शरीर में दर्द और बार-बार बैक्टीरियल इंफेक्शन होना सिकल सेल बीमारी के हैं लक्षण, जानें इसके 4 प्रकार

सिकल सेल के प्रकार: सिकल सेल रोग एक जेनेटिक बीमारी है, जिसमें खून बनने में समस्या होने लगती है। जिससे शरीर में कई लक्षण नजर आने लगते हैं।

WrittenBy

Written By: Pallavi Kumari | Published : June 17, 2022 12:13 PM IST

सिकल सेल (sickle cell in hindi) खून से जुड़ी बीमारी है जो शरीर के रेड ब्लड सेल्स(RBC) को प्रभावित करती है जिससे खून नहीं बनता और हीमोग्लोबिन की कमी होने लगती है। यह आमतौर पर माता-पिता से बच्चों में वंशानुगत मिलती है। जिन लोगों को सिकल सेल बीमारी होती है उनके रेड ब्लड सेल्स में ज्यादातर हीमोग्लोबिन एस होता है जो कि हीमोग्लोबिन का असामान्य प्रकार है। इससे रेड ब्लड सेल्स का आकार बदल जाता है और वे सिकल शेप यानी कि अर्धचन्द्राकार के आकार के जैसे नजर आने लगते हैं। इस तरह के आकारा के कारण यह ब्लड सेल्स के जरिए पूरी बॉडी में मूव नहीं कर पाती जिससे शरीर के टिशूज, सेल्स और कई अंगों को नुकसान होने लगता है। तो, आइए जानते हैं सिकल सेल के कुछ प्रकार (sickle cell types in hindi) और फिर जानेंगे इसके लक्षण(sickle cell ke lakshan)

सिकल सेल के प्रकार-Types of sickle cell in hindi

1. सिकल सेल एनीमिया (Sickle cell anemia)

सिकल सेल एनीमिया, इस रोग का आम प्रकार है। इसे हीमोग्लोबिन एसएस रोग भी कहते हैं। यह तब होता है जब आप दोनों माता-पिता से हीमोग्लोबिन एस जीन म्यूटेशन के द्वारा पाते हैं। इस प्रकार में, शरीर केवल हीमोग्लोबिन एस का उत्पादन करता है।

2. सिकल हीमोग्लोबिन-सी डिजीज (Sickle Hemoglobin- C Disease)

हीमोग्लोबिन एससी रोग सिकल सेल रोग का दूसरा सबसे आम प्रकार है। यह तब होता है जब आप एक माता-पिता से हीमोग्लोबिन बीटा एस जीन और दूसरे से हीमोग्लोबिन सी जीन प्राप्त करते हैं। हीमोग्लोबिन एससी रोग वाले व्यक्तियों में हीमोग्लोबिन एसएस रोग वाले व्यक्तियों के समान लक्षण हो सकते हैं।

3. सिकल बीटा-प्लस थैलसीमिया (Sickle Beta-Plus Thalassemia)

इसे हीमोग्लोबिन SB+ (बीटा) थैलेसीमिया भी कहते हैं। ये तब होता है जब आपको एक माता-पिता से हीमोग्लोबिन बीटा S जीन और दूसरे माता-पिता से एक हीमोग्लोबिन बीटा प्लस थैलेसीमिया जीन विरासत में मिला हो। इस प्रकार में, कुछ सामान्य बीटा हीमोग्लोबिन का उत्पादन होता है, लेकिन कम मात्रा में। क्योंकि शरीर कुछ सामान्य हीमोग्लोबिन का उत्पादन करता है, सिकल सेल रोग का यह रूप हीमोग्लोबिन एसएस रोग से कम गंभीर होता है। लक्षण आमतौर पर हीमोग्लोबिन एसएस या एससी रोग की तुलना में हल्के होते हैं।

4. सिकल बीटा-जीरो थैलसीमिया (Sickle Hemoglobin-O Disease)

इसे हीमोग्लोबिन एसबी 0 (बीटा जीरो) थैलेसीमिया भी कहते हैं। हीमोग्लोबिन एस बीटा शून्य थैलेसीमिया तब होता है जब आप एक माता-पिता से हीमोग्लोबिन बीटा एस जीन और दूसरे माता-पिता से हीमोग्लोबिन बीटा 0 थैलेसीमिया जीन म्यूटेशन पाते हैं। इसमें हीमोग्लोबिन एसएस रोग के समान लक्षण होते हैं और इसे सिकल सेल एनीमिया भी कहा जाता है क्योंकि शरीर केवल हीमोग्लोबिन एस का उत्पादन करता है।

सिकल सेल रोग के लक्षण-Sickle cell symptoms in hindi

सिकल सेल एनीमिया के लक्षण आमतौर पर लगभग 6 महीने की उम्र में दिखाई देते हैं। ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होते हैं और समय के साथ बदल सकते हैं।

1. थकान और कमजोरी

सिकल सेल आसानी से टूट जाते हैं और मर जाते हैं जिससे थकान और कमजोरी होने लगती है। लाल रक्त कोशिकाएं आमतौर पर लगभग 120 दिनों तक जीवित रहती हैं, इसके बाद उन्हें बदलने की आवश्यकता होती है। लेकिन सिकल सेल आमतौर पर 10 से 20 दिनों में मर जाते हैं, जिससे लाल रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है। पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाओं के बिना, शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है और इससे थकान होती है।

2. शरीर दर्द

शरीर दर्दसिकल सेल एनीमिया का एक प्रमुख लक्षण है। दर्द तब विकसित होता है जब एस आकार की लाल रक्त कोशिकाएं छोटी रक्त वाहिकाओं के माध्यम से आपकी छाती, पेट और जोड़ों में रक्त के प्रवाह को खराब कर देती हैं। ऐसे में दर्द तेज भी हो सकता है और कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों तक रह सकता है। इसके अलावा सिकल सेल एनीमिया वाले कुछ लोगों में पुराना दर्द होता है, जो हड्डी और जोड़ों की क्षति, अल्सर और अन्य कारणों से हो सकता है।

3. हाथ-पैरों की सूजन

हाथ-पैरों की सूजन सिकल सेल का एक प्रमुख लक्षण है। सूजन सिकल के आकार की लाल रक्त कोशिकाओं के कारण होती है जो हाथों और पैरों में ब्लड सर्कुलेशन को रोकती है।

4. बार-बार बैक्टीरियल इंफेक्शन होना

सिकल कोशिकाएं इम्यूनिटी को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। सिकल सेल एनीमिया वाले शिशुओं और बच्चों को आमतौर पर निमोनिया जैसे इंफेक्शन बार-बार हो सकते हैं।

5. प्यूबर्टी में देरी होना

लाल रक्त कोशिकाएं शरीर को विकास के लिए जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्रदान करती हैं। ये स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की कमी शिशुओं और बच्चों में विकास को धीमा कर सकती है और किशोरों में युवावस्था यानी प्यूबर्टी में देरी कर सकती है।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source