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Antianxiety Drugs Side Effects: डिप्रेशन इसे तो आप अच्छी तरह से समझते होंगे। कई बार आप मजाक में दोस्तों के बीच बोल देते हैं कि ऐसी बातें न करो मैं डिप्रेशन में चला जाऊंगा और सब ठहाका मारकर हंस देते हैं। मगर जो असल में डिप्रेशन में होता है उसका का क्या? असल में डिप्रेशन एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति लगातार उदासी, निराशा और अरुचि महसूस करता है। आप इसे मूड खराब होना नहीं कह सकते बल्कि यह एक गहरी भावनात्मक और शारीरिक स्थिति है, जो सोचने, काम करने, सोने और खाने तक को प्रभावित कर सकती है। हालांकि सबसे अच्छी बात है कि डिप्रेशन का इलाज संभव है, जिसके लिए दवाएं, काउंसलिंग, थेरेपी और जीवन-शैली में सुधार सबसे आसान हैं। लेकिन अभी हाल ही में किए गए शोधों में पाया गया है कि डिप्रेशन की दवाएं पीड़ित हो बहुत अधिक नुकसान पहुंचाती है। क्या आप इसे बारे में जानते हैं।
जो व्यक्ति लगातार उदासी और निराशा जैसी भावनाओं से जूझता रहता है उन्हें अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए एंटी डिप्रेशन दवाओं की जरूरत पड़ती है। जब दिमाग में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे रसायनों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो मूड, नींद, ऊर्जा और सोचने की क्षमता प्रभावित होती है। ये दवाएं उन रसायनों का संतुलन सुधार के उदासी, बेचैनी और थकान जैसे लक्षणों को कम करती हैं। डॉक्टर इनका उपयोग करने की सलाह तब देते हैं, जब थेरेपी या जीवनशैली में किए गए बदलावों के बाद भी कोई सुधार नहीं होता है और लक्षण गंभीर होने लगते हैं। हालांकि इस पर हाल में शोध भी किए गए हैं, जो इसका दूसरा पक्ष उजागर करते हैं।
किंग्स कॉलेज लंदन और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी में पहली बार डिप्रेशन की 30 दवाओं की तुलना उनके साइड इफेक्ट्स के आधार पर की गई, जिसके नतीजे लैंसेट साइकियाट्री में प्रकाशित हुए। यह एक मेटा-विश्लेषण था। 58,500 मरीजों पर किए गए 151 अध्ययनों में पाया गया कि हर दवा का असर हर तरह के मानव शरीर पर अलग-अलग होता है। फ्लूवोक्सामिने दिल की धड़कन धीमी हुई और नोर्ट्रिप्टीलीन से तेज। तो कुछ दवाओं ने ब्लड प्रेशर बढ़ाया। स्टडी में कहा गया कि हर व्यक्ति के लिए दवा का चुनाव उसकी सेहत और जरूरत के अनुसार होना चाहिए, ताकि साइड इफेक्ट्स कम हों और इलाज असरदार रहे।
मेटा-एनालिसिस के नतीजों में पाया गया कि डिप्रेशन के इलाज में 21 दवाएं बिना प्लेसिबो से बेहतर असर करती हैं। लेकिन हर दवा का असर और साइड इफेक्ट अलग होता है। उदाहरण के तौर पर, सर्ट्रालिन नाम की दवा ने डिप्रेशन के लक्षणों में बहुत बड़ा फर्क नहीं दिखाया, लेकिन इससे चिंता कम हुई और जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर हुई। इसलिए डॉक्टर दवा चुनते समय सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि मरीज की पूरी सेहत, दवा का असर और उसके साइड इफेक्ट्स को देखकर फैसला लेते हैं, ताकि इलाज सुरक्षित और असरदार हो। स्टडी में भी यही बात सामने आई कि सबसे बेहतर दवा एक ही नहीं यह हर व्यक्ति के लिए अलग होती है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।