सेहत के लिए बहुत जरूरी है आयोडीन, इन संकेतों से करें इसकी कमी की पहचान

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, वयस्कों को प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है और गर्भावस्था और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रतिदिन 220 से 290 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : October 8, 2020 6:44 PM IST

Signs of Iodine Deficiency : आयोडीन की कमी के (Signs of Iodine Deficiency) बारे में विस्तार से बात करने से पहले जानते हैं कि आयोडीन का हमारे शरीर में क्या कार्य होता है? आयोडीन एक खनिज है, जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह थायरॉइड ग्रंथि के लिए महत्वपूर्ण खनिज है, जो शरीर के विकास और चयापचय (Metabolism) क्रिया को नियंत्रित करता है। हमारा शरीर आयोडीन नहीं बनाता है, इसलिए हमें इसकी पूर्ति बाहर से करनी पड़ती है।

शरीर में आयोडीन की आवश्यकता उम्र के आधार पर अलग-अलग होती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, वयस्कों को प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है और गर्भावस्था और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रतिदिन 220 से 290 माइक्रोग्राम आयोडीन की आवश्यकता होती है।

आयोडीन युक्त नमक के सेवन से शरीर को आयोडीन प्राप्त होता है। इसके साथ ही दूध, पनीर, अंडे और सब्जियां भी आयोडीन के अन्य स्रोत हैं।  जब से आयोडीन युक्त नमक की शुरुआत हुई है, तब से आयोडीन की कमी ( Iodine Deficiency) बहुत ही कम हो चुकी है। लेकिन रिसर्च के अनुसार, अभी भी कुछ लोगों में आयोडीन की कमी हो सकती है। अमेरिकी थायरॉइड एसोसिएशन के अनुसार, दुनियाभर की आबादी का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा अभी भी आयोडीन की कमी से जूझ रहा है।

लगातार कमजोरी और थकान

आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो शरीर के हर ऊतक में पाया जाता है। आयोडीन का कार्य थायरॉइड हार्मोन, थायरोक्सिन ट्राईआयोडोथायरोनिन का उत्पादन है। आयोडीन की कमी (Signs of Iodine Deficiency) से थायरॉइड अंडरएक्टिव हो जाता है, जिससे शरीर में थायरॉइड हार्मोन पर्याप्त रूप से नहीं बन पाता है। इसलिए, व्यक्ति हाइपोथायरॉयडिज्म का शिकार हो जाता है। इससे थकान, कब्ज और वजन बढ़ने की समस्या होने लगती है।

ड्राई स्किन

हाइपोथायरॉयडिज्म के कारण ड्राई स्किन, बालों का झड़ना, मांसपेशियों में कमजोरी और ठंड जैसी संवेदनशील महसूस होती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हाइपोथायरॉयडिज्म होने का खतरा 8 गुना अधिक होता है, इसलिए यह मुख्य रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य की चिंता का प्रमुख विषय है। किसी भी उम्र में महिलाएं हाइपरथायरॉयडिज्म की शिकार हो सकती है। हालांकि, पीरियड्स के बाद इसकी संभावना अधिक होती है।

गोइटर

घेघा, गलकंड या गोइटर (Goitre) एक ऐसी समस्या है, जहां थायरॉयड ग्लैंड का आकार बढ़ जाता है। आयोडीन की कमी के कारण थायरॉयड हार्मोन्स की अधिक जरूरत पड़ने लगती है और उसका उत्पादन भी होता है। इस समस्या से जूझ रहे लोगों को भोजन या पानी निगलने में परेशानी, सांस फूलने और विशेषकर लेटने पर दम घुटने की शिकायत होती है।

गर्भावस्थ के दौरान समस्या

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को थायरॉइड हार्मोन की अधिक आवश्यकता होती है। ये थायरॉइड हार्मोन माइलिन बनाते हैं, जो तंत्रिका कोशिकाओं को घेरते हैं और उनकी रक्षा करते हैं, जिससे उन्हें ठीक से संचार करने में मदद मिलती है। आयोडीन की कमी के कारण गर्भपात और स्टिलबर्थ होने का खतरा अधिक होता है। आयोडीन की कमी भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि यह भ्रूण के न्यूरोलॉजिकल विकास को बाधित करता है। गर्भवती महिलाओं में आयोडीन की कमी के कारण शिशु को मस्तिष्क क्षति होने की संभावना होती है।

असामान्य वजन बढ़ाना

शरीर में आयोडीन की कमी के कारण शरीर का वजन बढ़ सकता हैं। ऐसे में अधिकतर समय थकान महसूस होने लगती है। भले ही आप ठीक क्यों ना दिखें, लेकिन इससे शरीर पर बहुत ही बुरा असर पड़ने लगता है।

आयोडीन से भरपूर फूड्स (Iodine Rich Foods) 

  • छिलका सहित आलू खाएं, क्योंकि इसके छिलके में आयोडीन, पोटैशियम और विटामिन अधिक होता है।
  • दूध में कैल्शियम के अलावा आयोडीन और विटामिन डी दोनों होता है। इनसे हड्डियों को मजबूती मिलती है।
  • मुन्नका भी आयोडीन का एक बेहतर स्रोत है। प्रतिदिन 4-5 मुन्नका खाने से विटामिन ए, आयोडीन और फाइबर प्राप्त होगा।
  • दही में भी कैल्शियम के अलावा आयोडीन होता है, जो दिन भर आयोडीन की जरूरतों को पूरा करता है। साथ ही इसमें गुड बैक्टीरिया भी होते हैं, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं।
  • व्हाइट राइस की जगह ब्राउन राइस खाएं। इसमें घुलनशीन फाइबर होता है, जो रक्त में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। ब्राउन राइस खाने से शरीर में आयोडीन की कमी नहीं होगी।

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