किडनी कैंसर का खतरा बढ़ाती हैं ये 5 चीजें! एक्सपर्ट से जानें किडनी कैंसर के शरीर पर दिखाई देने वाले लक्षण

किड़नी के कैंसर की शुरुआत भी किडनी से होती है, जब स्वस्थ किडनी की सेल्स असामान्य रूप से व्यवहार करना शुरू कर देते हैं और अनुपात से ज्यादा बढ़ने लगती है।

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : June 16, 2022 7:01 AM IST

गुर्दा (किडनी) शरीर के बाएं और दाएं किनारों में मौजूद दो सेम के आकार के अंग होते हैं, हर एक का आकार आपकी मुट्ठी के बराबर होता है। गुर्दे आपकी आंतों के पीछे स्थित होते हैं और आपकी रीढ़ के प्रत्येक तरफ एक गुर्दा होता है। गुर्दे का मुख्य कार्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाकर मूत्र के द्वारा आपके शरीर का खून साफ करना है, इसलिए एक स्वस्थ शरीर के लिए गुर्दे का स्वस्थ होना बहुत आवश्यक है।

गुरुग्राम स्थित नारायणा सुपस्पेशिलिटी अस्पताल के यूरोलाजी, यरो-अन्कोलोजी, एन्ड्रोलॉजी एंड रीनल ट्रांसल्पांट, कन्सल्टेंट, डाक्टर स्वतंत्र राव का कहना है कि किड़नी के कैंसर की शुरुआत भी किडनी से होती है, जब स्वस्थ किडनी की सेल्स असामान्य रूप से व्यवहार करना शुरू कर देते हैं और अनुपात से ज्यादा बढ़ने लगती है तब यही आगे ट्यूमर के रूप में विकसित होती हैं जिन्हें किडनी के कैंसर के रूप में जाना जाता है, किडनी में एक गांठ (ट्यूमर) बन जाता है और यही कैंसर का रूप ले लेता है। किडनी में होने वाला सबसे आम कैंसर को रीनल सेल कार्सिनोमा कहा जाता है। किडनी एक सीमित, घिरा हुआ अंग है इसलिए मेटास्टेसिस (metastasis) दूसरे अंगों में होने से पहले ही कैंसर का पता चल जाता है और यदि इसके बारे जल्द पता चल जाए तो इसका इलाज करना भी आसान हो जाता है।

लक्षण:

प्रारंभिक अवस्था में गुर्दे के कैंसर के लक्षण का जल्द पता नहीं चल पाता और गुर्दे के कैंसरकी जांच के लिए भी कोई मानक परीक्षण नहीं है इसी लिए इसके लक्षणों के बारे में पता चलने पर देरी हो जाती और मरीज जल्द इसके लक्षणों को समझ नहीं पाता हालां कि कई लक्षण ऐसे होते हैं जिनपर यदि ध्यान दिया जाए तो ये पकड़ में आते हैं

1-मूत्र के मार्ग के खून निकलना जिसका रंग गुलाबी, लाल या काला रंग को दिखाई देता है

2-पीठ या बाजू में लगातार दर्द बना रहना

3-भूख में कमी

4-अचानक से शरीर का वजन घटाना

5-थकान

6-अनियमित बार बार बुखार आना

किडनी में कैंसर होने का खतरा

1-धूम्रपान

धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों को गुर्दे के कैंसर का अधिक खतरा होता है। आपके छोड़ने के बाद किडनी में कैंसर के खतरे कम हो जाते हैं।

2-मोटापा

जो लोग मोटे होते हैं उन्हें किडनी के कैंसर का खतरा अधिक होता है।

3-डायलिसिस

लंबे समय तक डायलिसिस पर रहने वाले मरीजों में किडनी कैंसर का खतरा बना रहता है।

4-अनुवांशिकी सिंड्रोंम

कुछ विरासत में मिले सिंड्रोम के साथ पैदा हुए लोगों में किडनी के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इनमें वॉन-हिप्पेल-लिंडौ रोग, बर्ट-हॉग-ड्यूब सिंड्रोम, ट्यूबरस स्केलेरोसिस कॉम्प्लेक्स, वंशानुगत पैपिलरी रीनल सेल कार्सिनोमा या पारिवारिक रीनल कैंसर शामिल हैं।

5-पारिवारिक इतिहास

जिन लोगों के परिवार में गुर्दे की कोशिका कैंसर का मजबूत इतिहास है, उन्हें भी इसका खतरा होता है।

किडनी के कैंसर में इन्ही बातों को ध्यान में रखने पर आप अपने दिल को और शरीर को स्वस्थ बना सकते हैं। किडनी के कैंसर के शुरुआती संकेतों का पहचान करना महत्वपूर्ण है जो इसके प्रसार को रोकने और रोगी के जीवन दर में सुधार करता है।

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