स्पैनिश फ्लू की तरह कोरोना की दूसरी लहर हो सकती है जानलेवा, एक्सपर्ट्स ने किया दावा

एक्सपर्ट्स ने आशंका जतायी है कि इन सर्दियों के मौसम में देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर (Second Wave of Coronavirus in India) आएगी। साथ ही एक्सपर्ट्स ने स्पैनिश फ्लू से तुलना करते हुए यह भी कहा है कि, स्पैनिश फ्लू की तरह कोविड-19 की दूसरी लहर भी जानलेवा साबित हो सकती है। (Similarities between Spanish Flu and Covid-19)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 3, 2020 12:29 AM IST

Second Wave of Coronavirus: कोरोना वायरस महामारी की चपेट में आए लोगों की संख्या (Coronavirus Cases in India) हमारे देश में 81 लाख से अधिक हो गयी है। देश के कुछ स्थानों पर जहां संक्रमण के मामलों में कमी आते दिख रही है वहीं, कई स्थानों पर स्थिति अभी भी गम्भीर है। इसी बीच एक्सपर्ट्स ने आशंका जतायी है कि इन सर्दियों के मौसम में देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर (Second Wave of Coronavirus in India) आएगी। साथ ही एक्सपर्ट्स ने स्पैनिश फ्लू से तुलना करते हुए यह भी कहा है कि, स्पैनिश फ्लू की तरह कोविड-19 की दूसरी लहर भी जानलेवा साबित हो सकती है। (Similarities between Spanish Flu and Covid-19)

क्या स्पैनिश फ्लू और कोरोना महामारियां हैं एक जैसी?

वैज्ञानिकों की राय है कि स्पैनिश फ्लू और कोरोना वायरस में काफी समानताएं हैं। इसीलिए, पूर्व में हुए अनुभव और घटनाओं के आधार यही डर है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर घातक हो सकती हैं। दोनों बीमारियों में इस प्रकार की समानताएं हैं-

  • दोनों ही बीमारियां श्वसन तंत्र से जुड़ी हुई हैं। दोनों ही संक्रामक हैं।
  • स्पैनिश फ्लू के बारे में एक्सपर्ट्स को समझ नहीं आया था कि यह किस प्रकार या किस गति से फैली थी। वहीं, कोरोना वायरस के बारे में भी वैज्ञानिकों कुछ पता नहीं चल पा रहा।
  • फ्लू की तरह कोरोना में भी नहीं पता कि महामारी का प्रसार कैसे व कितनी तेजी से हो रहा है।
  •  स्पैनिश फ्लू से मई 1918 में पहली मौत हुई थी लेकिन कुछ ही दिनों में इसकी पहली लहर खत्म हो गई। सरकारें थोड़ी ढीली हुईं तो साल के अंत में इसकी दूसरी लहर ने तबाही मचा दी। जहां केवल डेढ़ साल की अवधि में लगभग 10 करोड़ लोगों की स्पैनिश फ्लू के कारण मृत्यु हो गयी थी ।
  • स्पैनिश फ्लू से अमेरिका में साढ़े 6 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी।
  • वहीं भारत में एक करोड़ से अधिक लोगों की जान स्पैनिश फ्लू के चलते चली गयी थी।

एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिक अक्सर दावा करते रहे हैं कि स्पैनिश फ्लू के बारे में जिस प्रकार के जानकारियां और आंकड़ें उपलब्ध हैं, वास्तविक स्थिति उससे कहीं अधिक डरावनी थी। गौरतलब है कि कोविड-19 के मामले जैसे ही कम होने लगते हैं, उसके तुरंत बाद आंकड़ों में अचानक से बढ़ोतरी होने लगती है। चीन को छोड़कर पूरी दुनिया में कोविड-19 इंफेक्शन के मामलों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका में कोविड-19 की दूसरी लहर के ख़तरे के प्रति लोगों को चेताया गया है। वहीं, इन देशों में दूसरे लॉकडाउन की घोषणा भी कर दी है। जबकि, भारतीय उपमहाद्वीप क्षेत्र में भी कोविड-19 संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

क्यों मानी जा रही कोविड-19 की दूसरी लहर को घातक

दुनिया के कई देशों में सर्दियों का मौसम आरंभ होते ही कोविड-19 संक्रमण भी फैलने लगता है। जहां यूरोप के कई देशों ने सार्वजनिक स्तर पर घोषणा कर दी है कि उनके देश में  कोविड-19 संक्रमण बहुत तेज़ी से फैल रहा है। वहीं, स्पैनिश फ्लू ने भी सर्दियों में दोबारा ज़ोर पकड़ा था और गम्भीर तरीके से लोगों को संक्रमित किया था।

  • दूसरी बात जो चिंताजनक है वह है हवा में कोरोनावायरस का देर तक सक्रिय रह जाना। कोरोना वायरस हवा में घुलकर बहुत देर तक सक्रिय रहता है। जिस वजह से यह कम समय में भी बहुत अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है।
  • कोरोना वायरस श्वसन मार्ग पर सीधा हमला करता है। इसी तरह सर्दियों में जब नाक के अंदर का म्यूकस सूख जाता है तो, इंफेक्शन से लड़ने में श्वसन तंत्र कमज़ोर पड़ जाता है। जिससे, शरीर कोविड-19 संक्रमण की
  • सर्दियों में नाक की झिल्ली सूख जाती है व संक्रमण से मुकाबला करने के लिए कमजोर पड़ने लगती है। इसलिए जब भी वायरस हमला करता है तो वह बचाव नहीं कर पाती। इससे तेजी से संक्रमण फैलता है।
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