बहुत देर तक contact lens पहनने से आपकी हो सकती है आंखों की ये बीमारियां

लंबे समय तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनने के साइड-इफेक्ट्स!

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Written By: Editorial Team | Published : November 6, 2017 6:02 PM IST

आजकल की लाइफस्टाइल ऐसी हो गई है कि लोग स्टालिश लुक के लिए आंख खराब होने के बावजूद बिना चश्मे के घुमते हैं। और फिर क्या बढ़ गया चश्मे का नंबर और लेंस हो गया मोटा। कैसा लगेगा मोटा चश्मा! तो चलो फिर कॉन्टेक्ट लेंस पहनते है। फैशन भी बरकरार रहेगा और पावर भी नहीं बढ़ेगा।

लेकिन क्या आपको पता है कॉन्टैक्ट लेंस सिर्फ 10-12 घंटे तक ही पहनना चाहिए। ज्यादा समय तक इसको पहने रहने से आपको हो सकती है आंखों को इंफेक्शन होने का खतरा होता है। डॉ. हर्षवर्द्धन घोरपड़े, कॉर्निया, कैटरैक्‍ट और रिफ्रैक्टिव सर्जन, हीरानंदानी हॉस्पिटल वाशी ने कुछ ऐसे ही बीमारियों के बारे में बताया है जिनको पढ़कर आप रह जायेंगे दंग-

कॉर्निअल अल्सर- आंख की बाहरी पारदर्शी परत का संक्रमण है, इससे दृष्टि चली जाती है। तैरते समय कॉन्टेक्ट लैंस के इस्तेमाल से आम तौर पर स्यूडोमोनास बैक्टीरिया या अकैंथ अमीबा पैरासाइट का संक्रमण होता है। इससे आंखों में दर्द उठता है, आंखें लाल रहती हैं, पानी निकलता है और दृष्टि धुंधली हो जाती है। ऐसी स्थिति में, कॉर्निया विशेषज्ञ के पास फौरन जाना चाहिए। जल्द से जल्द एंटीबायोटिक ड्रॉप्स आंखों में डालनी चाहिए। अगर कवक या अंकैथ अमीबा का संक्रमण है, तो तीन महीने तक का लंबा इलाज चल सकता है। कॉर्निया बदलने की जरूरत भी पड़ सकती है।

जाइंट पैपिलरी कंजेक्टिवाइटिस (जीपीसी)- बताए गए समय अंतराल पर लेंस नहीं बदलने से यह बीमारी होती है। इससे लेंस में गंदगी जमा होने लगती है, जिससे आंखों में जलन होती है। पलक के नीचे दानेदार परत का निर्माण होने लगता है, जिसे पैपीले कहते हैं, जो आकार में बड़ा होता है। यह परत कॉर्निया पर रगड़ पैदा करता है, जिससे  फोटोफोबिया (रोशनी के प्रति काफी संवेदनशील स्थिति) और क्रॉनिक रेड आई बीमारी होती है। कुछ समय तक लैंस नहीं पहनने के बाद (एक या एक महीने से ज्यादा) इसका इलाज शुरू होता है। आंखों में चिकनाई वाले द्रव्य का इस्तेमाल करना पड़ता है। ताजा उच्च डीके (ऑक्सीजन पारगम्यता) लैंस का इस्तेमाल भी करना पड़ता है, जिसे महीने में बदल देना चाहिए।

कॉन्टेक्ट लैंस एसोशिएटेड रेड आई (सीएलएआरई)- ये होने पर आंखों में लाली की अचानक शुरुआत होती है, जो सोते समय लैंस पहनने से होती है। बहुत ज्यादा फिट लैंस की वजह से कॉर्निया को जब ऑक्सीजन मिलना काफी कम हो जाता है, तब यह बीमारी हो जाती है। यह अपेक्षाकृत कम बड़ी बीमारी है, लेकिन संक्रमण से आंखे लाल होने की स्थिति से इसे अलग देखने की जरूरत है। एक हफ्ते या इससे अधिक समय तक लेंस नहीं पहनने के बाद इसका इलाज शुरू होता है। आपसे चिकनाई वाले एंटीबायोटिक ड्रॉप्स का इस्तेमाल करने के लिए कहा जाता है और बेहतर फिटिंग के लिए लैंस बदले जाते हैं।

चित्र स्रोत: Shutterstock

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