हड्डी टूटने पर प्लेट लगवाएं या रॉड? डॉक्टर से जानें
हड्डी टूटने पर प्लास्टर चढ़ता है यह तो आप जानते होंगे, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि हड्डी टूटने पर प्लेट लगाना ज्यादा सही होता है या रॉड?
Haddi Tut Jaye To Kya Kare: देखें हड्डी तब टूटती है जब सड़क दुर्घटना हो जाए, तेज की गिर जाएं, खेलकूद या कोई गंभीर चोट लग जाए। कई बार फ्रैक्चर सीरियस होता है तो कभी कभी सिर्फ प्लास्टर से परेशानी ठीक नहीं हो पाती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर हड्डी को सही स्थिति में जोड़ने और जल्दी ठीक करने के लिए प्लेट (Plate) या रॉड (Rod) लगाने की सलाह देते हैं। लेकिन प्लेट या रोड कब लगाएं जाते हैं आप जानते हैं?
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि आखिर प्लेट बेहतर है या रॉड? ऐसे में पारस हेल्थ, कानपुर के एसोसिएट कंसल्टेंट और ऑर्थोपेडिक डॉक्टर राहुल पटेल कहते हैं कि मेरे अनुसार इसका जवाब फ्रैक्चर की जगह, गंभीरता और मरीज की उम्र पर निर्भर करता है। दोनों तकनीकों का उद्देश्य टूटी हुई हड्डी को स्थिर रखना होता है, लेकिन इनके इस्तेमाल का तरीका अलग होता है।’ कैसे? आइए डॉक्टर से ही जानते हैं।
कब लगाई जाती है प्लेट?
डॉक्टर प्लेट एक पतली धातु की शीट होती है, जिसे स्क्रू की मदद से हड्डी के ऊपर लगाया जाता है। इसका उपयोग खासतौर पर उन फ्रैक्चर में किया जाता है जहां हड्डी कई टुकड़ों में टूट गई हो या जोड़ के आसपास चोट लगी हो। उदाहरण के लिए हाथ, कलाई, कंधे, टखने या चेहरे की हड्डियों के फ्रैक्चर में प्लेट का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। प्लेट लगाने से हड्डी अपनी सही जगह पर मजबूती से बनी रहती है और मरीज जल्दी हाथ-पैर हिलाना शुरू कर सकता है।
हालांकि प्लेट लगाने के लिए सर्जरी के दौरान बड़ा चीरा लगाना पड़ सकता है। कुछ मरीजों में बाद में दर्द, सूजन या ठंड के मौसम में असहजता महसूस हो सकती है। जरूरत पड़ने पर भविष्य में प्लेट हटाने के लिए दूसरी सर्जरी भी करनी पड़ सकती है।
कब लगती है रॉड?
डॉक्टर बताते हैं कि 'रॉड को मेडिकल भाषा में इंट्रामेडुलरी नेल कहा जाता है। इसे हड्डी के अंदर डाला जाता है, इसलिए बाहर से ज्यादा दिखाई नहीं देता। यह तकनीक खासतौर पर शरीर की लंबी हड्डियों जैसे जांघ (Femur) और पिंडली (Tibia) के फ्रैक्चर में उपयोग की जाती है।'
रॉड लगाने से क्या फायदा होता है?
रॉड लगाने का फायदा यह है कि इसमें चीरा उम्मीद से छोटा लगता है और हड्डी के नेचुरल स्ट्रक्चर को कम नुकसान पहुंचता है। मरीज कई मामलों में जल्दी चलना-फिरना शुरू कर सकता है। यही वजह है कि सड़क दुर्घटना में होने वाले बड़े फ्रैक्चर में रॉड को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि हर फ्रैक्चर में रॉड लगाना संभव नहीं होता। डॉक्टर कहते हैं कि अगर हड्डी जोड़ के बहुत करीब टूटी हो या फ्रैक्चर का पैटर्न अलग हो, तो प्लेट ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है।
कौन सा विकल्प बेहतर है?
एक्सपर्ट के अनुसार बेहतर विकल्प वही होता है जो मरीज की समस्या के अनुसार सबसे सही हो। डॉक्टर एक्स-रे, सीटी स्कैन और चोट की गंभीरता देखकर तय करते हैं कि प्लेट लगानी है या रॉड। अगर फ्रैक्चर सीधा और लंबी हड्डी में है, तो रॉड बेहतर हो सकती है। वहीं जटिल या जोड़ के पास के फ्रैक्चर में प्लेट अधिक उपयोगी होती है। मरीज की उम्र, हड्डियों की मजबूती, डायबिटीज जैसी बीमारियां और रिकवरी की जरूरत भी निर्णय को प्रभावित करती हैं।
रिकवरी के दौरान क्या रखें ध्यान?
सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी, संतुलित आहार और डॉक्टर की सलाह का पालन बेहद जरूरी होता है। कैल्शियम और विटामिन-डी से भरपूर भोजन हड्डियों को जल्दी मजबूत बनाने में मदद करता है। धूम्रपान और शराब से दूरी रखना भी रिकवरी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
डिस्क्लेमर- एक्सपर्ट का कहना है कि सही समय पर सही इलाज मिलने से ज्यादातर फ्रैक्चर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। इसलिए किसी भी चोट को नजरअंदाज न करें और बिना देरी ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह लें।