तीसरी लहर का खतरा कम करने के लिए घर की हवा को इन एक्सपर्ट टिप्स से करें साफ, 90% तक कम होगा संक्रमण का खतरा

कई रिसर्च से पता चला है कि यह वायरस हवा के जरिए भी फ़ैल सकता है, इसलिए डर और भी ज्यादा गहरा हो चला है। जानिए कैसे बनाएं घर की हवा को स्वच्छ।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : September 16, 2021 12:44 PM IST

इसमें कोई दो राय नहीं कि कि कोविड-19 की वजह से हमारी जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है। भले ही हमने वैक्सीन लगवा ली हो या नहीं, हम अब भी कोविड की वजह से भय और एंग्जाइटी में जीने को मजबूर हैं। इन्फेक्शन का असर ही ऐसा है कि जिससे चिंताएं बढ़ी हुई है। जिस व्यक्ति ने पूरी तरह वैक्सीन लगवा ली है वह भी कोविड वायरस से भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। कई रिसर्च से पता चला है कि यह वायरस हवा के जरिए भी फ़ैल सकता है, इसलिए डर और भी ज्यादा गहरा हो चला है।

ऐसा पता चला है कि कोरोनावायरस आउटडोर के मुकाबले इंडोर जगहों में तेजी से फैलता है और ज्याद खतरनाक भी होता है। इसका मतलब यह है कि भले ही आप बाहर न निकलें और आप सोचें कि वायरस से आप बचें है तो ऐसा मुमकिन नहीं है। घर के अंदर रहने से भी आप वायरस से संक्रमित हो सकते है जोकि बहुत बड़ी चिंता की बात है।

क्यों बाहर की तुलना में घर के अंदर तेजी से फैलता है कोरोना

पारस हॉस्पिटल्स, पंचकूला के इन्टरनल मेडिसिन - सीनियर कंसल्टेंट डॉ राजेश गेरा ने कहा, " कोरोना वायरस की तीसरी लहर के लिए खुद को तैयार करना जरूरी है कि हम वैक्सीन लगवाने के प्रयासों पर बराबर ध्यान दें और व्यवहारिक वैक्सिनेशन का पालन करें। मास्क के सही प्रयोग और सोशल डिस्टेंसिंग के उपायों के अलावा, संक्रमण दर को कम रखने मेंइनडोर स्वच्छता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साधारण सांस लेने, बोलने, खांसने और छींकने से बड़ी मात्रा में संभावित संक्रामक एरोसोल उत्पन्न होते हैं। ये वायरस वाली बूंदें संक्रमण को प्रमुख रूप से फैलाती हैं।"

उन्होंने कहा कि इस प्रकार घर के अंदर विभिन्न सतहों पर चिपके वायरस से छुटकारा पाने के लिए घर के अंदर बेहतर कीटाणुनाशक का उपयोग किया जाना चाहिए। घरेलू और ऑफिस उपयोग में फर्श, डोर नॉब्स, टेबल की सतहों पर केमिकल कीटाणुनाशक का उपयोग करने से कोरोना फैलने से काफी हद तक रोका जा सकता है। जिन सतहों पर पोछा लगाना संभव नहीं है, उन्हें जेट और स्प्रे से साफ किया जा सकता है। कपड़े, बर्तन, चिकित्सा उपकरण जैसी सतहों और निर्जीव वस्तुओं को कीटाणुरहित और स्वच्छ रखने के लिए अल्ट्रवायलेट एक और साफ़ सफाई का विकल्प उपलब्ध है।

महामारी से सीखें हैं कई सबक

आकाश हेल्थकेयर, द्वारका के आर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट के हेड और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ आशीष चौधरी ने कहा, "महामारी के कहर को झेलते हुए हमने कई सारे सबक सीखें हैं। उनमें सबसे बड़ा सबक घर, ऑफिस, स्कूल, कॉलेज के अंदर बेहतर साफ़ सफाई को बनाए रखना है। हाथ धोने और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे संक्रमण को फैलने से रोकने के सामान्य उपायों के अलावा घर के अंदर की सफाई अक्सर आम जगहों पर होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि सांस लेने, बात करने, खांसने या छींकने, सांस छोड़ने के दौरान बनने वाले ड्रॉपलेट स्प्रे के माध्यम से वायरस हवा के माध्यम से फैलते हैं। ये ड्रॉपलेट (बूंदें) सतहों पर जमा हो सकती हैं जिससे संक्रमण फैलने की संभावना बढ़जाती है। सामान्य सतह डिसइन्फेक्शन प्रक्रियाओं का उपयोग करके दूषित सतहों को एक मिनट के अंदर डिसइन्फेक्ट किया जा सकता है। सतहों को साफ करने के लिए इन तरीकों को अपनाया जा सकता है: (i) स्प्रे (ii) मोप्स और (iii) यूवी एलईडी आधारित ट्रीटमेंट।

डब्लूएचओ भी सही करार दे चुका है ये दावा

मैगनीटो क्लीनटेक के सीईओ हिमांशु अग्रवाल ने कहा, "वर्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) ने पुष्टि की है कि कोविड-19 वायरस हवा से भी फैलता है, और बंद वातानुकूलित इनडोर स्थानों में इसके फैलने के ख़तरा बहुत ज्यादा रहता है क्योंकि वायरस से दूषित एरोसोल 6-फीट से ज्यादा दूरी तक जा सकते है। रिसर्च के मुताबिक़ PM 2.5 के कण भी कोरोनावायरस को फैला सकते हैं।"

उन्होंने कहा कि इस वजह से ये तीसरी लहर में भारत के लिए बहुत घातक साबित हो सकते है, क्योंकि हमारे कुछ शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर में आते हैं। अक्टूबर के आसपास नई दिल्ली दुनिया का 'सबसे प्रदूषित शहर' बन जाता है, यहाँ इस दौरान बहुत ज्यादा प्रदूषण फ़ैल जाता है। इसलिए सभी प्रकार के इनडोर स्थानों के लिए भारत में एयर सैनिटाईजेशन (वायु स्वच्छता) महत्वपूर्ण है।

हिमांशु अग्रवाल बताते हैं कि एडवांस एयर सैनिटाईजेशन सोल्यूशन (वायु स्वच्छता समाधान) आज न केवल हवा में वायरस, बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक कणों को रोक सकते हैं, बल्कि उन्हें समाप्त भी कर सकते हैं ताकि ये कण आगे न फैलें और वायरस का विस्तार न हो। इन सिस्टम के लगने से आपका परिवार न केवल स्वच्छ हवा में सांस ले सकता है, बल्कि सुरक्षित और स्वस्थ हवा में सांस लेने का लाभ भी उठा सकता है। आज सेंसर और डिस्प्ले मॉनिटर उपलब्ध हैं जिससे आप देख सकते हैं कि आपका परिवार किस प्रकार की हवा में सांस ले रहा है।

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