Salt Therapy : वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाए ''सॉल्ट थेरेपी'' जानें यह थेरेपी कैसे करती है काम

टाटा सॉल्ट की अनूठी पहल में नमक के उपचारात्मक लाभों का उपयोग करके वायु प्रदुषण से होने वाली बीमारियों का किया जा रहा है इलाज।

WrittenBy

Written By: Anshumala | Updated : January 11, 2020 5:08 PM IST

हर साल सर्दियों में वायु प्रदुषण (Air pollution) का सामना करना दिल्लीवासियों के लिए एक गंभीर समस्या होती है, लेकिन इस साल वे सुकून की सांस ले सकते हैं, क्योंकि वायु प्रदुषण के बुरे परिणामों का सामना करने में टाटा सॉल्ट की 'सॉल्ट थेरेपी' (salt therapy benefits) दिल्लीवासियों को मदद करेगी। इसमें नमक के उपचारात्मक लाभों (Therapeutic effect of salt) का उपयोग किया जा रहा है। रिपोर्ट्स बताते हैं कि दिल्ली की हवा में जहर घुलता जा रहा है, जिससे एलर्जी, अस्थमा, सीपीओडी और ब्रोंकायटिस जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। टाटा सॉल्ट की अनोखी मोबाइल 'सॉल्ट थेरेपी' हौज खास, जनकपुरी जिला केंद्र और दिल्ली के अन्य प्रमुख इलाकों में उपलब्ध कराई गई है।

क्या है सॉल्ट थेरेपी (What is salt therapy)

नमक थेरेपी को ''हैलो थेरेपी'' भी कहा जाता है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसमें मरीज को कोई भी दवाई लेने की जरूरत नहीं होती। सांस फूलना, नाक और गले में जलन, एलर्जी, शरीर पर एलर्जी के लक्षणों से आराम दिलाने में यह नमक थेरेपी (salt therapy benefits) लाभकारी होती है। सॉल्ट या हैली थेरेपी में एक कमरे में नमक की गुफा की तरह वातावरण बनाकर, उसमें मरीज को बिठाकर सूखे नमक के बहुत ही छोटे-छोटे कणों को सुंघाया जाता है। रिसर्च में पता चला है कि हैलो थेरेपी से सांस की नालियों की सूजन कम होती है, ब्रोन्कायल अस्थमा, ब्रोन्काइटिस और सीपीओडी के लक्षणों को कम करने में यह लाभकारी साबित हुआ है।

लो सोडियम नमक का सच क्या है ?

सॉल्ट थेरेपी के सेहत लाभ (benefits of salt therapy)

नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डिपार्टमेंट ऑफ रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन के कन्सल्टन्ट डॉ. निखिल मोदी ने बताया, "नमक को सांस के साथ इनहेल करने से सांस की नलियों को खोलता है, बलगम को ढीला कर सांस लेने में आराम दिलाता है। इससे कफ को साफ किया जा सकता है, इंफेक्शन का खतरा कम होता है और बीमारी के लक्षणों से आराम मिलता है। रिसर्च में पता चला है कि नमक थेरेपी यानी सॉल्ट थेरेपी से श्वसन क्रिया और मरीजों की प्रतिरक्षा स्थिति में सुधार होता है।

सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद है सॉल्ट थेरेपी

सांस की बीमारियों से पीड़ितों के लिए यह खास फायदेमंद है। अस्थमा, ब्रोन्काइटिस, एलर्जी और सीपीओडी जैसी सांस की गंभीर बीमारियों से पीड़ितों के लिए नमक थेरेपी प्राकृतिक उपचार का एक गुणकारी विकल्प है। यह बीमारियां वायु प्रदुषण की वजह से होती और बढ़ती हैं। मोबाइल 'सॉल्ट थेरेपी' से लोगों को वायु प्रदुषण के बुरे प्रभावों से लड़ने और सांस की बीमारियों को बढ़ने से रोकने के लिए एक सुविधाजनक विकल्प है। नमक से कई उपचारात्मक लाभ मिलते हैं और कई प्रकारों से उन्हें घर पर भी लिया जाता है। नमकीन भाप को सांस के जरिए इनहेल करना या नमक मिलाए हुए पानी से कुल्ला करना यह इनमें से कुछ आम इलाज हैं।

Salt vs Sugar : नमक और चीनी कितना खाएं, अधिक एवं कम खाने के नुकसान-फायदे भी जानें

कब तक करें सॉल्ट थेरेपी

नमक थेरेपी का एक आमतौर पार लगभग 45 मिनट से एक घंटे तक चलता है। सत्र के दौरान व्यक्ति को बस एक कुर्सी में आराम से बैठकर सांस लेते रहना होता है। नमक के छोटे-छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचकर सांस की नलियों को खोलते हैं और व्यक्ति को सांस लेने में आराम महसूस होता है। स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट 2019 के एक सर्वेक्षण के अनुसार, दुनिया भर में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा पांचवा कारण वायु प्रदुषण है। यह कुपोषण, शराब की वजह से होने वाले रोग, शारीरिक निष्क्रियता से भी अधिक घातक साबित हुआ है। हर साल सड़क दुर्घटनाओं या मलेरिया से भी होने वाली मौतों से भी ज्यादा मौतें वायु प्रदुषण से होने वाली बीमारियों की वजह से होती हैं।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source