
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
Written By: priya mishra | Updated : October 10, 2024 12:53 PM IST
Anxiety Symptoms In Kids: आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि तनाव, डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याएं सिर्फ बड़े लोगों को ही होती हैं। लेकिन आजकल की आधुनिक जीवनशैली में केवल वयस्कों ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चों में भी डिप्रेशन और एंग्जायटी की समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है। कई बार बच्चे चिंता, डर और तनाव जैसी स्थितियों से गुजर रहे होते हैं। इसके कारण वे समय-समय पर उदास और निराशा महसूस करते हैं। लेकिन जब बच्चे लगातार डर और चिंता की भावना से बाहर नहीं निकाल पाते हैं, तो यह एंग्जायटी और डिप्रेशन का कारण बन सकता है। बच्चों में एंग्जायटी उनके मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। इसके कारण उनके स्वभाव में कई परिवर्तन आते हैं, जिससे उनकी सेहत, पढ़ाई और लाइफस्टाइल बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। बच्चों में एंग्जाइटी की समस्या को दूर करने के लिए इसके लक्षणों को जानना बेहद जरूरी है। इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने डॉ विशाल छाबड़ा, सीनियर कंसल्टेंट मनोचिकित्सक और एचओडी फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग से बात की। आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं बच्चों में एंग्जायटी के लक्षण और इससे निपटने के उपायों के बारे में -
छोटे बच्चों में होने वाली एंग्जायटी का कोई विशेष कारण नहीं होता है। लेकिन कभी-कभी अनुवांशिक कारणों की वजह से बच्चों में एंग्जायटी की समस्या हो जाती है। इसके अलावा, बच्चे सामाजिक चिंता, अलगाव की चिंता, भावनात्मक या शारीरिक शोषण, स्कूल में या दोस्तों के बीच समस्याएं होने पर या किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने के बाद या किसी दर्दनाक घटना के बाद एंग्जाइटी की चपेट में आ सकते हैं।
बच्चों में एंग्जायटी की समस्या को दूर करने के लिए माता-पिता को इस विषय में जानकारी होना बहुत जरूरी है। यदि आप जागरूक होंगे, तभी आप अपने बच्चे की सहायता कर पाएंगे। बच्चे से उसकी चिंता के बारे में खुलकर बात करें। उसे बताएं कि वह सुरक्षित है और विश्वास दिलाएं कि आप उसके साथ हैं। बच्चे के किसी भी तरह के बदलाव की अनदेखी न करें। अपने बच्चे के लिए घर पर एक सुरक्षित और शांत वातावरण बनाएं। साथ ही, बच्चे को पर्याप्त नींद, हेल्दी डाइट और रोजाना एक्सरसाइज करने के लिए प्रोत्साहित करें। पेरेंट्स बच्चे की परेशानियों को समझकर उसकी मदद कर सकते हैं।