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Written By: Atul Modi | Updated : March 15, 2024 2:14 PM IST
'मेरे हस्बैंड जब टूर पर जाते हैं तो मुझे अच्छी नींद ही नहीं आती', 'मुझे अकेले नींद नहीं आती', अक्सर आपने महिलाओं को ऐसी बातें बोलते हुए सुना होगा। वहीं आपने कुछ लोगों को ये भी कहते हुए सुना होगा कि 'मुझे किसी के साथ नींद नहीं आती'। अच्छी, पर्याप्त और गहरी नींद को लेकर लोगों के ये दो अपने-अपने तर्क हैं। इनसोम्निया यानी अनिद्रा की बढ़ती हुई शिकायतों के बीच यह जानना आपके लिए जरूरी है कि आखिर सही क्या है। हालांकि यह अपनी-अपनी पर्सनल चॉइस पर भी निर्भर है। 15 मार्च को वर्ल्ड स्लीप डे पर जानते हैं अनिद्रा को लेकर हाल ही में हुए एक शोध में क्या सामने आया।
टेंशन, सोशल मीडिया, स्क्रीन टाइम, आउटिंग, लेट नाइट पार्टीज के शौक आदि ने लाखों लोगों की रातों की नींद उड़ा दी हैं। टेंशन और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल के कारण लोगों में इनसोम्निया की शिकायतें बढ़ रही हैं। नींद के इंतजार में देर रात तक बिस्तर पर करवट बदलते रहना कुछ लोगों के लिए रोज की बात है। लेकिन सामान्य सी नजर आने वाली यह परेशानी, कई बड़ी समस्याओं की जड़ है। इनसोम्निया आपको शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से कमजोर बनाता है। अनिद्रा डिप्रेशन बढ़ाने के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। जब बात अनिद्रा की होती है तो आपके सोने का माहौल भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। कुछ लोगों का कहना है कि बैड पर अकेले सोने से अच्छी नींद आ सकती हैं तो कुछ का मानना है कि बेड शेयरिंग बेहतर नींद के लिए बेस्ट है। सालों से ये बहस चलती आ रही है।
हाल ही में एरिजोना यूनिवर्सिटी की ओर से इनसोम्निया को लेकर एक शोध किया गया। यह शोध अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। शोध में सामने आया कि अपने पार्टनर के साथ बैड शेयर करने से आपको अच्छी और गहरी नींद आती है। यह सीधे तौर पर आपकी मेंटल हेल्थ से जुड़ा है। शोध के अनुसार जो लोग अपने पार्टनर या दोस्त के साथ बेड शेयर करते हैं, उन्हें अकेले सोने वालों के मुकाबले बेहतर नींद आती है। बेड शेयरिंग से लोगों को गहरी और लंबी नींद आने में मदद मिलती है। उनकी थकान भी जल्दी दूर होती है। शोधकर्ताओं के अनुसार आपका पार्टनर इनसोम्निया की परेशानी से आपको प्रभावी तरीके से छुटकारा दिला सकता है। आप बेड शेयरिंग से मेंटली फ्री महसूस करते हैं। क्योंकि जिस पार्टनर के साथ आप बैड शेयर करते हैं उसका साथ डिप्रेशन, टेंशन और एंग्जाइटी को कम करने में मदद करता है। इससे आपको जल्दी नींद आने में मदद मिलती है। अध्ययनों का दावा है कि बैड शेयरिंग मेंटल हेल्थ के लिए पॉजिटिव है। इससे पार्टनर से नजदीकी बढ़ती है, आप रिलैक्स होते हैं और सुरक्षा की भावना आती है। पार्टनर के स्पर्श से ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन बढ़ता है, जिससे तनाव कम होता है। चिंता दूर होती है। आपका रिश्ता मजबूत होता है।
दूसरी ओर दुनियाभर के लाखों लोग आज भी बेड शेयरिंग के समर्थन में नहीं हैं। इन लोगों का तर्क है कि अकेले सोने से आप स्वतंत्र रहकर अपने अनुसार सो सकते हैं। इसमें आपको अपने पार्टनर की जरूरतों का ध्यान नहीं रखना पड़ता है। जैसे-पंखे की स्पीड, एसी का टेंप्रेचर, बैड पर अपर्याप्त जगह, खर्राटे आदि दूसरे पार्टनर के लिए परेशानी खड़ी कर देते हैं, ऐसे में गहरी नींद नहीं आ पाती है। वहीं अकेले सोने पर आप निश्चिंत होकर अपने अनुसार सोने का माहौल बना पाते हैं, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी है। साल 2023 में अमेरिका में हुए एक सर्वे में नींद को तलाक का नया आधार मानने का चलन बढ़ता दिखा। इसे 'स्लीप डिवोर्स' का नाम दिया गया। लोगों का तर्क था कि पार्टनर की जरूरत के अनुसार सोने से उनकी नींद खराब होती है।
दुनियाभर के लोगों को नींद की सही जानकारी देने और इसकी अहमियत बताने के लिए वर्ल्ड स्लीप डे मनाया जाता है। साल 2024 में इस खास दिन की थीम है 'स्लीप इक्वैलिटी फॉर ग्लोबल हेल्थ' रखी गई है।