डॉक्टरों की चेतावनी, स्क्रब टाइफस के लक्षण दिखने पर ना खाएं खुद से दवा, करें यह काम

स्क्रब टाइफस की बीमारी गम्भीर हो जाने के बाद मल्टीऑर्गन फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है। यहां पढ़ें इस बीमारी के कारण लक्षण और बचाव के उपाय।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : July 11, 2022 12:05 AM IST

कोविड संक्रमण के बढ़ते मामले और मंकीपॉक्स के डर अलावा देश में अब एक और बीमारी के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। देश के कुछ राज्यों से स्क्रब टाइफस (Scrub Typhus) के मामलों का पता लगने के बाद चिंता बढ़ रही है।  मिली जानकारी के अनुसार स्क्रब टाइफ (Scrub Typhus Fever) के अधिकांश मामलों में मरीज बच्चे ही हैं।  बता दें कि,कोलकाता में स्क्रब टाइफस के कई मामलों की पुष्टि की गयी है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने इस स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां शुरु कर दी हैं। वहीं, पार्क सर्कस इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 3 सप्ताह में 10 बच्चों में स्क्रब टाइफस से संक्रमण की पुष्टि हुई हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। (Scrub Typhus Symptoms and prevention in Hindi)

पैरासिटामोल ना लेने की सलाह

एक्सपर्ट्स के अनुसार, बरसात के मौसम में स्क्रब टाइफस की बीमारी फैल सकती हैं। स्क्रब टाइफस की बीमारी एक विशेष कीड़े के डंक से होती है। थ्रोम्बोसाइटोपेनिक माइट्स नामक यह कीड़ा जब शरीर में प्रवेश करता है तो उससे शरीर में स्क्रब टाइफस के बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। एक्सपर्ट्स द्वारा यह सलाह दी गयी कि जब स्क्रब टाइफस की बीमारी के लक्षण दिखायी दें तो साधारण पेनकिलर या पैरासिटामोल जैसी दवाइयां लेने की बजाय तुरंत अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें। स्क्रब टाइफस के लक्षणों की समय पर पहचान करने और इसका समय पर इलाज करने से इस बीमारी को गम्भीर होने से बचाया जा सकता है। स्क्रब टाइफस की बीमारी बढ़ जाने के कारण मल्टी ऑर्गन फेल्योर का खतरा भी बढ़ सकता है जो एक घातक बीमारी है।

स्क्रब टाइफस के लक्षण क्या हैं? (Scrub Typhus symptoms in Hindi)

  • तेज सिरदर्द
  • डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स
  • उल्टी होना आदि
  • डंक मारने का घाव और रैशेज
  • बुखार आना
  •  हाथों- पैरों में बहुत अधिक दर्द
  • आंखों के आसपास दर्द महसूस होना

स्क्रब टाइफस से बचाव के उपाय क्या हैं?

  • चूंकि स्क्रब टाइफस बच्चों में फैलने वाली बीमारी है इसीलिए, बच्चों को साफ-सुथरे कपड़े पहनाएं।
  • घर के बाहर जाते समय बच्चों को जूते पहनकर ही बाहर जाने दें और उन्हें पार्क और बगीचों में झाड़ियों के आसपास जाने से रोकें।
  • बच्चों को धूल- मिट्टी और घास के सम्पर्क में आने से बचाएं।
  • बच्चे को बुखार आने पर उसे डॉक्टर को दिखाएं।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई बीमारी और उनके इलाज से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)

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