
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
काल को कल पर टालने की आदत (Image Credit- ChatGPT)
"आज थक गई हूं तो बाकी का काम कल कर लूंगी या लूंगा" ऐसा हम दिन में 2-3 बार तो कह ही देते हैं। लेकिन कुछ लोगों की आदत सी होती है कि वे अपने आने वाले कल पर अपना बहुत सा काम छोड़ देते हैं। कुछ लोग इसे आलस समझते हैं, लेकिन किसी का ऐसा बार-बार या फ्रीक्वेंटली करना उनके मन में छिपी एक भावना को दिखाता है। जी हां, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा कहती हैं कि हर बार काम टालना आलस की वजह से नहीं होता। कई बार इसके पीछे स्ट्रेस, फेल होने का डर, परफेक्शन की चाह या मानसिक थकान जैसी वजहें हो सकती हैं।"
वह कहती हैं कि अगर किसी व्यक्ति की यह आदत लंबे समय से बनी हुई है और इससे उसकी पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों या शरीर पर असर पड़ रहा है तो इसे सीरियस लेने की जरूरत है। क्यों? आइए साइकोलॉजिस्ट से विस्तार से जानते हैं कि जो लोग अपने काम को लंबे समय तक और बार-बार कल पर छोड़ देते हैं, उनके मन में क्या भावनाएं होती हैं?
हमेशा काम टालना आलस की निशानी नहीं होती है, बल्कि इसे साइकोलॉजी में प्रोक्रैस्टिनेशन कहा जाता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति जानता है कि कोई काम जरूरी है, फिर भी वह उस काम की अहमियत जानते हुए भी उसे टाल देता है। एक्सपर्ट बताती हैं कि प्रोक्रैस्टिनेशन कई बार टाइम मैनेज न कर पाने की समस्या नहीं होता है, बल्कि फीलिंग्स को संभालने में आने वाली कठिनाई का संकेत हो सकता है। यानी व्यक्ति उस काम से जुड़ी बेचैनी, तनाव या डर से बचने के लिए उसे टाल देता है।
कई बार लोग काम इसलिए भी पूरा नहीं कर पाते हैं, क्योंकि उनके मन में यह फीलिंग होती है कि अगर वह सफल न हो पाए तो क्या होगा। यह भावना उन्हें कुछ भी करने से रोक सकती है। जैसे कई बार बच्चे इसलिए भी अपने कई एग्जाम छोड़ देते हैं, क्योंकि उन्हें असफल होने का डर लगा रहता है। उन्हें लगता है कि वे अच्छे नंबर नहीं ला पाएंगे या पास नहीं हो पाएंगे। इससे उनका स्ट्रेस बढ़ता है और वे काम पूरा करने के बजाय कल पर टाल देते हैं।
डॉक्टर बताती हैं कि कुछ लोग हर काम को परफेक्ट तरीके से करना चाहते हैं, लेकिन उनके अंदर खुद में भरोसा करने की पूरी हिम्मत नहीं होती है। इसलिए जब वह कुछ करने की सोचते हैं, तो काम परफेक्ट न होने का डर उन्हें काम पूरा नहीं करने देता। उन्हें लगता है कि आज नहीं, कल पूरे मन से करेंगे, और इसी तरह वह हर काम को कल पर टालते रहते हैं। इस तरह की परफेक्शनिस्ट सोच काम शुरू करने और पूरा करने में देरी कर सकती है। कई बार लोग छोटी-छोटी बातों में उलझकर मुख्य काम को ही टाल देते हैं।
कई बार ऐसा होता है कि हमारे ऊपर इतना काम होता है कि कुछ न कुछ छूट ही जाता है। ऐसे में सब काम करने की बजाय या या तो व्यक्ति कुछ काम अगले दिन के लिए छोड़ देता है या सभी काम अधूरे छोड़कर अगले दिन पर टाल देता है।वहीं अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से तनाव में है, ठीक से सो नहीं पा रहा है या मानसिक रूप से थका हुआ महसूस कर रहा है, तो उसकी निर्णय लेने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में जरूरी काम भी भारी लगते हैं और व्यक्ति उन्हें बाद के लिए छोड़ देता है।
आपके साथ भी ऐसा कभी न कभी हुआ होगा कि अगर आपके पास दो चार काम आए तो आपने उनमें से आसान वाला कर लिया और बाकी सभी को कल के लिए टाल दिया। इससे यह हुआ कि आपको जल्दी काम करने की खुशी तो मिली, लेकिन बाकी काम अगले दिन के लिए टाल दिए। हमारा दिमाग अक्सर उस काम को पहले चुनता है जिससे तुरंत खुशी या संतुष्टि मिले। इसे साइकोलॉजी में इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन कहते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। अगर काम टालने की आदत आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, पढ़ाई या नौकरी को प्रभावित कर रही है, तो किसी अच्छे क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक से व्यक्तिगत सलाह लें। खुद से इसे सामान्य न समझें।