। यह हमेशा दर्द या सूजन के रूप में सामने नहीं आता, बल्कि कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी शरीर में बना रहता है। यही साइलेंट इंफ्लेमेशन धीरे धीरे कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन जाता है। जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंल्टेंट डॉक्टर बृज वल्लभ शर्मा का कहना है कि शरीर में होने वाली सूजन को अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर हो सकता है। आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं-

क्या होता है साइलेंट इंफ्लेमेशन

जब शरीर का इम्यून सिस्टम किसी खतरे को पहचानता है, तब वह सूजन के जरिए प्रतिक्रिया देता है। यह प्रक्रिया सामान्य स्थिति में शरीर को बचाने के लिए काम करती है। लेकिन जब यह सूजन लंबे समय तक बनी रहती है, तब यह शरीर के अपने ही ऊतकों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है। इसे ही क्रॉनिक या साइलेंट इंफ्लेमेशन कहा जाता है। इसमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता, लेकिन अंदर ही अंदर शरीर प्रभावित होता रहता है।

किन बीमारियों से जुड़ा होता है खतरा

लंबे समय तक बनी रहने वाली यह सूजन कई गंभीर बीमारियों से जुड़ी होती है, जैसे-

  1. दिल की बीमारी होने का  खतरा
  2. डायबिटीज होने की संभावना
  3. मोटापा बढ़ना
  4. कैंसर
  5. आर्थराइटिस जैसी समस्याएं, इत्यादि।

इतना ही नहीं,  शरीर में लगातार बनी रहने वाली सूजन ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाती है, इंसुलिन के असर को कम करती है और सेल्स के सामान्य काम को बाधित करती है। यही कारण होता है कि यह छोटी सी दिखने वाली समस्या बड़ी बीमारियों में बदल जाती है।

किन कारणों से बढ़ती है शरीर की सूजन

आज की लाइफस्टाइल इस साइलेंट इंफ्लेमेशन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।  प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी, ट्रांस फैट और कम फाइबर वाला आहार शरीर में सूजन को बढ़ाता है। इसके अलावा नींद की कमी, लगातार तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी और धूम्रपान जैसी आदतें भी इसे और बढ़ा देती हैं। प्रदूषण और खराब पर्यावरण भी शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ाकर इस प्रक्रिया को तेज करता है।

इस छुपी हुई समस्या की कैसे करें पहचान?

क्योंकि इसमें स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए इसकी पहचान करना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन कुछ  लक्षण जैसे-

  • बार बार थकान महसूस होना
  • हल्की शरीर दर्द
  • पाचन से जुड़ी दिक्कतें
  • वजन बढ़ना या कम होना
  • बार बार बीमार पड़ना

इन संकेतों से आप समझ सकते हैं कि आपके शरीर में सूजन बढ़ रही है। इसके अलावा सीआरपी और ईएसआर इसके लेवल को समझने में मदद करते हैं।

शरीर पर क्या होता है इसका असर?

जब यह सूजन लंबे समय तक बनी रहती है, तब शरीर की कोशिकाएं धीरे धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। इससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और हार्मोनल संतुलन बिगड़ता है। इम्यून सिस्टम भी कमजोर पड़ता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। धीरे धीरे यह स्थिति शरीर को कई पुरानी बीमारियों की ओर धकेल देती है।

साइलेंट इंफ्लेमेशन कैसे रोका जा सकता है?

इससे बचाव के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव सबसे जरूरी कदम होता है। संतुलित और प्राकृतिक आहार लिया जाता है जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट शामिल होते हैं। नियमित व्यायाम किया जाता है, जिससे शरीर की सूजन कम होती है। पर्याप्त नींद ली जाती है और तनाव को कम करने के लिए योग या मेडिटेशन अपनाया जाता है।

समय रहते सतर्कता जरूरी होती है?

शरीर में बिना लक्षण के होने वाली यह सूजन धीरे धीरे गंभीर बीमारियों की जड़ बनती है। इसे समझना और समय रहते कदम उठाना बहुत जरूरी होता है। छोटी छोटी आदतों में बदलाव करके इस साइलेंट खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जिया जाता है।

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