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World Autism Awareness Day 2024 : हर साल 2 अप्रैल को वैश्विक स्तर पर विश्व ऑटिज्म दिवस (Word Autism Day 2024) मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकारों (Autism Spectrum Disorders) के प्रति जागरुक कराना और इससे पीड़ित लोगों का समर्थन करना है। ऑटिज्म होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें जन्म के समय शिशु का वजन काफी कम होना, वायु प्रदूषण के लिए जन्मपूर्व जोखिम, मातृ मोटापा, डायबिटीज, इम्यून डिसऑर्डर या आनुवांशिक कारण हो सकते हैं। ऑटिज्म के लक्षण बच्चों में 2 से 3 साल की उम्र में ही दिखने लगते हैं। माता-पिता अपने बच्चों की एक्टिविज पर ध्यान देकर ऑटिज्म की पहचान कर सकते हैं और बच्चो का समय पर इलाज कराकर स्थिति में सुधार ला सकते हैं। आइए जानते हैं बच्चों में ऑटिज्म की पहचान किस तरह कर सकते हैं?
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार (एएसडी) कई तरह की स्थितियों का एक विविध समूह है, जिसकी वजह से सामाजिक संपर्क और संचार में कठिनाई होती है। इसके अलावा पीड़ित में अन्य तरह की एक्टिविज और व्यवहारों में असामान्यताएं देखी जाती हैं, जैसे- बात करने में कठिनाई, ध्यान देने में कठिवनाई और संवेदनाओं के प्रति असामान्य प्रतिक्रियाएं, इत्यादि।
ऑटिज्म बच्चों को जन्म से हो सकता है, लेकिन इसके लक्षण 2 से 3 साल की उम्र में पहचान करना थोड़ा आसान हो जाता है। अगर आप बच्चों की एक्विटिज पर ध्यान देते हैं, तो काफी हद तक ऑटिज्म की पहचान कर सकते हैं। ऑटिज्म के कुछ संकेत निम्न हैं-
ऑटिज्म के जोखिम कारक निम्न हो सकते हैं, जैसे-
बच्चों में इस तरह के संकेत दिखने पर समझ जाएं कि वे ऑटिज्म के विकार से ग्रसित हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों का समय पर ट्रीटमेंट कराएं, ताकि उनके व्यवहार में सुधार लाया जा सके। समय-समय पर कुछ थेरेपी के माध्यम से बच्चों की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।