सिजोफ्रेनिया : रोगी को उपचार के साथ है प्‍यार की भी जरूरत

मानसिक दृढ़ता से इसके प्रभाव को कम जरुर किया जा सकता है। ऐसे में व्यक्ति को परिवार और दोस्तों के सहारे, मदद और प्यार की जरुरत होती है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : February 6, 2019 2:27 PM IST

दुनिया भर में विभिन्‍न कारणों से मानसिक बीमारियों में इजाफा हो रहा है। यह विडंबना ही है कि हम सूचना, तकनीक और अन्‍य क्षेत्रों में जितनी तरक्‍की कर रहे हैं, मानसिक बीमारियों में भी उतना ही इजाफा होता जा रहा है। मानसिक बीमारियों से जुड़ा सबसे बड़ा तथ्‍य यह है कि इसका उपचार बिना प्‍यार और देखभाल के संभव ही नहीं है। ऐसी ही एक बीमारी है सिजोफ्रेनिया, जिसमें पीडि़त अपनी ही बनाई दुनिया में गुम हो जाता है।

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जानें सिजोफ्रेनिया के बारे में

सिजोफ्रेनिया एक प्रकार की मानसिक बीमारी होती है इस मानसिक विकार के कारण व्यक्ति के सोचने-विचारने की क्षमता पूरी तरह बर्बाद हो जाती है। इस डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति वास्तविकता से दूर होता जाता है। आज हम आपको सिजोफ्रेनिया रोग, इसके लक्षण और उपचार के बारे में बताने जा रहे हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति एक काल्पनिक दुनिया में जीता है जिसका पूरा प्रभाव उसके काम पर पड़ता है। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति का समाज में रह पाना काफी मुश्किल हो जाता है उसे अजीबो-गरीब आवाजें सुनाई देती है और अक्सर ऐसी चीजें दिखाई देती हैं जो वास्तव में होती ही नहीं हैं, ऐसे में वह हमेशा एक डर में जीता है और अवसादग्रस्त हो जाता है।

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प्रभावित हो जाता है पूरा जीवन

इस बीमारी का असर पीड़ित के काम,रिलेशनशिप के साथ-साथ निजी और सार्वजनिक जीवन पर भी पड़ता है। इस बीमारी का पूर्ण उपचार तो संभव नहीं लेकिन दवाओं और सही उपचार की मदद से इसके बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है।

ये हो सकते हैं संभावित कारण

  1. अनुवांशिक – अधिकतर लोगों को सिजोफ्रेनिया आनुवांशिक होता है। यह रोग माता-पिता में से किसी को भी होने पर बच्चे को होने का खतरा बढ़ जाता है।
  2. गर्भावस्था में सही पोषण न मिलना- जब बच्चा कोख में होता है तो मां के पोषक तत्वों का सेवन न करने की वजह से भी बच्चे का दिमाग सही से विकसित नहीं हो पाता है। इससे बच्चे को सिजोफ्रेनिया होने का खतरा होता है।
  3. ड्रग्स का सेवन - ड्रग्स का सेवन करने वाले लोग भी सिजोफ्रेनिया का शिकार हो जाते हैं। अक्सर लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरुकता नहीं होती इसलिए वे गंभीर रुप से इस बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं।

पहचानें इसके लक्षण

भ्रम की स्थिति - इस बीमारी में लोगों को अक्सर ऐसे विचार आते हैं जो कि सच नहीं होते। वे ऐसी चीजों को देखकर भ्रमित होते हैं जो उस जगह मौजूद ही नहीं होती है। इससे उनकी मानसिक स्थिरता भी नष्ट हो जाती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति अक्सर गलत तरीके से ही सोचते हैं। बार-बार भ्रम का शिकार हो जाना सिजोफ्रेनिया का एक संकेत होता है।

ध्यान लगाने और बोलने में परेशानी - इन लोगों के दिमाग में बहुत ज्यादा ख्याल आते हैं। अलग-अलग तरीके के विचार आने के कारण वे अक्सर किसी एक चीज पर ध्यान नहीं लगा पाते और न ही अपने मन की बात को सही तरह से जाहिर कर पाते हैं। ऐसे लोगों को ध्यान लगाने और बोलने में परेशानी होती है।

अजीब व्यवहार - इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का व्यवहार बदल जाता है। वे अक्सर नकारात्मक सोचते हैं जिसका प्रभाव उनके व्यवहार पर पड़ता है। वे अक्सर डर में जीते हैं और घबराहट के कारण चीखते-चिल्लाते हैं। कई बार उनका व्यवहार इतना हिंसक हो जाता है कि इससे दूसरे लोगों को नुकसान पहुंचता है।

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हल्लुसिनेशन - यह एक प्रकार का मतिभ्रम होता है जिसमें पीड़ित व्यक्ति को ऐसी चीजें दिखाई, सुनाई देती है जो वास्तविक रुप में मौजूद ही नहीं होती है। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों को अक्सर ऐसी चीजें दिखाई और सुनाई देती है जो होती ही नहीं हैं। ऐसे में वे इतने परेशान हो जाते हैं कि अपने आप को नुकसान पहुंचाने लगते हैं जो कि सिजोफ्रेनिया का एक हानिकारक संकेत है।

अनावश्‍यक डर - इससे पीड़ित लोग अक्सर डर के साये में जीते हैं। रोजमर्रा के काम जैसे वॉक पर जाना, खाना बनाना जैसे काम करना भी उनके लिए मुश्किल हो जाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति साधारण सी चीजों से भी डरने लगता है और उसे लगता है कि हर एक चीज से उसे जान का खतरा है। इस बीमारी में पीड़ित की मानसिक शांति बिल्कुल समाप्त हो जाती है।

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उपचार के साथ जरूरी है प्‍यार - जागरुकता की कमी की वजह से सिजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति इस मेंटल डिसऑर्डर से बुरी तरह प्रभावित होता है और आत्महत्या करने के ख्याल भी उसके दिमाग में आने लगते हैं। सिजोफ्रेनिया का ईलाज पूरी तरह संभव नहीं है, लेकिन मानसिक दृढ़ता से इसके प्रभाव को कम जरुर किया जा सकता है। ऐसे में व्यक्ति को परिवार और दोस्तों के सहारे, मदद और प्यार की जरुरत होती है। रोगी को मनोरोग चिकित्सक से परामर्श और दवाओं का भी सहारा लेना चाहिए। मजबूत इच्छा शक्ति से और अपनों के प्यार की मदद से आप इस परेशानी से उबर सकते हैं।

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