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Shingles symptoms शिंगल्स एक प्रकार का त्वचा रोग है जो कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में बहुत अधिक देखा जाता है। भारत में 40 साल से अधिक उम्र के लोगों में शिंगल्स का खतरा अधिक पाया गया है। वहीं, हार्ट पेशेंट्स, किडनी की बीमारियों या डायबिटीज से पीड़ित लोगों में भी शिंगल्स का रिस्क अधिक होता है।
शिंगल्स की बीमारी उसी वायरस से फैलती है जो चेचक या चिकनपॉक्स की बीमारी फैलाता है। हालांकि कुछ स्टडीज के अनुसार वायरस वेरिसेला ज़ोस्टर (Varicella Zoster) नाम का यह वायरस शरीर में 40-50 साल तक की अवधि तक सक्रिय रह सकता है। शरीर में छुपकर यह वायरस आपकी नसों को कमजोर कर सकता है और जब शरीर की इम्यूनिटी कम (weakening immune power) होने लगती है तब यह वायरस हमला कर देता है और शिंगल्स की बीमारी का कारण बनता है।
हालांकि शिंगल्स की बीमारी त्वचा से (skin related disease) भले ही जुड़ी है लेकिन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक यह छूने से नहीं फैलती। पर जिन लोगों को चेचक या चिकनपॉक्स हुआ हो उन्हें शिंगल्स होने का खतरा अधिक होता है। इसी तरह लोगों को इन मरीजों से दूर रहने और उनके साथ कपड़े, बर्तन, कंघी और चादर जैसी चीजें शेयर ना करने की सलाह दी जाती है।
इस बीमारी से पीड़ित लोगों को लम्बे समय तक दर्द महसूस हो सकता है। वहीं, रैशेज ठीक होने के बाद भी दर्द से जल्दी आराम मिलता नहीं दिखायी देता। एक्सपर्ट्स के अनुसार शिंगल्स का दर्द कैंसर से जुड़े पुराने दर्द से भी अधिक गम्भीर हो सकता है।